#Gazal By Shanti Swaroop Mishra

कांटे चुभा कर हमसे, वो गुलाब मांगता है ! दाने नहीं हैं घर में मगर, वो शराब मांगता है ! लुटा दिया चैनो सुकून जिसके वास्ते हमने, हमारी नेकी का हमसे, वो हिसाब मांगता है ! मक्कारियों के नशे में वो चूर है इस कदर , कि हर मात का खुदा से, वो जवाब मांगता है ! मनाता है दुःख वो पड़ोसियों की खुशियों पे, हर किसी का ही खाना, वो ख़राब मांगता है ! न पढ़ सका वो मोहब्बत का ककहरा कभी, हर समय नफरतों की, वो किताब मांगता है ! इंसानियत के दुश्मन को सभी जानते हैं “मिश्र”, पर फिर भी अमन का, वो ख़िताब मांगता है ! शांती स्वरूप मिश्र

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#Kavita By Rajendra Bahuguna

प्रजातन्त्र की महिमा गाओ प्रजातन्त्र की बन्जर धरती जुमलों की बरसात सहेगी अब ये राजनीति निर्बीज बीज से हरियाली की

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#Kavita By Reetu Devi

मुस्कान *** तेरे देख-देख सनम प्यारी मंद मुस्कान, घायल हो गयी है आपकी जान। संग-संग सहेलियाँ भी हैं बौरायी हुई,

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#Kavita By Sunil Gupta

“संकल्प” “संकल्प हो जीवन का, लक्ष्य की ओर- निरन्तर बढ़ना। कितने भी काँटे हो जीवन में, लक्ष्य से कभी- साथी

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