Muktak by Kavi D M Gupta

-एक मुक्तक——–   हे वीणावादिनी  माँ मुझको  ज्ञान  बुद्धि  से  भर  देना। नित गाऊं  भारत  का  गौरव  ऐसा  मुझको  स्वर 

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#Kavita by Prashant Dixit

  हे हंसवाहिनी माँ, हे ज्ञानदायिनी माँ। हे वीणावादिनी माँ, हे रूपसौभग्यदायिनी माँ,   हे वागेश्वरी, भारती, सरस्वती माँ। वीणापाणि,

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