khani by pankaj trivedi

–                   –                          -कहानी  – एक्सीडेंट

प्रचंड धमाके के साथ दीवार तोड़कर ट्रक नीकल गयी | हाँ, वह सिर्फ दीवार ही न थीं |

सड़क की उस ओर से काल के मुख समान ट्रक तेज़ी से लोहे की ग्रील तोड़कर, रोंग साइड से, एक

आदमी को ठोकर मारती हुई उस दीवार को तोड़कर नीकल गयी थी | जहाँ शहर का सुख्यात रेस्तरां था |

वहां बैठे लोगों को चिल्लाने का समय भी नहीं मिला था | कुछ लोगों को कुछ भी छुआ न था और दूर खड़े

खड़े शोर मचाने लगे थे | कुछ लोग घबराहट के कारण आपस में ही टकराकर घायल हो गए | एक

जबरज़स्त एक्सीडेंट का ही मानों टुकड़ा-टुकड़ा हो गया था और वो लोगों के बीच में बिखर गया ! सभी का

ध्यान एक ही जगह पर केन्द्रित हो गया था | उस वक्त सड़क पर एक युवक अपने मित्र के पास बैठकर उनको

पूछ रहा था | जिसको ट्रक ने सबसे पहली टक्कर लगाई थी उनका नाम था – डेविड डिक्सन | दूसरा उसका

मित्र था – राल्सन | जो डेविड के स्वास्थ्य के बारे में जानना चाहता था |

राल्सन ने डेविड की जाँच की | उनके हाथ-पैर छील गए थे और उछलकर गिरने के कारण उनकी

कमर में भी काफ़ी चोट आई थी | हाथ-पैर में हल्का सा खून निकल रहा था | फिर भी सब ठीक लगा |

राल्सनने ट्रक ड्राइवर पर गुस्सा निकला | सिर्फ भड़ास ! डेविड हंसने लगा | थूका | कपडे झाड़े और चलने

लगा | राल्सन भी उसके पीछे चला | उसने डेविड का हाथ पकड़ लिया और कहने लगा; “डेविड ! तुम कहाँ

जा रहे हो? हमें तो घर जाना है | इस दिशा में क्या काम है? देखो तो… तुम्हें आराम की जरुरत है.. “

डेविड ने अपना हाथ छुड़वाकर राल्सन को पूछा; “तुम कौन हो…?”

“अरे ! मज़ाक छोड़ यार…” इतना कहते ही राल्सन की नज़र डेविड के शर्ट के कॉलर पर स्थिर हो

गयी| कान के पीछे से बालों में से खून की एक बूँद टपक रही थी… कॉलर धीरेधीरे खून से रंगने लगा था |

राल्सन ने डेविड के सर के पीछे की ओर धीरे से हाथ रखा | डेविड को भी लगा कि शायद चोट आई है |

“तुम्हें तो बहुत ज्यादा चोट आई है, डेविड… !” कहते ही राल्सन फिर से बोला; “चलो जल्दी

अस्पताल चलते हैं |”

उसने डेविड डिक्सन का हाथ पकड़कर उसे खिंचा | डेविड उनके पीछे सरलता से चलने लगा | वो

कुछ समझ नहीं पाया |

दोनों एक प्राइवेट डिस्पेंसरी में पहुँच गए | डेविड की जाँच करने के बाद डॉ. जॉन बोले; “सर के

पीछे कुछ ज्यादा चोट आई है मिस्टर….”

“राल्सन !”

“यस, मिस्टर राल्सन, चिंता की कोइ बात नहीं | खून नीकल आया यह अच्छी बात है | आप इसे

यहाँ कैसे ले आएं?” डॉ. जॉन ने पूछा |

“हम तो पैदल ही आए हैं | एक्सीडेंट भी नज़दीक में हुआ था |”

“यहाँ तक आते समय रास्ते में चक्कर सा महसूस हुआ था?” डॉ. जॉन ने घाव के बारे में जानने के

लिए पूछा |

“नहीं, ऐसा कुछ नहीं हुआ |” राल्सनने जवाब दिया | उन्हें आश्चर्य इस बात का था कि डॉक्टर ने

ऐसा क्यों पूछा?

