#Gazal by Shanti swaroop Mishra

गर मंज़िल पास लानी है, तो ख्वाहिशें कम कर दो ! चाहत है अगर खुशियों की, तो रंजिशें कम कर दो[a1]  !   अब दिखता है हर तरफ फिरकापरस्ती का आलम,   अगर जीना है तुम्हें चैन से, तो साजिशें कम कर दो !   ये सब दौलतें ये सौहरतें तो रहमत है बस खुदा की, गर चाहो मोहब्बत सब की, तो नुमाइशें कम कर दो !    हर किसी को हक़ है कि जीए ज़िन्दगी अपनी तरह, बचाये रखनी है अगर इज़्ज़त, तो बंदिशें कम कर दो !    सुकूँ हरगिज़ नहीं मिलता किसी को सताने से “मिश्र“, पानी है दोस्ती की दौलत, तो आजमाइशें कम कर दो !   शांती स्वरूप मिश्र

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#Kavita by Babita Chaubey

हैप्पी दीवाली एक दीप जला लाई प्रिय तुम्हारे लिए प्रिय तुम्हारे लिये प्रिय तुम्हारे लिए होठों पे हंसी लाई प्रिय

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#Kavita by Sunil Gupta

“इन्सान” “भूल मानवता को जगत में. यहाँ दौड़ रहा-इन्सान। स्वार्थ में डूबा साथी जो, तन-मन बस रहा शैतान।। पत्थर पूजे

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