#Gazal Pradeep Mani Tiwari

ग़ज़ल★★★★★ बह्र/अर्कान-1222×4,मुफाईलुन, मुफाईलुन मुफाईलुन मुफाईलुन ★★★★★★★★★★★★ नही औकात दरिया की समंदर आब लेता है। उसे है दर्प दरिया से मगर

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