#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

दिल के शोलों की जलन, हमसे पूंछो! कैसी है कांटो की चुभन, हमसे पूंछो! हो चुका है ख़त्म दौर-ए-शराफत अब, दोरंगी दुनिया का चलन, हमसे पूंछो! न समझो माली को बगीचे का मालिक, अब कैसे उजड़ते हैं चमन, हमसे पूंछो ! आज़ाद ज़िंदगी जीना तो सपना है अब, कैसे होता है उसका दमन, हमसे पूंछो! न उठाये फिरिये ग़मों का पहाड़ “मिश्र”, इसमें होता है कितना वजन, हमसे पूंछो !

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# Gazal by Shanti Swaroop Mishra

यारो पत्थर दिलों से, कभी प्यार मत मांगो अपने जिगर के लिए, पैनी कटार मत मांगो जीना है गर प्यार से तो तन्हा जीलो मगर, किसी के साथ जीने का, इख्तियार मत मांगो न झेल पाओगे तुम इस मोहब्बत के झटके, तुम अपनी ज़िन्दगी का, खरीदार मत मांगो कभी खिज़ाओं में बहार नहीं आती है “मिश्र” गुलशन के काँटों से, फूलों सा प्यार मत मांगो

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#Gazal by Ishq Sharma

वेलेंटाइन डे स्पेशल “”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””” मैं तारीख़ ऐ मुहब्बत टलने नही दूँगा। दूसरी पटाऊंगा कमी खलने नही दूँगा। “”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””” दर्द मैं

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