#Kavita by Laxmi Tiwari

बेटे की चाहत  में संसार  में आती हैं बेटियां.. त्यौहार सी उमंग  जगाती  हैं बेटियाँ..   खाद, पानी, ऊर्जा, बेटे

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#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

यारो आदमी को गुरूर में, जमीं नहीं दिखती ! किसी भी और की आँखों में, नमी नहीं दिखती ! औरों में तो दिखती हैं कमियां हज़ार उसको, मगर उसे खुद के वजूद में, कमी नहीं दिखती ! रहता है अपनी खुशियों के जश्न में ग़ाफ़िल वो, उसको तो किसी के दिल में, ग़मी नहीं दिखती ! दिखती हैं बुराइयां उसको तो सच्ची बातों में भी,   मगर अपनी जुबां के तीरों में, अनी नहीं दिखती ! पढ़ाते हैं “मिश्र“औरों को सदा ही पाठ नरमी का, पर खुद को अपने मिज़ाज़ में, गरमी नहीं दिखती ! शांती स्वरूप मिश्र  

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