#Anupama Shri ‘ Anushri ‘

छाये बसंत बहार ,
चले फागुनी बयार,
 हर दिल में मस्ती  छाये
 रंगों की हो फुहार
 ………….तो होली है
 भूलें  सारे शिकवे गिले
 सब मिलकर गले
 टेसू संग अबीर – गुलाल
 पकवानों की हो बहार
 …………..तो होली है
 बच्चों के चेहरे खिले
 हाथों में पिचकारियां सजे
 ढोल- ताशे बजें
 इंद्रधनुषी हो संसार
………..तो होली  है
 झूमते- नाचते नर नार
 नाजो- नखरे मनुहार
  प्रेम की रसधार, मीठी छेड़छाड़
 मस्तों की टोली है
……………..तो  होली है
अनुपमा   श्रीवास्तव ‘अनुश्री’
साहित्यकार, कवयित्री, मंच संचालिका
मोब- 9893537438
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