#Gazal by Shanti swaroop Mishra

न बसाते दिल में किसी को, तो अच्छा होता ! न बताते राज़े दिल किसी को, तो अच्छा होता ! जब वक़्त बदला तो फेर लीं निगाहें यारों ने , न समझते अपना किसी को, तो अच्छा होता ! तल्खियों की बाढ़ में बह गए सब नाते रिश्ते, न थमाते उँगलियाँ किसी को ,तो अच्छा होता !  करते हैं वार पीछे से वो हमारे यार बन कर , हम न लगाते गले किसी को, तो अच्छा होता ! बेहूदियों की हद तक बिगाड़ा महफ़िल को , यारो न बुलाते हम किसी को ,तो अच्छा होता ! लोग तो लिए फिरते हैं नमक अपने हाथों में , न दिखाते ये ज़ख्म किसी को, तो अच्छा होता ! औरों पे यक़ीन कर हम तो फंसते रहे “मिश्र“, यारा न परखते हम किसी को, तो अच्छा होता !   शांती स्वरूप मिश्र

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#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

हर दस्तूर इस ज़माने का, निभाया हमने ! मगर न पा सके वो यारो, जो चाहा हमने ! न आये कभी काम जिन्हें समझा अपना,   पर उनके हर इशारे पे, सर झुकाया हमने ! बहुत रंग देखे हैं हमने ज़िन्दगी के दोस्तो, पर उसका न कोई रंग, समझ पाया हमने ! न समझती है ये दुनिया अब दर्द के आंसू, न कोई मेहरवां दुनिया में, ढूढ़ पाया हमने ! “मिश्र” ज़िन्दगी लगा दी अपनों के फेर में, पर करें यक़ीं किस पर, न जान पाया हमने ! शांती स्वरूप मिश्र

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#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

दुनिया की इस धरती से, अब सत्य अहिंसा लुप्त हो गए ! अब लूट पाट और हिंसा में, सब के सब ही चुस्त हो गए !! सत्य अहिंसा की बातें, अब मिलती हैं सिर्फ किताबों में ! झूठ कुटिलता बेईमानी, अब मिलती है सभी जवाबों में !! जो सच्चाई का साथ निभाए, उसका जीना अब दूभर है ! इस दुनिया में मक्कार हमेशा, अब रहता सबसे ऊपर है !! यारो सत्पथ पर चलने की, अब दिखती कोई डगर नहीं ! अब झूठ कपट की इन रातों की, दिखती कोई सहर नहीं !! पहले परमोधर्म हुआ करता था, ये सत्य अहिंसा का नारा ! अब तो ज़रा ज़रा सी बातों से ही, चढ़ जाता लोगों का पारा !! गाँधी जी के परम वाक्य को, लोगों ने बिलकुल भुला दिया ! अब ऐसे चरित्र निर्माण हो रहे, दुनिया को जिसने रुला दिया !! शांती स्वरूप मिश्र

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