#Muktak by Mam Chand Agrwal Vasant

दोहे विषय-प्रेम -मामचंद अग्रवाल वसंत जमशेदपुर,09334805484 ढाई आखर प्रेम के,बतला गए कबीर। प्रेम भूल अब के युवा,चीर रहे चीर।। प्रेम

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#Kavita by Binod Kumar

मध्यान भोजन विधा: मनहरण घनाक्षरी शिल्प :८,८,८,७ वर्ण प्रति चरण। गुरू को न तंग करें, शांति नहीं भंग करें। व्यर्थ

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#Lekh by Ramesh Raj

तेवरी- व्यवस्था-परिवर्तन की माँग +चरनसिंह ‘अमी’ ———————————————— परिवर्तन प्रक्रिया के लिए मुख्यतः तत्कालीन परिवेश, माँग, परम्परा, मूल्य, अधिक जिम्मेदार होते

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