#Bal Gewet by Ramesh Raj

बालगीत || बादल ||

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करते हैं आयोजित कोई

जिस दिन भी कवि सम्मेलन बादल।

तो धरती पर ले आते हैं

रिमझिम-रिमझिम सावन बादल।

 

राम-कथा सुनने वर्षा की

निकलें बच्चे घर से बाहर

जोर-जोर से करें गर्जना

बने हुए तब रावन बादल।

 

आसमान की छटा निराली

देख-देख मन हरषाता है

साँझ हुए फिर लगें दिखाने

इन्द्रधनुष के कंगन बादल।

 

एक कहानी वही पुरानी

नरसी-भात भरे ज्यों कान्हा

उसी तरह से खूब लुटाते

फिरते बूँदों का धन बादल।

 

बड़ी निराली तोपें इनकी

पड़ी किसी को कब दिखलायी

जब ओलों के गोले फैंकें

फैंके खूब दनादन बादल।

+रमेशराज

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