#Gazal by Poetess kumari smriti

हो अगर तेरी मुहब्बत ईद है, चाँद के घर,नुरे जन्नत ईद है। चाँद छत पर छुप के आया था अभी, आज मेरी खूबसूरत ईद है। मिल रहे फिर गले दुश्मन अभी, रोज़ की ख़ारिज अदावत ईद है। बज्म के खुल से रहे हैं राज भी,। ना करो तुम अब शिकायत ईद है। आपके घर शाद हो आवाद हो, मुफलिसों के फाके आदत ईद है। खिड़कियों से झाँकती है,नज्र भी, हुश्न के चिलमन की आदत ईद…

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"#Gazal by Poetess kumari smriti"

#Gazal by Ramshyam Haseen

ग़ज़ल ये   दुनियावी  क़िस्से  हैं ये कब किससे सुलझे हैं   मतलब की दुनिया है  ये सब मतलब से मिलते हैं   इससे तो  मरना  बेहतर जीने   वाले   कहते   हैं   जिसने जीवन को समझा वो सबका,  सब उसके हैं   हमसे  भी  तो  पूछो, हम झूठे   हैं     या   सच्चे  हैं   रामश्याम हसीन

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"#Gazal by Ramshyam Haseen"

#Gazal by Md Juber Husain

`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`• *कुछ पल `•`•`•`•`•`•`•`•`•`• वह शख़्स जो इस दुनिया से ही चला जाता है। उस तक को नही पता होता कि कहाँ जाता है। `•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`• स्वर्ग   तक   पहुँचाने   दुआएँ   चलती  रहती। धुँआ है आस्मां नही पता ये रास्ता कहाँ जाता है। `•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`• बहुत  बिलख़ते  है  रिश्ते  मैय्यत  के  दौर  में। उठते ही ज़नाज़े के जाने आँसू कहाँ जाता है। `•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`•`• क्या तन क्या धन समूचा संसार ही छूट गया। तिनका भी न ले जायेगा सच…

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"#Gazal by Md Juber Husain"

#Gazal by Ishq Sharma

कर के दगा भी, तुम बाज न आए। आता हूँ कहके,तुम आज न आए। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° इंतेहा  हो  गई,   मेरे  इंतज़ार  की। मुझको करके तुम नाराज,न आए। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° समझते तो  हो  खुद को बादशाह। फिर क्यों देखने, मुमताज न आए। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° गुलाबी पत्तियाँ,  बिखर गई सारी। लेकर के तुम,  सुर  साज न आए। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° मेरे गुलबदन का हरअंग मुरझाया। कर के भी मुझपर,  नाज़ न आए। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° यह तकलीफ, असहनीय है यारा। ऐखुदा कभी ऐसा,रिवाज न…

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"#Gazal by Ishq Sharma"

#Gazal by Bholendra Tomar

माना कि आदमी को   माना कि आदमी को हँसाता है आदमी;   इतना नहीं कि जितना रुलाता है आदमी;   माना गले से सब को लगाता है आदमी;   दिल में किसी-किसी को बिठाता है आदमी;   सुख में लिहाफ़ ओढ़ के सोता है चैन से;   दुख में हमेशा शोर मचाता है आदमी;   हर आदमी की ज़ात अजीब-ओ-गरीब है;   कब आदमी को दोस्तो! भाता है आदमी;   दुनिया से ख़ाली हाथ…

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"#Gazal by Bholendra Tomar"

#Gazal by Dr. Sulaxna Ahlawat

जो मुझको पता होता ये वक़्त लेगा यूँ अँगड़ाई, तुम्हारी नजरों से मैंने ना होती यूँ नजरें मिलाई।   खुदा जानता है उससे ज्यादा तुझको चाहा मैंने, इसीलिए खुदा ने लिखी तकदीर में होनी जुदाई।   देखो तो ओस की बूंद सा जीवन मिला मुझको, तुम्हारी मोहब्बत की सीप ने मैं मोती थी बनाई।   तुम्हीं कहो शिकवा गिला तुमसे करूँ भी तो कैसे, जिंदगी तो वो ही थी जो तेरे संग मैंने थी बिताई।…

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"#Gazal by Dr. Sulaxna Ahlawat"

#Kavita by Dharmender Arora ‘Musafir’

