#Gazal by Aasee Yusufpuri

ग़ज़ल   है दर्दे दिल,    कम ज़रूर होगा दीया ये ,     मद्धम ज़रूर होगा   उदास मैं ही    नहीं हूँ     तन्हा उसे भी कुछ, ग़म ज़रूर होगा   जो आज मौसम ये दिलनशीं है वो मुझ से  बरहम  ज़रूर होगा   ग़रूर उसको है क़द पे “आसी” वो देखना   ख़म    ज़रूर होगा _______ सरफ़राज़ अहमद आसी

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"#Gazal by Aasee Yusufpuri"

#Shayari by Suraj Sharma

इश्क़ में खुमार बहुत है , इश्क़ में बहार बहुत है।S। हो जाये हो इश्क़ तो ये इश्क़ बीमार बहुत है। इश्क़ में मिलन भी बहुत है , इश्क़ में इन्तजार भी बहुत है।L। हो जाये जो इश्क़ तो इश्क़ बीमार बहुत है। है बेचैन इश्क़ मगर इसमें करार भी बहुत है, इश्क़ वीरान इश्क़ गुलज़ार भी बहुत है, हो जाये जो इश्क़ तो इश्क़ बीमार बहुत है।S। इश्क़ महरम इश्क़ तलबगार भी बहुत है,…

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"#Shayari by Suraj Sharma"

#Gazal by Dr. Yasmeen Khan

हाँ, शिकायत का कभी मौक़ा न मिल पाया मुझे। मैं वो पत्थर हूँ कि हर ठोकर ने सहलाया मुझे।। तल्ख़ रहना तो मेरी फ़ितरत में है मजबूर हूँ। वक़्त ने हर दौर में ज़ह्राब पिलवाया मुझे।। रूह मेरी काँपकर सचमुच ठिठककर रह गयी। आईने ने रूप जैसा आज दिखलाया मुझे।। इस गिरह को खोलने में ही लगी रहती हूँ मैं। कौन है जिसने हमेशा मुझसे उलझाया मुझे।। जिसके कहने पर कोई बस जाए दिल में…

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"#Gazal by Dr. Yasmeen Khan"

#Gazal by Vinod Bairagi

स्न की हसीना ओ का दीदार हु में। दिल का सफर तो धड़कन करती हे उस के लबो का वो  प्यार हु में।। देखने लगा में इन अँधेरी रातो में मुझे देखा कर तो चादनी भी सरमा गई। मोहब्बत के सपनो में वो आ गई ।। इन आखो में से वो समन्दर का पानी आ गया । इश्क  के प्यार ने दिल को रुला दिया। माली की बागियों से खुसबू आने लगी हे। लब्बो के…

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"#Gazal by Vinod Bairagi"

#Sazal by Gayaprasad Mourya , Rajat

सजल *********** अपना ही ये चेहरा अक़सर डराता है मुझे . अपना ही अब पराया  नज़र आता है मुझे . मैं हांथों में बुत बन के रह गया हूँ उसके , हर रोज़ मिटाता है खुद ही बनाता है मुझे . मिटटी है वतन की कसम नही खा सकता, दगा दे सकता वो ऐसा नज़र आता है मुझे . अपनी महफ़िल से  रुसवा कर दिया तुमने , गैरों की बस्ती में देखूं कौन बिठाता है…

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"#Sazal by Gayaprasad Mourya , Rajat"

#Shayari by Amit Omar

बुजुर्गो की दुवाओ का असर ढलता नही देखा दिलो में द्वेष बच्चो के लिए पलता नही देखा यही वो लोग है जो कर रहे है घर तेरा रोशन चरागों से किसी का आशियाँ जलता नही देखा अमित ओमर कानपुर 09935367640

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"#Shayari by Amit Omar"

#Gazal by Adil Sarfarosh

किस ने निभाया है साथ वफादारी से सबने लूटा है मुल्क को बारी-बारी से सबकी फितरत में है बस दर्द देना कौन पेश आया है यहाँ खुद्दारी से हम क्या ये जहाँ तेरे साथ हो जाए अमा एक बात तो करो दमदारी से न जाने कब बिगड़ जायें मुल्क के हालात- सब लिए बैठे हैं खंजर देखो बड़ी तैयारी से मैं कैसे मान लूं वो बदल गया है आदिल गद्दार कभी बाज़ भी आया है…

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"#Gazal by Adil Sarfarosh"

#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA

हम तो अपनों को, अपना संसार समझ बैठे ! उन्हें ज़िन्दगी की नैया का, पतवार समझ बैठे ! रफ़्ता रफ़्ता फंसते गए हम उनके कुचक्र में, हम तो उसी को ख़ुशी का, बाज़ार समझ बैठे ! कैसी हैं फितरतें उनकी न समझ पाये हम, ज़ख्म देने पर भी उनका, इख़्तियार समझ बैठे ! पागल थे कि न समझे मन की गांठों को हम, उनकी अदा को उल्फ़त का, इज़हार समझ बैठे ! भूल ही गए…

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"#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA"

