#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

जब चाहा तो पत्थरों को, भगवान् बना दिया ! जब चाहा तो घर आँगन की, शान बना दिया !   कितना मतलब परस्त है दुनिया का आदमी,     जब मतलब निकल गया, तो अंजान बना दिया !   मुझको हक़ नहीं अब अपनों को राय देने का,  यारो अपने ही घर में मुझे, मेहमान बना दिया !   बड़ी हसरतों से निभाया था हर रिश्ता मगर, ज़िन्दगी को इस आदत ने, शमशान बना दिया !    कहने को हम क्या कहें उन बेख़बर लोगों से, जिन्हें खुद की फ़ितरतों ने, शैतान बना दिया !   गर मोहब्बत भी करे कोई तो कैसे करे “मिश्र“, उसको भी आज लोगों ने, अहसान बना दिया !   शांती स्वरुप मिश्र

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#Gazal by Ishq Sharma

ज़ालिम किसे मरने की रज़ा देती है बे’गुनाहों को बे’ख़ौफ़ सज़ा देती है •••••••••••••••••••••••••••••••••• खुशियां भी चंद पलो की मेहमां

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#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

पास होते तो हम शिकायत भी करते ! प्यार ही प्यार में हम बग़ावत भी करते !   न बैठे होते ग़मों में ग़ाफिल इस तरह, कुछ न कुछ तो हम शरारत भी करते !   रूठ जाते तो मनाने का मज़ा लेते यारो,   ज़रुरत पे उनकी हम खुशामद भी करते !   दूर रह कर भला कैसे करें ख़िदमत हम, करीब होते तो हम हिफाज़त भी करते !   गलतियों का क्या सब से होती हैं “मिश्र“, पर उनके लिए तो हम रियायत भी करते !   शांती स्वरुप मिश्र

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#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

हवा में अनजान सा डर, बसा क्यों है !  हर लम्हा ज़िन्दगी का, खफा क्यों है ! गुज़रती हैं स्याह रातें करवटें बदलते, ये ज़िन्दगी भी यारो, इक सज़ा क्यों है ! घर में छायी हैं बला की खामोशियाँ, दर ओ दीवार पर मातम, सजा क्यों है ! दिल के कोनों में बढ़ गयी है हलचल, बीती यादों का ये वबंडर, उठा क्यों है ! जब चाह थी जीने की न जी सके “मिश्र” फिर से हसरतों का मेला, लगा क्यों है !  

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#Gazal by Ishq Sharma

•••••••••••••••••••••••••••••••••• मुझको गलत साबित कर के जाना, सरासर गलत था। •••••••••••••••••••••••••••••••••• मुझे इश्क़ के काबिल कर के जाना, सरासर गलत

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#Gazal by Ishq Sharma

• मौत की दुहाई •••••••••••••• ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• नफरत हो या मुहब्बत आसान है कहाँ।। हर शख्स ग़म को लेकर परेशान है

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#Gazal by Ishq Sharma

नित नये नये तरीके ईज़ाद करता है दिल.. कितना पागल है तुझे याद करता है दिल.. ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक दफ़ा तो

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#Gazal by Ishq Sharma

जब सवालों का जवाब वो हँसकर देती है अपनी मासूमियत से तर-बतर कर देती है ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• मैं तारीफ़ करता हूँ 

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#Gazal by Ishq Sharma

मुझे कहती है कि, चलो चाँद पर जाएंगे मैंने कहा तुम्हारे रहते हम किधर जाएंगे “””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””” वो शरमा कर बाँहों

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