#Kavita by Rajendra Bahuguna

ये मुर्दो का गाँव है प्रजातन्त्र के मन्दिर में छल,कपटी चुन कर आयेंगे इस संसद की चौखट चूमेंगे भावभक्ति दिखलायेंगे

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#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan

भूख ,गरीबी, बेकारी ,…….   बदहाली मिटा न पाता, फिर,अधिनायक,जनगणमन का कैसा भाग्य विधाता? —————————————————————- डिग्री बढ़तीं जातीं लेकिन,.  हाथ को

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#Bhajan by Dr Prakhar Dixit

सदाशिवं नमो नम: ============= अंग भस्म लोपितं हिमाद्रि श्रृंग आसने नीलकंठ सर्प माल सदाशिवं नमो नम:।।   पिशाच भूत गणादि

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