#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

ज़िन्दगी तो ज़िन्दगी है, इसको खेल मत समझो इस सपनों से भरी दुनिया को, जेल मत समझो अगर पानी हैं खुशियां तो पकड़ लो मोहब्बत को, सभी तो हैं अपने ही, किसी को बेमेल मत समझो कितना सुकूँ मिलता है जब रहते हैं लोग मिलके, यारो जीने की इस तरीक़े को, झमेल मत समझो ज़िंदगी के सफर में “मिश्र” कभी मिलते हैं कांटे भी, पर खुशियों की इस डगर को, विषबेल मत समझो शांती स्वरूप मिश्र

Read more