#Baalgeet by ramesh raj

।। हम सावन के रिमझिम बादल ।। —————————————— बहुत दिनों तक सूरज दादा की तुमने मनमानी गर्म-गर्म अंगारे फैंके और सुखाया पानी। प्यासे-प्यासे जीवजन्तु सब नदिया नाले सूखे लेकिन तुम ऐसा करने में कभी न बिल्कुल चूके। किन्तु समझ लो और इसतरह कुछ भी नहीं चलेगा हरा-भरा खेत बिन पानी कोई नहीं जलेगा। हम सावन के रिमझिम बादल अब बरसायें पानी हम धरती पर फूल खिलायें खुश हो कोयल रानी। -रमेशराज

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।। अब पढ़ना है ।। ——————————- सैर-सपाटे करते-करते जी अब ऊब  चला अब पढ़ना है आओ पापा लौट चलें बंगला। पिकनिक खूब मनायी हमने जी अपना हर्षाया देखे चीते भालू घोड़े चिड़ियाघर मन भाया तोते का मीठा स्वर लगता कितना भला-भला। अब पढ़ना है आओ पापा लौट चलें बँगला ।| पूड़ी और पराठे घी के बड़े चाव से खाये यहाँ झील, झरने पोखर अति अपने मन को भाये खूब बजाया चिड़ियाघर में बन्दर ने तसला।…

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#Baalgeet by ramesh raj

।। सही धर्म का मतलब जानो ।। ———————————– धर्म एक कविता होता है फूलों-भरी कथा होता है बच्चो तुमको इसे बचाना केवल सच्चा धर्म निभाना। यदि कविता की हत्या होगी किसी ऋचा की हत्या होगी बच्चो ऐसा काम न करना कविता में मधु जीवन भरना। सही धर्म का मतलब जानो जनसेवा को सबकुछ मानो यदि मानव-उपकार करोगे जग में नूतन रंग भरोगे। यदि तुमने यह मर्म न जाना गीता के उपदेश जलेंगे कुरआनों की हर…

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#Baal geet by ramesh raj

|| हम बच्चे हममें पावनता || —————————————- मुस्काते रहते हम हरदम कुछ गाते रहते हम हरदम भावों में अपने कोमलता खिले कमल-सा मन अपना है । मीठी-मीठी बातें प्यारी मन मोहें मुस्कानें प्यारी हम बच्चे हममें पावनता गंगाजल-सा मन अपना है । जो फुर-फुर उड़ता रहता है बल खाता, मुड़ता रहता है’ जिसमें है खग-सी चंचलता उस बादल-सा मन अपना है । सब का चित्त मोह लेते हैं स्पर्शों का सुख देते हैं भरी हुई…

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#Baal geet by ramesh raj

|| अब कर तू विज्ञान की बातें || —————————————— परी लोक की कथा सुना मत ओरी दादी, ओरी नानी, झूठे सभी भूत के किस्से झूठी है हर प्रेत-कहानी।| इस धरती की चर्चा कर तू बतला नये ज्ञान की बातें कैसे ये दिन निकला करता कैसे फिर आ जातीं रातें? क्यों होता यह वर्षा-ऋतु में सूखा कहीं-कही पै पानी।| कैसे काम करे कम्प्यूटर कैसे चित्र दिखे टीवी पर कैसे रीडिंग देता मीटर अब कर तू विज्ञान…

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#Baal geet by ramesh raj

|| हम बच्चे || ——————————— हम बच्चे हर दम मुस्काते नफरत के हम गीत न गाते। मक्कारी से बहुत दूर हैं हम बच्चों के रिश्ते-नाते। दिन-भर सिर्फ प्यार की नावें मन की सरिता में तैराते। दिखता जहाँ कहीं अँधियारा दीप सरीखे हम जल जाते। बड़े प्रदूषण लाते होंगे हम बच्चे वादी महँकाते। +रमेशराज

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#Baal geet by ramesh raj

|| हम बच्चों की बात सुनो || ————————————– करे न कोई घात सुनो हम बच्चों की बात सुनो। बन जायेंगे हम दीपक जब आयेगी रात सुनो। हम हिन्दू ना मुस्लिम हैं हम हैं मानवजात सुनो। नफरत या दुर्भावों की हमें न दो सौगात सुनो। सचहित विष को पी लेंगे हम बच्चे सुकरात सुनो। +रमेशराज

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#Baal geet by ramesh raj

|| कहें आपसे हम बच्चे || ———————————– भेदभाव की बात न हो घायल कोई गात न हो। पड़े न नफरत दिखलायी रहें प्यार से सब भाई। करें न आँखें नम बच्चे कहें आपसे हम बच्चे। हम छोटे हैं- आप बड़े यदि यूँ ही अलगाव गढ़े नहीं बचेगी मानवता मुरझायेगी प्रेम-लता झेलेंगे हम ग़म बच्चे कहें आपसे हम बच्चे। +रमेशराज

