#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

जब आता है बुरा दौर, तो सभी आजमाते हैं ! गैरों की बात छोड़ो, अपने भी मुंह चुराते हैं ! वक़्त के आगे, किसी की कहाँ चलती है यारो, कल शान थी जिनकी, आज दुखड़ा सुनाते हैं ! कितनी बेरहम हो चली है, ये दुनिया आज की, जो मर रहा है उसको ही, लोग लातें लगाते हैं ! कोई साथ भी देगा, सोचना भी बेमानी है अब, जिन्हें समझते हैं अपना, वही दर्द छोड़ जाते हैं ! जो न दिखता कभी, उसे तो खुदा कहते हैं लोग, पर जो सामने है उसको, लोग दुश्मन बताते हैं ! कैसा है दौर, कि खून ही खून का प्यासा है “मिश्र”, अब सिर्फ अपने लिए ही लोग, सपने सजाते हैं शांती स्वरूप मिश्र

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#Kavita by Santosh Nema Santosh

सारे कारज छोड़कर,करें प्रथम मतदान। लोकतंत्र में लोक की,वैधानिक पहचान।।   देकर आहुति वोट की,बनती है सरकार प्रजातंत्र में आपका,यह

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