#Gazal by Asha Shaili

वो क्यूँ साया नहीं देता, पुराना इक शजर होकर जहाँ का दर्द सहना था उसे तो बस बशर होकर हमारे वास्ते इक घर तलाशें कौन कहता है चमकना था मुकद्दर में, तो चमके दरबदर होकर चले हैं उम्रभर तन्हा, जहाँ से रोज़ो-शब लोगो वही बस बात करती हमसे है सूनी डगर होकर हमारी ज़िन्दगी तारीकियों की हो गई आदी चरा़े दिल जलाया हमने हरदम बेख़बर होकर वो हमसे दूर था पर दूर दिल से हो…

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"#Gazal by Asha Shaili"

#Shayari by Umesh Lakhpati , krishna

मेरी धड़कन का तेरे दिल से रिश्ता। मेरी आँखों का तेरी नजर से रिश्ता। रिश्ता मेरी रूह का तेरे बदन से है, टूट ना पाये ये किसी कसम से रिश्ता।

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"#Shayari by Umesh Lakhpati , krishna"

#Gazal by Prahlad soni sagar

अगर आइना जो नहीं होता घर में! कहाँ से मचलती ये कलियाँ शहर में!! छलकते नहीं जाम मदमस्त होकर! निकलती न ग़ज़ले रुहानी बहर में!! हवाएं न चलती न चढ़ती घटाएं! बरसती न बारिश न छुपते शजर में!! रुमानी मुहब्बत नहीं रोती पल पल! नहीं होती मृत्यू किसी भी जहर में!! नहीं राग होती नहीं द्वेष होता! नहीं जान होती खुदा के कहर में!! बड़े खूबसूरत सहज रूप होते! नहीं होती ईर्ष्या किसी भी नज़र…

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"#Gazal by Prahlad soni sagar"

#Gazal by Dipti Gour ‘Deep’

इंसान बन रहे हैं क्यों हैवान की तरह l गुलशन बदल रहे हैं क्यों वीरान की तरह l उल्फत वफा के रिश्ते सभी मतलबी हुए , सब बिक रहे हैं  फलसफे  ईमान की तरह l सबके लहू का रंग एक -सा है दोस्तों, फिर घूमते शहर में क्यों शैतान की तरह l तुम अपनी शख्सियत को रखो खुद संभालकर , बिकने लगी है सियासत सम्मान की तरह l आलम हरेक  सिम्त है बेचारगी का क्यों…

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"#Gazal by Dipti Gour ‘Deep’"

#Gazal by Asif Al Atash

मंदिर मस्जिद गुरूद्वारों में सब कुछ है गीता क़ुरऑ के पारों में सब कुछ है   ढूंढ रहे हो मेरी बाईक में बम को नेता जी की दस कारों में सब कुछ है   ऊंचे ऊंचे दरबारों में बैठे हो ऐसे वैसे दरबारों में सब कुछ है   देख रहा हूं सारी दुनिया को इनमें लगता है कि बाज़ारों में सब कुछ है   दंगा करवाने के तौर तरीक़े और ग़ौर से देखो अख़बारों में…

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#Shayari by Akash Khangar

मुझे मेरी हक़ की तन्हाई मिली तुम्हे तुम्हारे हक़ की खुशियां जो सच्चा था उसने सबने ठगा वाह रे ऊपर वाले क्या है तू और क्या है तेरी दुनियां… ** वक़्त सफाई पेश करने का मौका नही देता इंसान खुद ही खुद का दुश्मन है कोई और धोखा नही देता तेरा दिल टूटता क्यों और तोड़ता कौन जो तू इश्क़ को न्यौता नही देता…    

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"#Shayari by Akash Khangar"

#Gazal by Jyoti Mishra

  वो खयालों में इस कदर  आते हैं भरी बरसात की तरह  ऑखों से बरस जाते हैं   जर्रे -जर्रे पे होती है निशानी  उनकी दूर जाकर भी हर बार, ठहर जाते हैं   बेबसी इस दिल की क्या कहिये दिल में जो काबिज़ हैं, उन्हीं से राज़ छुपाते हैं   कैसे कह दें के रह नहीं सकते तुम बिन नजरें झुक जाती हैं और लफ्ज़ शर्माते हैं   जान सके वो न पर जाने…

