Bhajan by Rajinder Sharma Raina

जय जय माँ वैष्णो हाथों में खिंची हुई लकीर का है,

मसला तो सारा तकदीर का है,

राजा का जोर तो चले सब पर,

पर रुतबा तो ऊँचा फ़क़ीर का है।

गर नजरे कर्म करे मेरी माता,

पन्ना बदल जाये तहरीर का है।

पी ले नाम का जाम चढ़ा मस्ती,

वहां मतलब न कुछ जंगीर का है।

है मिट्टी का पुतला मिट्टी होना,

तोहे अहम काये फिर शरीर का है।

उसने ही पहना इन्सानी चोला,

जिसको अहसास पर पीर का है।

हर रोग का इलाज आसां सम्भव,

रैना”तय वक़्त तो तदबीर का है।रैना”

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