#Kavita By Kirti

हम स्तुति तेरी करते हैं अब मातु पधारो आंगन में, भक्ति -भाव सौहार्द ख़ुशी का, विस्तार करो माँ कण कण

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#Gazal By Shanti Swaroop Mishra

हूँ तो कमजोर मगर, दिल ए फौलाद रखता हूँ ग़मों की तल्खियों में भी, ख़ुशी आबाद रखता हूँ न डरता हूँ किसी से भी, नहीं है खौफ मरने का न रखता मैं छुपा के कुछ, खुले ज़ज़्बात रखता हूँ न देखूं ख्वाब ऐसे भी, जिन्हें पूरा न मैं कर पाऊं सदा ही हर कदम पर मैं, खुदा को याद रखता हूँ गिरा के हमसफ़र को राह में, चलना नहीं सीखा हमेशा हर किसी के वास्ते, दिली इमदाद रखता हूँ न करता कभी भी मैं, विवशताओं का सौदा “मिश्र” मिटा सकूं रुसबाइयाँ उनकी, यही जिहाद रखता हूँ

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