*वक्त बदलेगा हमारा देखना* वक्त बदलेगा हमारा देखना ! शान से होगा गुज़ारा देखना !! ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: गरदिशों के काफ़िले को रौंदकर ! ज़िंदगी देगी सहारा देखना !! ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: अज़्मो-हिम्मत की निशानी है यही ! तुँद मौजों में किनारा देखना !! ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: कुछ दिनों की बात है सुन लो सभी ! फ़िर बुलंदी पर सितारा देखना !! ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: ख्वाहिशें दिल की अगर तुम छोड़ दो ! क्या मुनाफा क्या खसारा देखना !! :::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: बल अकेलेपन का…

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# Gazal by Shanti Swaroop Mishra

बिठा दें चाहे लाख पहरे, ये जमाने वाले ! मगर घुस ही जाते हैं, दिल जलाने वाले ! कर सकते हैं राख उनको भी ये शोले, भला कहाँ सोचते हैं ये, घर जलाने वाले ! अब तो मदद करना भी गुनाह है दोस्तो, नहीं हैं कम इधर, इलज़ाम लगाने वाले ! बड़ा बेरहम है आज का ये जमाना दोस्त, लापता हो जाएंगे, तुझपे जाँ लुटाने वाले ! कहाँ फंस गए ठगों की नगरी में “मिश्र”,…

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"# Gazal by Shanti Swaroop Mishra"

#Gazal by Kumar Vijay Rahi

जहां जाना है जाओ यार ! लेकिन शान से जाओ ! तुम्हारी बात है… तुम मान या अपमान से जाओ ! वहीं होगा तुम्हारा भी ठिकाना एक कोने में, ज़रा तुम देख लेना जो कभी शमशान से जाओ ! मिरे बच्चों तुम्हे आगे जमाने से निकलना है, दुआएं हैं मिरी तुम खूब आगे शान से जाओ ! तुम्हें मालूम है क्या इश्क में बीमार होके तुम, कहीं ऐसा न हो जाए कि दिल ओ जान…

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"#Gazal by Kumar Vijay Rahi"

#Shayari by Sumit Kumar Pandey

कभी तो फ़ुर्सत निकाला करो यारों ज़िंदगी में ये मोहब्बत वो सब है जो रोज़ नहीं हुआ करती.. ** #मुक्तक जेठ की तपती दुपहरी जब भीषण होती है आँख ही नहीं केवल तब ज़िस्म भी रोती है अमीरों के मुक़द्दर का तो ज़नाब कुछ नहीं पता ग़रीबों के घर में मगर साहब एसी नहीं होती है.. ** माँ वो अज़ीम ख़ुशब़ू है जो महसूस हरदम होती है हाँ ये बात और है कभी ज़्यादा कभी…

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"#Shayari by Sumit Kumar Pandey"

#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

न करता कोई याद, तो ख़ुद ही याद कर लो ! टूटे हुए रिश्तों को, फिर से आबाद कर लो ! सर झुकाना है अपनों के लिए तो शर्म कैसी, दिल को गुबारों से, ज़रा सा आज़ाद कर लो ! हर दफ़ा ख़ामोशियों से काम होता नहीं दोस्त, बात कर के क्यों न, ख़ात्मा ए फसाद कर लो ! रूठों को मनाने में दिखता है बड़ा अपनापन, वक़्त मिल जाए तो, इसे भी अहसास कर…

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"#Gazal by Shanti Swaroop Mishra"

#Gazal by Rishabh Tomar ,Radhe

सब त्याग के मैं पत्थर नही बनाना चाहता मैं इंसान ही ठीक हूँ ईश्वर नही बनाना चाहता रिस्तों को निभाते निभाते बेबस हो गया हूँ अब रिस्तों के लिए खुद को मिटाना नही चाहता उस शख्स से बेपनाह मोहबत की थी मैंने इसी लिये उसको अब भुलाना नही चाहता किसी के दिल मे दीपक की तरह जलना है मुझे मैं किसी आरती के थाल में जलना नही चाहता श्रद्धा विश्वास त्याग समर्पण बेकार की बाते…

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"#Gazal by Rishabh Tomar ,Radhe"

