#Gazal By Shanti Swaroop Mishra

उनकी फ़ितरतों के आगे तो, हम मजबूर हो गए ! उनके जितने क़रीब आये, उतने ही दूर हो गए ! अपना दीया बुझा के, चले थे जलाने उनका हम, मगर लोगों ने समझा ये, कि हम मग़रूर हो गए ! क्या दिखाएं खोल कर, अपने दिल को हम यारो, पहले तो उधर ज़ख्म थे, मगर अब नासूर हो गए ! पहले न समझा किसी ने, हमें माटी के मोल भी,    यारो वक़्त क्या बदला कि, हम तो मशहूर हो गए ! मैं किसको भूल जाऊं, तो किसको याद रखूँ “मिश्र“, इस दुनिया के नाते रिश्ते तो, अब दस्तूर हो गए !    शांती स्वरूप मिश्र [a1]   

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