डॉक्टर उनकी आँखों में उभरे भावों को परख गए | बोले; “एक घंटे में पता चल जाएगा | अगर

हेमारेज़ हुआ होगा तो भी….”

राल्सन चुचाप खड़ा रहा | डेविड के सर पर डॉ. जॉन ने पट्टी बाँध दी |

रालसन ने डेविड का हाथ पकड़कर बाहर निकलने का प्रयास किया | उसी वक्त डेविड ने झटके से

उनका हाथ छुड़वा दिया | उसने डॉक्टर को संबोधन करते हुए कहा; “मेरे बेटे, पहचानता है मुझे…!”

डॉ. जॉन को तौहीन लगी | सामान्य स्थिति के इस आदमी का मुफ्त में इलाज किया और फिर भी

‘बेटा’ कहकर संबोधन करता है? डॉ. जॉन को गुस्सा आया | उन्हों ने राल्सन को धमकाते हुए कहा; “इस

आदमी को जल्दी से ले जा वर्ना मैं यहीं पर पिटूँगा… भागो जल्दी से …!”

राल्सन ने डर के मारे डेविड का हाथ खींचा… “चल डेविड, चल…!”

डेविड अपनी जगह से हीला तक नहीं, वह बिलकुल स्वस्थ था | उसे देखकर डॉ. जॉन का गुस्सा

भड़क गया | आगे बढ़कर डेविड पर हाथ उठाया | डेविड ने तुरंत ही अपना हाथ आड़े रखते हुए कहा; “जॉन,

मैं तुम्हारा पिता हूँ | मैक… मैक वोट्सन !”

एक ही पल में डॉ. जॉन रुक गया | उन्हें बड़ा आश्चर्य हो रहा था | उन्हें लगा कि यह नाम तो जाना-

पहचाना है | शायद उनकी माँ ने ही कुछ कहा था | वो याद आ गया; “बेटा ! तुम्हारे पिता का नाम मैक

वोट्सन था | एक ट्रक एक्सीडेंट में उनकी मौत हुई थी | हम एक दूसरे को बहुत चाहते थे | शादी करने के

लिए चर्च में गए और वहाँ फ़ादर से मिले | उस वक्त फ़ादर ने कहा कि एक वर्ष के बाद शादी के लिए उत्तम

समय है | हम उस पल की प्रतीक्षा में थे | तुम्हारा जन्म होने वाला था उससे पूर्व हमने शादी कर ली | एक

दिन मैक काम पर जा रहा था | वो इमारतों के रंगने का काम करता था | काम पूरा करने के बाद वो अपने

मित्र के साथ लौट रहा था | उसी वक्त ट्रक एक्सीडेंट हुआ…. और वो उछलकर गिर पड़ा |”

डॉ. जॉन के मानस में यह घटना ताज़ा हो गयी | उसने भूलने के लिए सर हिलाया | फिर राल्सन

को पूछा; “तुम्हारे इस मित्र को हुआ क्या था? विस्तार से कहो…”

“हम दोनों सड़क पर चले आते थे | अचानक एक ट्रक धसकर आई | डेविड को ठोकर मारकर,

दिवार को तोड़ती हुई रेस्तरां में घूस गयी…”

राल्सन की बात काटते हुए डॉ. जॉन बोले; “ट्रक एक्सीडेंट !? यह कैसी विचित्र समानता?”

डेविड बोला; “जॉन ! याद आया कुछ? मेरा नाम मैक है और तुम्हारी माँ का नाम राईसा…!”

डॉक्टर कुछ भी बोले उससे पहले उनकी माँ राईसा अन्दर के कमरे में से धीरे धीरे दिवार के सहारे

बाहर चली आई | उसने डेविड के सामने देखा | फिर बेटे जॉन को पूछा; “बेटा, तुम्हारे साथ कौन बात कर

रहा है?”

उसी वक्त डेविड ने उनके करीब जाते हुए बहुत धीमे स्वर में… अक्षरों को अलग करते हुए मधुरता

से कहा; “रा…ई…सा…!”

आवाज़ सुनते ही राईसा की वृद्धावस्था के बोज से ढली हुई कमज़ोर आँखों में चमक आ गई | उसने

डेविड के सामने गौर से देखा | फिर उसने भी अक्षरों को अलग करते हुए कहा; “म…म….मैक !”

