#Kavita by Acharya Amit

जगा रही है नींद से ख्वाहिशें अनकही सी सौंप रही है वेदनाओं की परछाइयां अपनी हमें कुछ पगडंडियां नई-नई उड़ेल

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#Kavita by Jasveer Singh Haldhar

मुक्तिका -वोटर मसाला साथियों ————————————– हर किसी को चाहिए वोटर मसाला साथियो । गैर की खातिर यहाँ होता बबाला साथियों

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