#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

हर तरफ ही लोगों ने, जाल बिछा रखे हैं ! न जाने किस तरह के, स्वांग रचा रखे हैं ! भला कैसे पता करें हम असलियत उनकी, चेहरे पे गुलाब, दिल में खार सजा रखे हैं ! कैसे हैं लोग जिनका न मोहब्बत से नाता, उसकी जगह दिलों में, शैतान बसा रखे हैं ! कहने को हैं अपने मगर काम दुश्मन का, हमारे दुश्मन भी उन्होंने, यार बना रखे हैं ! न बची है “मिश्र” भरोसे के लायक दुनिया, अब सब ने उसूल अपने, ख़ास बना रखे हैं ! शांती स्वरूप मिश्र

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#Gazal by Ishq Sharma

मुझे आप कहने वाले बे-बाक हो गये तू कहते हैं वो शायद चालाक हो गये ••••••••••••••••••••••••••••••••••••• मुझसे ही दुनियादारी सीखा

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