राल्सन और जॉन दोनों बड़े आश्चर्य से इस दृश्य को देख रहे थे | डेविड ने राईसा का हाथ पकड़कर

कहा; “राईसा, यह हमारा ही बेटा है न..?”

राईसा का चेहरा खिल उठा | “मैक, सच में तुम ही… यह सब कैसे संभव है?”

फिर राईसा ने डेविड का चेहरा गौर से देखा | उसके कंधे पर हाथ रखा, सर पर हाथ फिराया और

आगे झुकी सी बालों की लट को ऊपर उठाकर पूरा चेहरा देखा | हाँ, कपाल पर जन्म का लाल निशान था |

वह फिर से बोली; “मैक, तुम कहाँ थे…?”

डेविड में से मैक बना हुआ वो आदमी हकीक़त में भी डॉ. जॉन का बाप था? राल्सन मन ही मन

सोचने लगा |

राईसा ने जॉन को कहा; “बेटा, यही तुम्हारा पिता है | मैक…मैक वोट्सन !”

डॉ. जॉन कुछ मानने को तैयार न था | उसने गुस्सा होकर राईसा को कहा; “माँ, तुम क्या बोल रही

हो, पता है तुम्हें कुछ? ऐसा सड़कछाप आदमी मेरा बाप कैसे हो सकता है? यह सब नौटंकी है | तुम इसे

साथ देकर क्या चाहती हो? यह आदमी बेकार सा है | इमारतों को रंगने का काम करता है… हो सकता है

उनकी नज़र हमारी दौलत पर हों…”

डेविड से रहा न गया | वह तिलमिला उठा | उसने राईसा से कहा; “राईसा, तुमने कभी मेरे बारे में

कुछ कहा ही नहीं ? मेरी तसवीर भी नहीं दिखाई? जहाँ हमदोनों बैठते वो बीच, बार और चर्च के सामने

रही वो पगडंडी ! वो सारे फोटोग्राफ्स दिखाओ अपने बेटे को… समझाओ उसे तुम … राईसा ! समझाओ

इसे…!”

राईसा काँपते हुए पैरों से दिवार के सहारे अन्दर के कमरे में गयी | अब उनके पैरों में थोड़ी सी

फुर्ती महसूस हो रही थी, वो तुरंत ही लौटी | उसने सारे फोटोग्राफ्स टेबल पर रख दिए | डॉ. जॉन और

राल्सन तो हैरत में पड़ गए | दोनों के आश्चर्य की कोइ सीमा न रही | फोटोग्राफ्स में जो युवाक दिखता था,

बिलकुल वोही युवक अभी उनके सामने खड़ा था और उसका नाम डेविड उर्फ़ मैक वोट्सन था | जो

अपनेआप को डॉ. जॉन के पिता के रूप में प्रस्थापित कर रहा था | सामने खडी राईसा भी उन्हें पति के रूप

में स्वीकार करते हुए उसे डॉ. जॉन के पिता की पहचान दे रही थी | मगर यह सब कैसे संभव हो सकता है?

फोटो में राईसा बहुत ही सुन्दर युवती नज़र आती थी | उनके चेहरे पर चमक और आँखों का नूर मन हर

लेता था | आज वो वृद्धावस्था में होकर भी उनकी आँखों का नूर वोही नज़र आता है | उस फोटोग्राफ्स के

पीछे तारीख़, वर्ष और फोटोग्राफर का नाम भी लिखा हुआ था | डॉ. जॉन बचपन से उस फोटोग्राफर और

उनके बेटे को पहचानते थे | तो क्या डेविड नामक यह युवक सचमुच मैक वोट्सन ही है? वो राईसा का पति

और डॉ. जॉन का बाप है? जो वर्षों पहले एक ट्रक एक्सीडेंट में मर चूका था |

रालसन ने डेविड उर्फ़ मैक को कहा; “अब तुम क्या करना चाहते हो?

डेविड ने उसे पूछा; “तुम कौन हो?