#Shayari by Amit kaithwar mitauli

तुम्हें चाहने वालों की तादाद आज भी है. तू मुझसे ,मेरी बाहों से आजाद आज भी है मैं तो बर्बाद हो चुका हूँ कब का सनम. मगर मेरे दिल में तू आबाद आज भी है. – अमित कैथवार मितौली – – 9161642312 –

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"#Shayari by Amit kaithwar mitauli"

#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

किसी को अपनों की, बदहालियां नज़र नहीं आतीं ! खुद के भी बदवक़्त की, कहानियां नज़र नहीं आतीं ! सब को औरों में हज़ार कमियां तो दिखती हैं दोस्तो, मगर ख़ुद में किसी को, मदमाशियां नज़र नहीं आतीं ! करते हैं दिखावा प्यार का जो दिल में खोट रख कर, कभी उनके चेहरे पर, वो रमानियाँ नज़र नहीं आतीं ! अरे अब तो ईमान की बातें लिखना छोड़ दो “मिश्र”, अब कहीं भी ईमान की,…

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"#Gazal by Shanti Swaroop Mishra"

#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

यहाँ कोंन है अपना कोंन पराया, वक़्त मिला तो देखेंगे, किसने दिल से दिल को मिलाया, वक़्त मिला तो देखेंगे ! कितनों ने वफ़ा से साथ निभाया, वक़्त मिला तो देखेंगे, यहां कितनों से हमने धोखा पाया, वक़्त मिला तो देखेंगे ! जीवन के पथ पर चलते चलते हम हार गए हम टूट गए, किस रस्ते ने हमको खूब सताया, वक़्त मिला तो देखेंगे ! सहते सहते अपनों की घातें दिल अपना हलकान हुआ, कब…

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"#Gazal by Shanti Swaroop Mishra"

#Gazal by Ramshyam Haseen

  जैसी मर्ज़ी है तेरी, वैसी  कहानी लिख दे तू जो चाहे तो मेरे ख़ून को पानी लिख दे   ख़ून मक़तूल का कपड़ों पे मेरे है मुन्सिफ़ तू इसे चाहे तो क़ातिल की निशानी लिख दे     उसने लिक्खा है बहुत प्यार  है मुझसे उसको मैंने लिक्खा वो फ़क़त इसके मआनी लिख दे   उसको इक आँख सुहाता ही नहीं मैं, तो फिर अबके ख़त मैं वो मुझे दुश्मने-जानी लिख दे   काम…

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"#Gazal by Ramshyam Haseen"

#Gazal by Rajesh Kamaal

ऊपर बहने लगा दर्द खतरे के निशान से दूर नहीं अब जिंदगी शिकारी के मचान से   उनसे मुहोब्बत की कि जिंदगी मिलेगी हमें क्या मिला अब ये कैसे बताऊँ इस जुबान से   दिल ही तो नहीं ख्वाब भी  टूटे हैं जीने के क़त्ल कर के मुहोब्बत का रहते हैं अनजान से   जमाने का डर इस कदर बैठा है नजरों में बाहर ही नहीं निकलते वो अपने मकान से   जान पाते जो…

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"#Gazal by Rajesh Kamaal"

#Gazal by Sawan Ajmer

  आँख हैरान है अब हमने ये क्या देख लिया ।। अपने जैसा ही कोई वहशी खुला देख लिया ।।   अब जो तस्वीर से निकले तो बताएँगे तुम्हें ।। हमने तस्वीर में रहते हुए क्या देख लिया ।।   अब ये ख़ुश नजरी ही पागल न बना दे मुझको ।। मेरी आँखों ने कोई अक्स ए हवा देख लिया ।।   जेहन ओ दिल में से नए पाँव निकल आये हैं ।। जबसे घुँघरू…

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"#Gazal by Sawan Ajmer"

#Gazal by Kumar Vijay Rahi

अच्छा बनते बनते अच्छा टूट गया। फिर दिल के भीतर का बच्चा टूट गया। लाखों आंधी-तूफां झेले फिर भी क्यूं? आखर में बेचारा पत्ता टूट गया। अच्छी-खासी घर की गाडी चलती थी, जाने किस कारण से रस्सा टूट गया। चोरी करना उसका कोई काम ना था, दो दिन से था भूखा-प्यासा टूट गया। सच्चाई की कीमत देखी दुनियां में, अच्छे से भी अच्छा सच्चा टूट गया। भाभी के आने से तब्दीली आई, भाई से भाई…