#Gazal by Arun Sharma

गजल ___ कृष्ण मिल रहे राधा से जो इस होली में लग रहा रंग गालों पर हंसी ठिठोली में विराग कलुष पाप छोड़ प्रह्लाद हम बनें खुश रहे सब ग्वाल बाल मीठी बोली में अपना धर्म है नेकी करना कर रहे हैं भर रहा ईश्वर खुशियाँ सबकी झोली में लगन लगी गोरी के गाल संग गुलाल की सजें भाल गोपियों के कुमकुम रोली में चलो दुश्मनों अब नई शुरुआत करते हैं गले मिल लिये दिल…

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"#Gazal by Arun Sharma"

#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

दुनिया के सारे ग़म को, दिल में समां लिया मैंने, एक फूल से दिल को भी, पत्थर बना लिया मैंने ! ये सोच कर कि शायद मुकद्दर कभी तो जागेगा, जमाने की ख़लिश को भी, अपना बना लिया मैंने ! गुज़र जाता है खुशियों का उजाला बिना छुए मुझे, ये नसीब था कि अंधेरों को, अपना बना लिया मैंने ! कभी न भूल पाया मैं दिल से वो गुज़रे हुए लम्हात, मगर फिर भी इस…

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"#Gazal by Shanti Swaroop Mishra"

Gazal by Rifat Shaheen

गर्मियों इश्क़ जलाती है हमे अपने दीदार की ठंडक दे दो पास अब जाओ बेझिझक आ कर दिल के दरवाज़े प दस्तक दे दो हम तेरे दर प हैं साइल से खड़े भीख में अपनी मुहब्बत दे दो राह उलझी है ज़िंदगानी की अब इसे जीने का मकसद दे दो रिफ़अत शाहीन

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"Gazal by Rifat Shaheen"

#Gazal by Adil Sarfarosh

किस ने निभाया है साथ वफादारी से सबने लूटा है मुल्क को बारी-बारी से सबकी फितरत में है बस दर्द देना कौन पेश आया है यहाँ खुद्दारी से हम क्या ये जहाँ तेरे साथ हो जाए अमा एक बात तो करो दमदारी से न जाने कब बिगड़ जायें मुल्क के हालात- सब लिए बैठे हैं खंजर देखो बड़ी तैयारी से मैं कैसे मान लूं वो बदल गया है आदिल गद्दार कभी बाज़ भी आया है…

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"#Gazal by Adil Sarfarosh"

#Gazal by Ajeet Singh Charan

न रदीफ न काफिया, न गजलों की बहर पता है जहां तुम्हे पहली दफा देखा,हमें वो शहर पता है लुटा बैठे जो हम दिल की दौलत, मोहब्बत में ये वो जानते हैं, जिन्हें तेरी नज़रों का कहर पता है डच नहीं लगता है आजकल इन सांप बिच्छुओं जबसे जमाना देखा ,हमें आदमी का जहर पता है चाहे जितने ढहा ले जुल्म , जमाना ये जालिम इक दिन तो आयेगी ,उम्मीदों वाली सहर पता है @अजीत…

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"#Gazal by Ajeet Singh Charan"

#Gazal by Devendra Kumar Dubey

कभी रोना,कभी हंसना-हंसाना भूल जाता है, अजब इंसान है,गुजरा जमाना भूल जाता है। बड़ा गुमसुम सा रहता है,सफर में जिंदगी के वो, छुपाकर अश्क अपने वो,रुलाना भूल जाता है। कभी जो गुनगुनाता था,मोहोब्बत के तरानो को, बड़ा खामोश रहता है,वो गाना भूल जाता है। मिली ना है खुशी उसको,गमों को रोज सहता है, वो दीपक भी खुशी के अब,जलाना भूल जाता है, बड़ी मासूम सी हरकत,किया करता था वो मुझसे, वो हरकत भी मनाना भी,सताना…

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"#Gazal by Devendra Kumar Dubey"

#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA

गर बाज़ार में मिलता प्यार, तो खरीद लेते हम भी ! होता बिकाऊ अगर ऐतबार, तो खरीद लेते हम भी ! न होते वीरान गुलिस्तां न होती ये सर्दियां गर्मियां, मिल जाता मौसम खुशगवार, तो खरीद लेते हम भी ! न होते कभी गम न बहता आंसुओं का दरिया कभी, होता खुशियों का गर बाज़ार, तो खरीद लेते हम भी ! न होती ये झंझटें न होता ये बलवों का खेल ख़ूनी ही, मिल जाता…

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"#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA"

#Gazal by Anuj Tiwari

तलवार  से  है  जोर  है जुर्रत  जवाब की । देखा  कलम  से झुक गई गर्दन नवाब की ।। नाजुक हैं  फूल तो  बड़े  चाहे  तो मसल दें । लेकिन अदब में झुक गई टहनी गुलाब की ।। बेनूर  इन   फिजाओं   में  रंगत  नहीँ  रही । किसको पड़ी है फिक्र ये चमने-अजाब की ।। है जोर  बाजुओं  में की  पत्थर को तोड़ दे । पर प्यार में है खस्ता-ए-हालत जनाब की ।। देखो न देश लुट  …