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"#Gazal by Jyoti Mishra"

#Shayari by Ishq Sharma

••••••••••••••••• इश्क़ु •••••••••••••••••• ख़ामोश चेहरा माँ का, तकलीफ बता देता है। बेटे चार है,  देखते  है,  दवा कौन ला देता है। नज़र  उतार कर  भूत भगा  देती हैं  जो माँ। उसके माथे की वो शिकन कौन भगा देता है। सब कुछ उसका बीत गया, आस बाकी नही। खींच कर दामन में खुशियां कौन ला देता है। निवाला  अगर  थोड़ा  ही  रहता है रसोई में। कौन सा ख़ुदा है उसमें जो भूख मिटा देता है। ••••••••…

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"#Shayari by Ishq Sharma"

#Shayari by Saurabh Dubey Sahil

हर एक पन्ना पूरी किताब नहीं होता , मुँह से निकले शब्दों का हिसाब नहीं होता, यूँ तो ना जाने कितने लोग मिलते जिन्दगी में, पर हर कोई आपसा आफताब  नही होता ।   ~ सौरभ दुबे   ” साहिल ” किशनी मैनपुरी  (यूपी )

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"#Shayari by Saurabh Dubey Sahil"

#Gazal by Alok Shirivas

ग़ज़ल *** नफरतों का बीज बोया किसने पता नहीं। ये गलतियाँ थी मेरी कोई तेरी खता नहीं।। आरजू जो पाने की हम तेरी किया करे। तू नहीं मेरे नसीब में ये मुझको बता नहीं।। मुक्कमल नहीं जिंदगी अब तो तेरे बगैर। संग छोड़ के मेरा अब मुझको सता नहीं।। एहसान है तेरा मुझ पे जो चाहा था कभी। अब नही दिल में चाहत मुझको जता नहीं।। आँखों से बरसा आँसू मन भीग सा गया। न…

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#Gazal by Pankaj Sharma Parinda

गांव   में  जब   हम   पुराने  घर  गये देखकर  मंज़र  वहाँ   का   डर  गये। =========================== गूँजा  करती  थीं  जहाँ  किलकारियाँ क्यूँ  वहाँ  हालात   हो   बदतर  गये। =========================== एक  थी   दीवार   आँगन   में   खड़ी देखकर जीते  जी  हम  तो  मर गये। =========================== पूछती  हैं  प्रश्न  घर  की  खिड़कियाँ किसलिये हमको यूँ’ तनहा कर गये। =========================== झूमते बागान  थे  जिस  जिस  जगह फूल बिन पतझड़ के उनसे झर गये। =========================== लहलहाती  थी  फसल  खेतों  में तब आज   देखा  …

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"#Gazal by Pankaj Sharma Parinda"

#Shayari by Ishq Sharma

1 मेरे ख़्वाब मीठे आये मुझे स्वाद भरा खिलाती है खुद लूखी-सूखी खाकर #माँ चुपके सो जाती है   2 कलम से मुझे अपनी ये कलाम लिखना है दफ़ा लाख दुआ में #माँ तेरा नाम लिखना है   3 तकलीफ़े सारी दूर हो गई तेरी आहट से माँ नींद भी अरसों बाद आई तेरी गोद की गर्माहट से माँ   4 सब किताबें फाड़ दी इश्क़ के चाहतों की, रहने दिया लफ्ज़ #माँ तब नींद…

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#Gazal by shivmurti tripathi chandresh

जान बूझ कर खैर न पूछो कैसा हूँ किस हाल में हूँ | सबके जैसे मैं भी उलझा दुनिया के जंजाल में हूँ || काल बनी कुछ बड़ी मछलियाँ हम छोटों की ताक में हैं | जान बचने खातिर दुबका डर कर मै शैवाल में हूँ || बदल रहा है राग पुराना बदल रहे सब अपने साज़ | ऊपर वाले की रहमत से अब भी मै सुर ताल में हूँ || जब तक है धरती…