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"#Gazal by Kumar Vijay Rahi"

#Gazal by dharmender arora

*पत्थरों के दिल* शानो शौकत से भरे जो घर मिले ! पत्थरों के दिल वहीं अकसर मिले !! :::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: फूल जिनके हाथ में दे आये हम ! आज उनके पास में खंज़र मिले !! :::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: ज़िंदगी से क्यूँ शिकायत हो हमें ! जब जहाँ में दिलनशीं मंज़र मिले !! :::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: देश भर के जो दिलों को जोड़ दे ! काश ऐसा भी कोई रहबर मिले !! :::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: जो तरसता ही रहा इक बूँद को !…

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"#Gazal by dharmender arora"

#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

खुश है ज़िंदगी से जो, उसे आबाद रहने दो ! दिल की धड़कनें यूं ही, बे आवाज़ रहने दो ! न उखाड़ो गढ़े मुर्दों को यूं ही बेसबब यारो, यूं गुज़रे हुए लम्हों को, मत आज़ाद रहने दो ! नहीं है फरिश्ता कोई इस जमाने में अब तो, संभालो खुद को ही, औरों की बात रहने दो ! न सिखाइये अपनी सरगम किसी को “मिश्र”, जो खुश है जिस अंदाज़ में, वो अंदाज़ रहने दो…

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"#Gazal by Shanti Swaroop Mishra"

#Shayari by Sanjay Ashk Balaghati

लड-खडाकर कदम सम्भल क्यूं नही जाते जैसे वो बदले वैसे हम बदल क्यूं नही जाते हमे तन्हा छोड जो खूश है अपनी दुनिया मे उनसे पुछो वो सिने से निकल क्यू नही जाते   ** बडती शराब की दुकाने कहती है जिंदगी से हर आदमी परेशान है होश मे मतलबपरस्त है फितरत मदहोशी मे ही लोग बनते इंसान है   ** तन्हाई का आलम है और सूखी है आंखे, दर्द सारे आह बनकर सायरी हो…

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"#Shayari by Sanjay Ashk Balaghati"

#Gazal by Karan Bahadur Sahar

मैं आशिक़ी का नया फ़रमान ले के आया हूँ, ऐ ज़िंदगी तेरे लिए नया मेहमान ले के आया हूँ।   कोई पूछे तो सही कि मेरी इस जेब में क्या है, ज़िंदगी भर जिसे चाहा उसी की जान ले के आया हूँ।   मौत के बाद ख़ुदा ने पूछा कि क्या लाया धरती से, मैं बोला उस ज़मीँ के अधूरे अरमान ले के आया हूँ।   कुछ तो था उसमें जो उसे देख के सुकूँ…

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"#Gazal by Karan Bahadur Sahar"

#Gazal by Arun Sharma

इश्क में खुद को फना करना चाहता हूँ खुदा से यही फ़ैसला  करना  चाहता हूँ     तुम रहो पाक  युँ  दुनिया  के  हैहात से दिन – रात यही दुआ  करना  चाहता हूँ     तेरा  अक्स  बनाने  की  कोशिश  में हूँ आज फिर वही  खता करना चाहता हूँ     तुम्हारे  होंठों  को  छूने  की  कशिश है मुहब्बत का सिलसिला करना चाहता हूँ     मेरे   हाथों   की   लकीरें   कह  रही  हैं दर्द  को …

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"#Gazal by Arun Sharma"

#Gazal by Kishor Chhipeshwar Sagar

  रिश्ता दिलों का मै निभाता गया ——————————————- तुम्हे देखकर मै मुस्कुराता गया धीरे से तेरे करीब आता गया   आरजू थी तुमसे दिल लगाने की बेवजह ही मै शरमाता गया   हाल ए दिल कह ना सका आँखों से प्यार जताता गया   चूम लेता था तेरी तस्वीर को भी और जमाने से छुपाता गया   वो लबो की मुस्कान जुल्फे झटकना तेरा हर अंदाज मुझे भाता गया   तेरे जिश्म की आरजू नहीं…

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"#Gazal by Kishor Chhipeshwar Sagar"