#Tewari by Ramesh Raj

| लोक- शैली ‘रसिया’ पर आधारित तेवरी || ..……………………………………… पूँजीवादी चैंटे, कुछ दिन खुश हो लें करकैंटे जनवादी चिन्तन की

Read more

#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

यारो गुज़रे हुए उन लन्हों को, हम कैसे भुला दें   आखिर अपनों के करतबों को, हम कैसे भुला दें हम चले थे साथ मिल कर एक कारवां बना कर,   पर उन कंकड़ से भरे रस्तों को, हम कैसे भुला दें  वक़्त आता है चला जाता है छोड़ कर निशाँ अपने, भला सर पड़ी उन आफतों को, हम कैसे भुला दें वक़्त के हर दौर मैं जो शामिल थे मेरी इमदाद में,  आखिर मेहरवां जिन्दा दिलों को, हम कैसे भुला दें  ज़िन्दगी के सफर में साथ छोड़ा न जाने कितनों ने, भला उनके सुझाये मशविरों को, हम कैसे भुला दें  “मिश्र” आये थे हम दुनिया में कुछ करने के वास्ते, फिर उसके दिए उन मक़सदों को, हम कैसे भुला दें   शांती स्वरूप मिश्र    

Read more

#Gazal by Ishq Sharma

मेरी नज़र में जब तू नज़र नहीं आता है सच कहता हूँ  कुछ नज़र नहीं आता है ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• रोजमर्रा में 

Read more