#Pustak Samiksha by Kavi Rajesh Purohit

पुस्तक समीक्षा कृति :- अट्टहास प्रधान संपादक :- अनूप श्रीवास्तव अतिथि संपादक:- विनोद कुमार विक्की पृष्ठ:- 56 सम्पादकीय कार्यालय:- 9,गुलिस्तां

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#Kavita by Dr Roopesh Jain Rahat

काश! तुम मेरे प्यार को समझ पाती परिणय की परिपाटी में तुम पर न्यौछावर हुआ तुम्हें अपना वर्तमान और भविष्य माना हर पग तेरे साथ चलने की कोशिश की, तुम में ही अपना सर्वस्व ढूँढा काश! तुम मेरे प्यार को समझ पाती। हर रात उठ-उठ कर तेरे चेहरे में ख़ुद को ढूँढा हर सुबह उठ कर तेरे सोते हुये चेहरे का अजब सा मुँह मोड़ना देखकर ख़ुश हुआ तेरे बालों की महक से तेरी थकान का अंदाज़ा लगा सकता हूँ तेरे चेहरे की शिकन से तेरा मूड बता सकता हूँ काश! तुम मेरे प्यार को समझ पाती। हालांकि गुलाबी शूट और बैंगनी साड़ी तुम पे जचती है गुलाब की चार पंखुड़ियाँ तेरी मुस्कान बढ़ाती हैं सूरज की कुछ ही किरणों में तुम थक जाती हो हवा के चंद झोंकों में ठण्ड से डर जाती हो काश! तुम मेरे प्यार को समझ पाती। घर के किसी भी कोने में जब तुम होती हो क्या महसूस किया तुमने, हर थोड़ी देर में तुम्हें देख जाता हूँ काली टी-शर्ट में तेरा सोता हुआ फोटो देख कर आज भी चहक जाता हूँ सेवपुरी के दो टुकड़ों में तेरी मुस्कान अब भी दिखती है काश! तुम मेरे प्यार को समझ पाती।

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#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

दुनिया की इस धरती से, अब सत्य अहिंसा लुप्त हो गए ! अब लूट पाट और हिंसा में, सब के सब ही चुस्त हो गए !! सत्य अहिंसा की बातें, अब मिलती हैं सिर्फ किताबों में ! झूठ कुटिलता बेईमानी, अब मिलती है सभी जवाबों में !! जो सच्चाई का साथ निभाए, उसका जीना अब दूभर है ! इस दुनिया में मक्कार हमेशा, अब रहता सबसे ऊपर है !! यारो सत्पथ पर चलने की, अब दिखती कोई डगर नहीं ! अब झूठ कपट की इन रातों की, दिखती कोई सहर नहीं !! पहले परमोधर्म हुआ करता था, ये सत्य अहिंसा का नारा ! अब तो ज़रा ज़रा सी बातों से ही, चढ़ जाता लोगों का पारा !! गाँधी जी के परम वाक्य को, लोगों ने बिलकुल भुला दिया ! अब ऐसे चरित्र निर्माण हो रहे, दुनिया को जिसने रुला दिया !! शांती स्वरूप मिश्र

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#Kavita by Bipin Giri

राम-रावण संवाद हूँ विद्वान महान मैं,है ऊँची मेरी जाति। फिर क्यों मैं छला गया,युद्ध भूमि में आज।। माफ करो हे

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#Kavita by Dr Sarla Singh

नवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं– माता तेरे चरण में ,अर्पित मेरी जान। तेरे ही आशीष से,हो सबका कल्यान ।। कर

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#Kavita by Garima Singh

जयतु जय कृपाणिनी । हे! सर्व शक्तिवाहिनी।। तमिस्रा विनाशिनी। हे! प्रकाशदायिनी ।। मूर्त शक्तिकालिका । उग्र रूपधारिणी।। सौम्यरूप रम्यमूर्ति। जयतु

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