#Gazal BY Shanti Swaroop Mishra

अपनी ज़िन्दगी ने, कितने ही बवाल देखे हैं ! जो थे कभी अपने, उनके भी कमाल देखे हैं ! वक़्त बिगड़ते ही फेर लीं जिसने नज़र यारो,   इन आँखों ने कभी, उसके भी हवाल देखे हैं ! न रही इन आँखों में तलब दीदार की अब,  पर क़रीब से कभी, हमने भी जमाल देखे हैं ! न हुए कभी पूरे जो देखे थे ख्वाब हमने भी, हमने हसीनों के, नखरे भी बेमिशाल देखे हैं ! दिल में उभरते हैं कभी उल्फत के उजाले,   मगर नफ़रत, के अँधेरे भी बेमिशाल देखे हैं ! न पड़ो “मिश्र” इस मोहब्बत के पचड़े में तुम,  हमने दिवानों के, चेहरे भी बदहवाल देखे हैं ! शांती स्वरूप मिश्र

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