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"#Gazal by shivmurti tripathi chandresh"

#Gazal by Dr. Yasmeen Khan

सुनी दिल की वही आवाज़ हमने। झिझक देखी किसी की आज हमने।।   ज़माना इसलिए हमसे ख़फ़ा है। बदल डाले सभी अन्दाज़ हमने।।   उतर आया ज़मीं पर आस्माँ क्यों। शुरू की ही नहीं परवाज़ हमने।।   तुम्हारी लय कहाँ मिल पाई उससे। बजाया लाख दिल का साज़ हमने।।   खुले गर तो पलट जाएगी दुनिया। छिपा रक्खे हैं इतने राज़ हमने।।   निराशा हाथ आई यास्मीं जब। बदल डाला है ख़ुद को आज हमने।।…

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"#Gazal by Dr. Yasmeen Khan"

#Gazal by Kashan Iqbal Pahlwan

तेरी बुराइयों को हर अख़बार कहता है, और तू मेरे गांव को गँवार कहता है   //   ऐ शहर मुझे तेरी औक़ात पता है  // तू बच्ची को भी हुस्न – ए – बहार कहता है  //   थक  गया है हर शख़्स काम करते करते  // तू इसे अमीरी का बाज़ार कहता है।   गांव  चलो वक्त ही वक्त  है सबके पास  !! तेरी सारी फ़ुर्सत तेरा इतवार कहता है //   मौन  होकर…

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"#Gazal by Kashan Iqbal Pahlwan"

#Gazal by Kashan Iqbal Pahlwan

कितने भूले हुए नग़्मात सुनाने आए, फिर तिरे ख़्वाब मुझे मुझ से चुराने आए..   फिर धनक-रंग तमन्नाओं ने घेरा मुझ को, फिर तिरे ख़त मुझे दीवाना बनाने आए..   फिर तिरी याद में आँखें हुईं शबनम शबनम, फिर वही नींद ना आने के ज़माने आए..   फिर तिरा ज़िक्र किया बाद-ए-सबा ने मुझ से, फिर मिरे दिल को धड़कने के बहाने आए..   फिर मिरे कासा-ए-ख़ाली का मुक़द्दर जागा, फिर मिरे हाथ मोहब्बत के…

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"#Gazal by Kashan Iqbal Pahlwan"

#Shayari by Sanjay Ashk Balaghati

कब तक जीवोगे गुलाम की तरह चुसते रहेंगे वो तुम्हे आम की तरह रावण-कुंभकरणो को सबक सीखाने उठा लो अब धनुष श्रीराम की तरह संजय अश्क बालाघाटी 9753633830

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"#Shayari by Sanjay Ashk Balaghati"

#Gazal by Alok Shrivas

  सूनी आँखों का मंजर  तुम्हे दिखलाएँ कैसे। प्यार के गीत शुष्क होठों से गुनगुनाएँ कैसे।।   है पड़ी बंजर जमीं कब से इस मेरे दिल की। बिन सावन आंखों का तेरी  लहलहाएँ कैसे।।   बेतरतीब सी ये जिंदगी  उलझन में है घिरी। ये वो अलकें नहीं तेरी फिर सुलझाएँ कैसे।।   खामोशियाँ दीवार की इस कदर है चीखती। तेरी आवाज की सरगोशियाँ हम लाएँ कैसे।।   बहुत आसान था भुला देना मेरी उल्फ़त को।…

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"#Gazal by Alok Shrivas"

#Shayari by Amit kaithwar Mitauli

कोई आंखों से पिलादे या जाम से मुझे शुरूर नहीं होता. मुझे जो कुछ भी दिया है खुदा ने मुझे गुरूर नहीं होता . एक शख्स है जो मेरे दिल में,धड़कन में घर किए बैठा है मैं पूरी कोशिश करता हूँ मगर वो मुझसे दूर नहीं होता. मैंने उसका जिक्र कर कर के बहुत मशहूर कर दिया. लाख कोशिश की मगर उसके आगे मैं मशहूर नहीं होता. -अमित कैथवार मितौली – -9161642312-

