#Gazal By Shanti Swaroop Mishra

वो फिर से चले आये हैं, हमको बरगलाने के लिए ! हमें अपने बनाये जालों में, फिर से फंसाने के लिए !   कैसे बताएं उनको, कि क्या रखा है इन तमाशों में, अब छोड़ा ही क्या है हम पर, सुनने सुनाने के लिए ! न करेंगे असर कुछ भी, अब ये वादों के तीर हम पे,  रख लो इन्हें संभल के, कहीं और पे चलाने के लिए !  भर चुका है अपना ये दामन, ज़फाओं के ख़ारों से,   न बची है जगह कोई अब, दिलों में बसाने के लिए !   घमंड था बुज़ुर्गों को, कि अब अच्छे दिन भी आएंगे, पर कुछ भी न छोड़ा उन पे, ज़िंदगी चलाने के लिए !   इस मतलबी सियासत ने, फंसा रखा सबको“मिश्र“, बस चाहिए उन्हें कुर्सी, फ़क़त धंधा जमाने के लिए ! शांती स्वरूप मिश्र  

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#Kavita By Ramesh Raj

|| तोंद || ………………………….. किसी-किसी की छोटी तोंद, और किसी की मोटी तोंद। किसी-किसी की तोंद निराली, खाओ जितना, उतनी

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#Gazal By Pradeep Mani Tiwari

बह्र/अर्कान- 1222-1222-1222-1222-मफाईलुन, मफाईलुन, मफाईलुन, मफाईलुन. ★★★★★★★★★★★★ कलाई मुड़ गई ज़ज़्बात की ये तो निशानी है। अमूमन ज़िन्दगी में इस तरह

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#Kavita By Sunil Gupta

“मेरा देश-मेरा मान” “एक देश एक संविधान, माने सारा जहान- मेरा देश-मेरा मान। अनेकता में एकता बसी, यही है-साथी- मेरे

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