# Gazal by Shanti Swaroop Mishra

कैसी सजा है ये ज़िन्दगी, ये हमसे न पूँछिये ! कैसे गुज़रते हैं ये रात दिन, हमसे न पूँछिये ! बामुश्किल भूल पाए हैं गुज़रे जमाने को हम, कैसे बिखरती है ख्वाहिशें, ये हमसे न पूँछिये ! जिन्हें रास आया हे जीना उन्हें दुआ है हमारी, मगर मरते हैं कैसे घुट घुट के, हमसे न पूँछिये ! रोशन हैं घर जिनके मुबारक हो रौशनी उन्हें, मगर कैसे पसरते हैं सन्नाटे, ये हमसे न पूँछिये ! खुश रहें इस दुनिया के लोग तमन्ना है हमारी, पर आंसुओं की कीमत है क्या, हमसे न पूँछिये ! ज़िन्दगी उलझन के सिवा कुछ भी नहीं “मिश्र”, लोग कैसे कुचलते हैं अरमां, ये हमसे न पूँछिये !

Read more

#Kavita by Rajendra Bahuguna

क्या भारत दुनिया का संराय है मारो काटो रक्त बहाओ,सब रूधिर मांस को मिलकर चाटो हिन्दू,मुस्लिम ,सम्प्रदाय और मजहब को

Read more

#Lekh by Ishwar Dayal Jaiswal

ऐसा क्यों है ? ÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷ राष्ट्रीय पर्वों गणतंत्र दिवस , स्वतंत्रता दिवस , महात्मा गांधी जंयती के अवसर पर सार्वजनिक

Read more

#Kavita by Babita Kumari

प्रकृति की पुकार प्रकृति करे पुकार न उजाड़ो-2 मेरा हरा-भरा संसार प्रकृति करे पुकार. वृक्ष कहे-न काटो मुझको धरा कहे-न

Read more