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"#Gazal by Anuj Tiwari"

#Gazal by Dr. Yasmeen Khan

कोई पुरवाई चले जब यास्मीं। क्यों तिरा तन-मन जले तब यास्मीं।। ख़ुशबुएं अंगडाई लें जब बाग़ में। कह उठें क्यों सब ही के सब यास्मीं।। आज तो है बात कुछ सबसे अलग। इस तरह चहकी है कब- कब यास्मीं।। क्या तिरे मन में छुपा है तू बता। खोल भी दे अपने तू लब यास्मीं।। डाल से झटका मुझे, नोचा मुझे। कुछ नहीं बाक़ी बचा अब यास्मीं।। डॉ.यासमीन ख़ान

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#Gazal by Adil Sarfarosh

ग़ज़ल इस ज़माने में यारों अब छल है बहुत दिल लगाकर दुखाना आजकल है बहुत अपनी गलती को कोई दोष देता नहीं औरों की गलतियों में दखल है बहुत कैसे करोगे असली-नकली में फर्क एक ही चीज़ की यहाँ नक़ल है बहुत सिर्फ कपड़ों को धोने से क्या फायदा मन में जब तक तुम्हारे मल है बहुत कौन कायम है अपनी ही बात पर बाबू चुनाव है दल-बदल है बहुत लूटकर खा गए सब मेरे…

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"#Gazal by Adil Sarfarosh"

#Gazal by Ishaan Sharma Anand

जमाने भर का विष अक्सर लबों से मैं लगाती हूँ। मुझे वरदान है कोई जो फिर भी मुस्कुराती हूँ।। . बदन को घूरती नज़रें मुझे हर रोज़ चुभती हैं, जुबाँ खामोश रखती हूँ, जिगर पर चोट खाती हूँ।। . तले छत के रहोगे तो तुम्हारा वो मकाँ होगा, मुझे है इल्म ऐसा कि मकाँ को घर बनाती हूँ।। . मेरे दिल की तबीयत को समझ पाया नहीं कोई, नज़र में अश्क रखती हूँ, लबों से…

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"#Gazal by Ishaan Sharma Anand"

#Shayari by Beadab Lakhnavi

खूबसूरत हैं उन्हीं को आईना मैं बेचता , बेचता किडनी लहू और आत्मा मैं बेचता । रंग उल्फत का जो चाहो तुम लगाकर देख लो , रंग उल्फत के सभी मैं  हर जवां को बेचता । – पं. बेअदब लखनवी

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#Gazal by Rajinder Sharma Raina

तू मेरे जीने का सबब है, जां मेरी चाहे न तू रब है। तोहफा सा इश्क मिला है, पास मेरे खास वो सब है। देर मत कर दीद की हसरत, है लगी ये प्यास तो अब है। याद भी फिर साथ ही रोये, दिल में उठता दर्द वो जब है। काश रैना मिलन हो जाये, जो लिखा होना वो तो तब है। रैना”

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"#Gazal by Rajinder Sharma Raina"

#Gazal by Vikas Pal

अपने मित्र दीपक कुमार कुशवाहा को समर्पित—— बहस थी– ऐसा नहीं वैसा नहीं है। जो भी जैसा दिख रहा वैसा नहीं है। तअज्जुब है कि पुतलों के जहाँ में कोई पुतला आदमी जैसा नहीं है। ज़िल्लती है ज़ाबिता से आँख बाँधे मत पूछिए ये मज़हबी कैसा नहीं है। दोस्ती निभती नहीं है दोस्तों को विदा कह दूँ पास में पैसा नहीं है। किरणे कुहासा भेद करके आयँगी धुंध  ही छायी रहे ऐसा  नहीं है। ——विकास…

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"#Gazal by Vikas Pal"

#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA

ये अजीब सा ही, मौसम हो चला है आज कल ! आदमी का धीरज, ख़त्म हो चला है आज कल ! दिल में तो ख्वाहिशें सजी हैं सब कुछ पाने की, मगर आदमी क्यों, बेदम हो चला है आज कल ! जिधर भी देखते हैं उधर सियासत का खेल है, फिरकापरस्ती का, मौसम हो चला है आज कल ! सियासत के आँगन में तो हो सकता है कुछ भी, जाने क्यों आदमी, बेशरम हो चला…

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"#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA"

#Gazal by Adil Sarfarolsh

तीरगी  का मिजाज़ बदला तो करो तुम चिरागों की तरह जला तो करो जीत जाओगे दुनियां की हर जंग दिल से एक बार हौसला तो करो सब  तुम्हारे  दीवाने  यहाँ हो जायेंगे तुम गुलाबों की तरह खिला तो करो काम बनते हैं मिलने से आदिल दोस्तों से अक्सर मिला तो करो जो नशे  में  सब कुछ भूल जाते हैं ऐसे यारों से कुछ फासला तो करो बहुत हो चुकी हैं यहाँ सरगोशियाँ हैं  गुज़ारिश कोई…

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"#Gazal by Adil Sarfarolsh"