डॉ. जॉन ने जवाब दिया; “वो आपका साथी है, जो आपको इमारतों को रंगने में मदद करता है |”

डेविड चुप रहा | वो सोचने लगा कुछ | उसी वक्त राईसा ने कहा; “मैक अब यहीं रहेगा | वो

इमारतों को रंगने का काम नहीं करेगा बल्कि आर्ट पेंटिंग्स करेगा |”

राईसा ने डेविड का हाथ पकड़ लिया और अपने कमरे में ले गयी, जहाँ एक पेंटिंग था | राल्सन को

लेकर डॉ. जॉन भी उसी कमरे में आया | दीवार पर टंगे उस सुन्दर पेंटिंग में एक चर्च था | सामने पगडंडी

थी | जहाँ मैक और राईसा बैठते थे | उस पेंटिंग को देखकर ही डेविड के हाथ में चेतना जाग गयी | उसने

राईसा से पूछा; “तुमने मेरे रंग और ब्रश को संभलकर रखा है?”

और राईसा की खुशी छलक उठी | वह बोली; “मुझे पता है, तुम इस पेंटिंग में क्या करना चाहता

है…”

राईसा ने डॉ. जॉन के कान में कुछ कहा | उसने कलर और ब्रश डेविड उर्फ़ मैक के हाथ में थमा दिए

| मैक का हाथ धीरेधीरे केनवास पर फिरने लगा, ब्रश में से रिसता हुआ रंग एक ऐसे आकार में परिवर्तित

होने लगा जिसकी कल्पना वर्षों पहले राईसा और मैक वोट्सन ने की थी…! हाँ, उसने एक बच्चे को राईसा

की गोद में सोया हुआ बनाया | जिसका चेहरा डॉ. जॉन के बचपन से काफ़ी मेल खाता था, हूबहू ! राईसा

खुश हो गयी | डॉ. जॉन आश्चर्य में खो गया | मित्र रालसन भी मानों किसी स्वप्न भूमि पर आ गया हो | डॉ.

जॉन के जन्म से पहले उनके पिता का निधन हो चूका था | तो फिर यह सब कैसे? मैक और राईसा हमेशा

चर्च के सामने पगडंडी पर बैठते, प्राथना करते और अपने होने वाले बच्चे की कल्पना करते और ऐसे ही ….

उनके काल्पनिक बच्चे का आकर तैयार होने लगा था | बच्चे का जन्म होने से पहले राईसा वो ही कल्पना में

डूबी सी रहती, क्योंकि उस वक्त उनका पति मैक वोट्सन मर चूका था |

राल्सन से अब रहा न गया | वह डेविड के पास आया | “मिस्टर मैक वोट्सन, गुडलक ! आप आज

भी मेरे मित्र हैं और उसका नाम है डेविड…!”

उस वक्त राईसा बोली; “राल्सन, मेरा पति अगर युवा है तो उसका दोस्त भी युवा ही होगा न..!”

राल्सन दरवाज़े से वापस मुड़ा | उसने डेविड उर्फ़ मैक वोट्सन को गले लगाया | फिर तो डेविड,

राईसा, पुत्र डॉ. जॉन और राल्सन ने मिलकर एक दुसरे के हाथ पकड़कर घूमते हुए खुशी का गीत गाना शुरू

किया | ठीक उसी वक्त बाहर सड़क पर किसी की दर्दभरी चीख़ सुनाई दी |

सभी जल्दी से बाहर की ओर दौड़ पड़े | एक ट्रक तेज़ गति से भागती हुई नज़र आई और…. आगे

जाकर एक दीवार से टकराई | मगर यहाँ घर के पास ही सुनाई दी उस चीख़ का क्या…? वहाँ पर कोइ न

था | गहन अंधकार में दूर…दूर… खडी उस ट्रक में से उठता धुँआ उस गहनता को ज़्यादा ही गहन बना रहा

था |

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गोकुलपार्क सोसायटी, 80 फूट रोड, सुरेन्द्रनगर – 363002 (गुजरात)

पंकज त्रिवेदी

संपादक- विश्वगाथा

vishwagatha@gmail.com

Mobile : 096625 14007

One thought on “khani by pankaj trivedi

  • November 15, 2015 at 12:58 pm
    Permalink

    संपादक महोदय,
    नमस्कार | मेरी कहानी प्रकाशित करने के लिए दिल से आभारी हूँ |
    – पंकज त्रिवेदी

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