#Gazal by Roopesh Jain

सर झुकाना आ जाये नज़ाकत-ए-जानाँ1 देखकर सुकून-ए-बे-कराँ2 आ जाये चाहता हूँ बेबाक इश्क़ मिरे बे-सोज़3 ज़माना आ जाये मुज़्मर4 तेरी अच्छाई हम-नफ़्स मुझमे, क़िस्मत मिरी लिखे जब

Read more

#Kavita by Laxmi Tiwari

बेटे की चाहत  में संसार  में आती हैं बेटियां.. त्यौहार सी उमंग  जगाती  हैं बेटियाँ..   खाद, पानी, ऊर्जा, बेटे

Read more

#Kavita by Babita Kumari

प्रकृति की पुकार   प्रकृति करे पुकार न उजाड़ो-2 मेरा हरा-भरा संसार प्रकृति करे पुकार. वृक्ष कहे-न काटो मुझको धरा

Read more

#Kavita by Ajay Jain

मर्यादा का मानसरोवर साहस भी शीश झुकाता है   खुशी खुशी न्यौछावर जीवन मानव विरला कर पाता है   सर्वस्य

Read more

#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

हमतो बस अपनों की, दगा से डरते हैं !  तूफ़ान झेल कर भी, हवा से डरते हैं !  दुश्मनों से कोई शिकवा गिला नहीं, मगर हम दोस्तों की, ज़फ़ा से डरते हैं ! नफरतों का कोई भी डर नहीं हमको,  मगर हम मोहब्बत की, सजा से डरते हैं ! बहुत रंग देखे हैं इस जमाने के हमने, हम ज़हर से नहीं बस, दवा से डरते हैं ! हमें ग़म नहीं इस दुनिया के सितम का,  हमतो बस अपनी ही, खता से डरते हैं !   शांती स्वरुप मिश्र

Read more