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#Gazal by Jalaram “Jajbati”

फ़ाइलातुन मफाइलुन फैलुन ————————– कैसे कह दूँ कि तुझ से प्यार नहीं, अपनी किस्मत पे एतबार नहीं। चाहे तुम ने वफ़ा न की लेकिन, बेवफाओं में तुम शुमार नहीं। है यकीनन वो भार दुनिया में, आदमी जिस का कुछ वक़ार नहीं। हो सके तो यकीन कर लेना, मेरी चादर है दाग़दार नहीं। हाँ ये सच है की मैं हूँ ‘जज़्बाती’, तल्ख़ बातें हरेक बार नहीं। ©जालाराम_’जज़्बाती’

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"#Gazal by Jalaram “Jajbati”"

#Gazal by Adil Sarfarosh

रुख  हवा  का बदलने से क्या फायदा गिर गए फिर संभलने से क्या फायदा   जिन  राहों  पर अपने बिछड़ते रहे हैं उस मंजिल के मिलने से क्या फायदा   रात  भर  चाँद  करता  रहा है रोशनी सुबह सूरज निकलने से क्या फायदा   हो  गए  हैं  वो  हमदम  किसी और के उनकी चाहत में जलने से क्या फायदा   हुस्न वाले किसी के भी होते नहीं साथ इनके चलने से क्या फायदा

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"#Gazal by Adil Sarfarosh"

#Shayari by Saurabh Dubey Sahil

~ शायरी ~   दिल में उम्मीदों का ख्वाब पलता रहा, बिन कहे उससे सब कुछ चलता रहा , वो हँसकर एक नजर देख क्या गये, में ताउम्रभर मोमबत्ती सा जलता रहा । *** कोई भी पढ ले जो में वो किताब नहीं हूँ , उँगलियों पर जुड जाये में वो हिसाब नहीं हूँ , मेरे शब्दों को तुम समझो या ना समझो पर, किसी के दिल को जलाये में वो तेजाब नहीं हूँ ।…

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"#Shayari by Saurabh Dubey Sahil"

#Gazal by Kashan Iqbal Pahalwan

खामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फत नई नई है.. अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ्तगू में, अभी मुहब्बत नई नई है..   अभी ना आएगी नींद हमको, अभी ना हमको सुकून मिलेगा, अभी तो धड़केगा दिल ज़्यादा, अभी ये चाहत नई नई है..   बहार का आज पहला दिन है, चलो चमन में टहल के आएं.. फज़ा में खुशबू नई नई है, गुलों में रंगत नई नई है..   जो खानदानी रईस हैं वो,…

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"#Gazal by Kashan Iqbal Pahalwan"

Gazal by Dr. Dipti Gour ‘Deep’

जिंदगी में ऐसे भी मोड़ आया करते हैं l दिल लगाने वाले ही दिल दुखाया करते हैं l गर्दिशों के मारों से कौन बात करता है l दोस्त भी मुसीबत में मुस्कुराया करते हैं l मशविरा तो दे देना पर मदद मती करना l लोग एहसानों को भूल जाया करते हैं l हम किसी से दुनिया में दुश्मनी नहीं रखते l लोग जाने क्यों हमको आजमाया करते हैं l ‘दीप’ कौन समझाए बेशऊर लोगों को…

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"Gazal by Dr. Dipti Gour ‘Deep’"

#Gazal by Uday Shankar Chaudhari

दिवाना है नही मुझसा कोई भी जमाने में मेरे महबुब के जैसा कहां कोई जमाने में आशिक हूं वतन का प्यार मुझको जमीं से है मुहब्बत है तिरंगे से ना दुजा है जमाने में —— पकड़ता हूं कलम जब भी कोई श्रृंगार लिखने को कलम चलती नहीं कहती जमीं का दर्द लिखने को नजर जाती किसानों पर उनके आशियानो पर सजल मन से कलम बढती दबे अरमान लिखने को —– जमीं को सींचते हैं जो…

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"#Gazal by Uday Shankar Chaudhari"