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#Baal geet by ramesh raj

|| अब का काम न कल पै छोड़ो || ——————————————- मीठा होता मेहनत का फल भाग खुलेगा मेहनत के बल। छोड़ो निंदिया, आलस त्यागो करो पढ़ायी मोहन जागो। आलस है ऐसी बीमारी जिसके कारण दुनिया हारी। मेहनत से ही सफल बनोगे जग में ऊँचा नाम करोगे। मेहनत भागीरथ ने की थी पर्वत से गंगाजी दी थी। मेहनत से तुम नाता जोड़ो अब का काम न कल पै छोड़ो। +रमेशराज

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#Baal kavita by ramesh raj

|| अब मम्मी सौगन्ध तुम्हारी || ———————————– हम हाथों में पत्थर लेकर और न बन्दर के मारेंगे, समझ गये हम तभी जीत है लूले-लँगड़ों से हारेंगे। चाहे कुत्ता भैंस गाय हो सब हैं जीने के अधिकारी, दया-भाव ही अपनायेंगे अब मम्मी सौंगंध तुम्हारी। छोड़ दिया मीनों के काँटा डाल-डाल कर उन्हें पकड़ना, और बड़े-बूढ़ों के सम्मुख त्याग दिया उपहास-अकड़ना, जान गये तितली होती है रंग-विरंगी प्यारी-प्यारी इसे पकड़ना महापाप है अब मम्मी सौंगध तुम्हारी। खेलेंगे-कूदेंगे…

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#Baal geet by ramesh raj

|| हमको कहते तितली रानी || ————————————– नाजुक-नाजुक पंख हमारे रंग-विरंगे प्यारे-प्यारे। इन्द्रधनु ष-सी छटा निराली हम डोलें फूलों की डाली। फूलों-सी मुस्कान हमारी हम से ऋतुएँ शोख- सुहानी हमको कहते तितली रानी। आओ बच्चो हम सँग खेलो छुपा-छुपी की रीति निराली। तुम आ जाना पीछे-पीछे हम घूमेंगे डाली-डाली। किन्तु पकड़ना हमको छोड़ो सिर्फ दूर से नाता जोड़ो। हम हैं केवल प्रेम-दिवानी हमको कहते तितली रानी।

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#Baalgeet by ramesh raj

+बालगीत || हम बच्चे नादान नहीं हैं || ………………………………… आफत में  मुस्काना सीखे अपने वचन निभाना सीखे। नफरत के हम गीत न गाते सबसे प्यार जताना सीखे। वैर-द्वेष की-भेदभाव की हर दीवार गिराना सीखे। हम सुखदेव, राजगुरु  जैसे फाँसी पर मुस्काना सीखे। हम भागीरथ है इस युग के भू पर गंगा लाना सीखे। हम बच्चे नादान नहीं हैं ज्ञान-प्रकाश बढ़ाना सीखे। +रमेशराज ………………………………………………………. -रमेशराज, 15/109, ईसानगर, अलीगढ़-202001 मो.-9634551630

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#Baal geet by ramesh raj

|| हम बच्च हैं भोले-भाले || ……………………………….. हर हर महादेव बोलेंगे पोल खलों की हम खोलेंगे। भगत सिंह हम बन जायेंगे क्रान्ति-पताका फहरायेंगे। अब भी हमें ‘तिलक’ के नारे लगते हैं प्राणों से प्यारे। बापू की जयकार करें हम प्रीति प्यार के रंग भरें हम। हम बच्च हैं भोले-भाले रक्षा को बन्दूक सम्हाले। +रमेशराज

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#Baal geet by ramesh raj

नन्हा खुश होकर इक गीत बनाया, उसने सबको मन हर्षाया, पहन के जूते, लगा के चश्मा वो दादा-दादी को लेने आया उलटी-सुलटी बातें बोले प्यार के वो हर राज़ खोले देख के गाड़ी, बजाये ताली खुशी है मन में इक मतवाली दादा-दादी उतरे गाड़ी से नन्हा देख उन्हें है भाया लेकर गोद में खूब दुलारा उनका नन्हा सबसे प्यारा नन्हें ने है गीत सुनाया सबकी आँखों को छलकाया, मटका-मटका कर हाथ वो उसने जोर-जोर से…

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#Baal geet by ramesh raj

|| फूल झरें अपने उत्तर में || …………………………………… लिये पताका अपने कर में कूद पड़ें हम वीर समर में। माँ की रक्षा करते हरदम हो सीमा या अपने घर में। करते हैं विश्वास हमेशा कबिरा के ढाई अक्षर में। प्रश्न प्यार के पूछे कोई फूल झरें अपने उत्तर में। बगिया-बगिया, उपवन-उपवन बोलें हम कोयल के स्वर में। +रमेशराज

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|| आओ अपना देश बचायें|| …………………………………. आओ भारत-भारत खेलें दुश्मन से हम टक्कर लेलें। आओ अपना देश बचायें वीर सुभाष ,भगत बन जायें। आओ मीठा-मीठा बोलें कानों में मिसरी-सी घोलें। आओ नेक काम यह कर लें सारे जग की पीड़ा हर लें। सीमा पर प्रहरी बन जायें आओ अरि को मार भगायें। +रमेशराज

