bal geeta by ramesh raj

[बाल-कविता ] || हमको कहते तितली रानी || नाजुक-नाजुक पंख हमारे रंग-विरंगे प्यारे-प्यारे। इन्द्रधनु ष-सी छटा निराली हम डोलें फूलों की डाली। फूलों-सी मुस्कान हमारी हम से ऋतुएँ शोख- सुहानी हमको कहते तितली रानी। आओ बच्चो हम सँग खेलो छुपा-छुपी की रीति निराली। तुम आ जाना पीछे-पीछे हम घूमेंगे डाली-डाली। किन्तु पकड़ना हमको छोड़ो सिर्फ दूर से नाता जोड़ो। हम हैं केवल प्रेम-दिवानी हमको कहते तितली रानी।

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"bal geeta by ramesh raj"

bal geet by ramesh raj

[बाल-कविता ] || हमको कहते तितली रानी || नाजुक-नाजुक पंख हमारे रंग-विरंगे प्यारे-प्यारे। इन्द्रधनु ष-सी छटा निराली हम डोलें फूलों की डाली। फूलों-सी मुस्कान हमारी हम से ऋतुएँ शोख- सुहानी हमको कहते तितली रानी। आओ बच्चो हम सँग खेलो छुपा-छुपी की रीति निराली। तुम आ जाना पीछे-पीछे हम घूमेंगे डाली-डाली। किन्तु पकड़ना हमको छोड़ो सिर्फ दूर से नाता जोड़ो। हम हैं केवल प्रेम-दिवानी हमको कहते तितली रानी।

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bal sahitya by piya singh

सुनहरा पक्षी | संजय वन के राजा वीरू शेर के दरबार में गाने की प्रतियोगिता का आयोजन था राज्य के अच्छे-अच्छे नामी गायक वहां इक्ट्ठा हो रहे थे। काली कोयल, मीना मैना,चन्दू हाथी, चन्नी गिलहरी, बीनू बन्दर जैसे जंगल के जाने-माने गायक आए थे। सबके आश्चर्य का ठिकाना तो तब न रहा जब काजू कौआ भी वहॉं गाना गाने पहुंच गया। सब उसकी नादानी पर हॅंसने लगे। जंगल के सभी लोग यह जानते थे कि…

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bal kahani : tarkeeb by piya singh

बहुत पुरानी बात है। एक अमीर व्यापारी के यहाँ चोरी हो गयी। बहुत तलाश करने के बावजूद सामान न मिला और न ही चोर का पता चला। तब अमीर व्यापारी शहर के काजी के पास पहुँचा और चोरी के बारे में बताया।सबकुछ सुनने के बाद काजी ने व्यापारी के सारे नौकरों और मित्रों को बुलाया। जब सब सामने पहुँच गए तो काजी ने सब को एक-एक छड़ी दी। सभी छड़ियाँ बराबर थीं। न कोई छोटी…

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"bal kahani : tarkeeb by piya singh"