#Tewari Ramesh Raj

रमेशराज की तेवरी।। तभी बिखेरे बाती नूर, ये दस्तूर मोम सरीखा गल प्यारे ! वर्तमान से तुझको मुक्ति? कोई युक्ति??

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#Kavita by Abhishek Shukla

-‘मर्दानी’ “एक ही रानी लक्ष्मीबाई यहाँ नही दुश्मनों संग से लडती है, भूख,प्यास,बेरोजगारी संग यहाँ तो रोज़ बलिवेदी सजती है।

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