#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

कभी बेमक़सद किसी की ,हम पे नवाज़िश नहीं होती ! कभी खुद के लिए हम से, किसी से गुज़ारिश नहीं होती ! वो ज़रा सा मुस्कुरा दें, तो चाहतों की बाढ़ आ जाती है, हम दिल भी निकाल कर रख दें, तो जुम्बिश नहीं होती ! वो तो हर रोज़ तोड़ते हैं, दिल न जाने कितने दिवानों का, फिर भी किसी की न जाने क्यों, उनसे रंजिश नहीं होती ! अगर दर्द भी बयां करें हम, तो चुप करा देते हैं वो हमको, पर कभी भी उनकी जुबाँ पे यारो, कोई बंदिश नहीं होती ! न ठहरता कभी खुदा भी, किसी के ज़हरीले दिल में “मिश्र” पाक जिगर के बिना खुदा की, कभी परस्तिश नहीं होती ! शांती स्वरूप मिश्र

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#Kavita by Avdhesh Kumar Avad

अपना हिदुस्तान दुनिया में सबसे प्यारा है, अपना हिन्दुस्तान । एक साथ सब मिलकर बोलो,भारत देश महान। चाक चलाना सिखलाया

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