#Gazal By Shanti Swaroop Mishra

हूँ तो कमजोर मगर, दिल ए फौलाद रखता हूँ ग़मों की तल्खियों में भी, ख़ुशी आबाद रखता हूँ न डरता हूँ किसी से भी, नहीं है खौफ मरने का न रखता मैं छुपा के कुछ, खुले ज़ज़्बात रखता हूँ न देखूं ख्वाब ऐसे भी, जिन्हें पूरा न मैं कर पाऊं सदा ही हर कदम पर मैं, खुदा को याद रखता हूँ गिरा के हमसफ़र को राह में, चलना नहीं सीखा हमेशा हर किसी के वास्ते, दिली इमदाद रखता हूँ न करता कभी भी मैं, विवशताओं का सौदा “मिश्र” मिटा सकूं रुसबाइयाँ उनकी, यही जिहाद रखता हूँ

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#Gazal By Salil Saroj

आज फिर मेरा टेलीविजन बीमार हो गया हिन्दू-मुस्लिम दंगों का शिकार हो गया वही पुरानी घिसी-पिटी बेमतलबी बातें किसी रद्दी

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#Gazal By Ishq Sharma

मुझको तो  तेरे  ख़्वाबों के, समंदर में रहना है.. तेरे सीने में धड़कते दिल के, अंदर में रहना है.. ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••

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#Gazal By Shanti Swaroop Mishra

कांटे चुभा कर हमसे, वो गुलाब मांगता है ! दाने नहीं हैं घर में मगर, वो शराब मांगता है ! लुटा दिया चैनो सुकून जिसके वास्ते हमने, हमारी नेकी का हमसे, वो हिसाब मांगता है ! मक्कारियों के नशे में वो चूर है इस कदर , कि हर मात का खुदा से, वो जवाब मांगता है ! मनाता है दुःख वो पड़ोसियों की खुशियों पे, हर किसी का ही खाना, वो ख़राब मांगता है ! न पढ़ सका वो मोहब्बत का ककहरा कभी, हर समय नफरतों की, वो किताब मांगता है ! इंसानियत के दुश्मन को सभी जानते हैं “मिश्र”, पर फिर भी अमन का, वो ख़िताब मांगता है ! शांती स्वरूप मिश्र

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