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|| नहीं तिरंगा झुकने देंगे || ………………………………………………….. वीर भगत, बिस्मिल से बनके खट्टे दाँत करें दुश्मन के। कभी नहीं हम होने देंगे टुकड़े इस खुशहाल वतन के। जिसको नेह प्रेम कहते हैं हम मालिक हैं ऐसे धन के। नहीं तिरंगा झुकने देंगे लाखों टुकड़े बनें बदन के। आज भले हम लगें कोयला गुण अपनायेंगे कंचन के। +रमेशराज

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बाल-गीत || भारत भू पर बलि-बलि जाओ || ……………………………………….. आओ बंटी बबलू आओ देश प्रेम के गीत सुनाओ। आओ रधिया ,रतिया आओ भारत भू पर बलि-बलि जाओ। आओ मोहन, अब्दुल आओ जाति कौम के भेद मिटाओ। आओ सूफी सन्तो आओ सच का मारग हमें सुझाओ आओ सारे भारतवासी वंदेमातरम् गान गुँजाओ। +रमेशराज

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बाल-गीत || हम अब्दुल हमीद बन जाते || ………………………………………. हर अरिब्यूह तोड़ देते हम अपनी छाप छोड़ देते हम। हम अब्दुल हमीद बन जाते पैटन टेंक तोड़ देते हम। बुरी आँख जो हम पर डाले आँखें तुरत फोड़ देते हम। अब भी हम में इतनी हिम्मत युग की धार मोड़ देते हम। -रमेशराज

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+बाल-गीत ।। राम और नानक को मानें।। ………………………………………… राम और नानक को मानें अपनी मर्यादा पहचानें। सज्जन को हम सदा दयालु दुश्मन पर बन्दूकें तानें। हम हैं फूल सुगंधों  वाले बाँटेंगे अपनी मुस्कानें। चलने कहीं नहीं देंगे हम खोटी चलन भरी दूकानें। अपने नभ छूते सपनों की देखेगा जग रोज उठानें। -रमेशराज

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+बाल-गीत ।। भारत की सौगंध हमें है।। …………………………………. काले दिवस न लाने देंगे नहीं गुलामी आने देंगे। भारत की सौगन्ध हमें है गीत न तम के गाने देंगे। अरि को अपनी भू पर झंडे कभी नहीं फहराने देंगे। चाहे प्राण चले जायें पर अपना मान न जाने देंगे। हिन्दू,मुस्लिम, ईसाई के भेद नहीं पनपाने देंगे। खाते हैं हम कसम शत्रु  को जाल न और बिछाने देंगे। -रमेशराज

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बाल-गीत ।। अपने शीश भले कट जायें।। ………………………………………. सतपथ पर हम बढ़ते जायें कीर्ति पताका को फहरायें। शोषित, पीड़ित व्यक्ति जहां हों वहाँ प्यार के फूल खिलायें। विश्व-शान्ति के बने पुजारी भारत की बगिया महँकायें। सत्य,अहिंसा और कर्म से जन-जन को जुड़ना सिखलायें। भारत माँ की शान न जाये, एक यही प्रण भूल न पायें। सबसे ऊँचा रहे तिरंगा अपने शीश भले कट जायें। -रमेशराज

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बाल-गीत ।। जान निछावर कर जाते हैं।। …………………………………….. पहने हम केसरिया बाना सीख रहे बन्दूक चलाना, हमने बचपन से सीखा है अपने अरि को सबक सिखाना। मुश्किल कितनी भी आ जायें कभी नहीं उनसे डरते हैं, दुश्मन सीमा पर आ जाये दांत तभी खट्टे करते हैं। हम भारत के वीर सिपाही पीठ कभी ना दिखलाते हैं, अगर जरूरत पड़े हमारी जान निछावर कर जाते हैं। -रमेशराज

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बाल-गीत ।। बढ़ते जाना धर्म  हमारा।। …………………………………. बस मुस्काना धर्म  हमारा प्यार लुटाना धर्म हमारा। हिन्दू मुसलमान सिख सबको गले लगाना धर्म हमारा। मेहनत की सच्ची राहों पर चलते जाना धर्म हमारा। जात-पाँत के, ऊँच-नीच के भेद मिटाना धर्म हमारा। भले मिलें राहें पथरीली बढ़ते जाना धर्म हमारा। -रमेशराज

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+बाल-गीत ।। हम बच्चे सरसों के दाने ।। ………………………………….. आज़ादी के हम दीवाने बढ़ते रण में सीना ताने। दुश्मन को हम पलक झपकते चित्त गिराते चारों खाने। कल वसंत लेकर आयेंगे हम बच्चे सरसों के दाने। सच्चे हैं कथनी-करनी से रुपये में हम सोलह आने। युद्धभूमि में लग जाते हम शिव-सा तांडव नृत्य दिखाने। अरि को हैं हम फरसे-भाले अपने हैं अन्दाज पुराने। -रमेशराज

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