#Shayari by Sanjay Ashk Balaghati

तमाम उम्र पलको पर शबनम जमी रहेगी पर जब भी तुम मिलोगी मुस्कान बनी रहेगी क्या हुवा जो अधुरा ही रह गया अपना प्यार तुम खूश रहोगी तो इसी मे मुझे खूशी रहेगी. … तुम्हारी मांग मे किसी का सिंदूर अच्छा है मुनासिब अब मेरा तुमसे रहना दूर अच्छा है प्यार तो तमाम उम्र रहेगा हम दोनो के दरमयां पर होकर जूदा निभाना जग का दस्तूर अच्छा है …  संजय अश्क बालाघाटी

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#Gazal by Karan Bahadur Sahar

  वो कोई और नहीं तेरा ही अपना है, इक अधूरा अधमरा सा सपना है।   कुछ खटकता सा है दिल में मेरे, शायद फिर किसी दर्द ने पनपना है।   ज़मीं के ऊपर ही है दुख-दर्द के खेल, ज़मीं के नीचे ना रोना ना तड़पना है।   कल किसी फूल का ख़त आया था मुझे, उसको मेरी खुशबू, मेरा रंग हड़पना है।   अब कोई और कारोबार नहीं “सहर” का, उस की हर याद,…

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#Gazal by Sawan Ajmer (Shukla Missing)

  रोज के रोज कुछ नया करना ।। सख़्त मुश्क़िल है तज़र्बा करना ।।   हिज्र हम दिन ही दिन का रक्खेंगे ।। तुम ‘न‘ रातों को सो लिया करना ।।   बस यही काम है हमारा अब ।। अपने होने पे तब्सिरा करना ।।   पहले दुनिया को कोसना जी भर ।। और फिर ख़ुद पे हँस लिया करना ।।   धीरे धीरे तुम्हें समेटें हम ।। धीरे धीरे ही तुम खुला करना ।।…

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#Gazal by Vijay Kumar Rahi

बडों ने ये बडा अच्छा कहा है। फकीरी का अलग अपना मजा है। अकेले ही सफर करना करना है सबको, तू किसका रास्ता फिर ताकता है। कभी क्या चांद उतरा है जमीं पर, मेरा दिल फिर भी जिद पे क्यों अडा है। तुझे जब साथ चलना ही नही है, तुम्हारे सामने ये रास्ता है। खटकता है वो गुलची की नजर में, चमन में फूल जो ताजा खिला है। वही समझेगा धन-दौलत की कीमत, गरीबी में…

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#Gazal by Uday Shankar Chaudhary

दरख्तों में मेरे देखो लगाए जाल बैठे हैं संभलकर हीं जरा चलना बिछाए जाल बैठे हैं —– परिंदों तक को भी छोड़े नहीं ये जहां वाले फंसाने के लिए हर ओर दाना डाल बैठे हैं —— हंसी में भी जहर है कुटील मुस्कान है इनकी जहर से भड़े घट में शहद ये डाल बैठे हैं —– कौवे उल्लुओं में है गजब की दोस्ती गहरी हंश का क्या कहें छुपकर बुरे बेहाल बैठे हैं —— भड़ोसा…

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#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA

न करनी है तुम्हें मदद, तो खुलेआम मत करिये ! मगर किसी की इज़्ज़त का, क़त्लेआम मत करिये ! ये दौलतें ये सौहरतें कभी साथ नहीं जातीं दोस्त, इस बेकार की चीज पर, इतना गुमान मत करिये ! आता है तुम्हारे दर पे कोई तुम्हें अपना समझ कर, यारो उसको ज़लील करने का, इंतज़ाम मत करिये ! ख़ुदा भी न कर सका कुछ भी मदद के बिना “मिश्र”, तुम तो बन्दे हो उसके, ज्यादा अभिमान…

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#Gazal by Rajesh Kamaal

ज़रा देखो घिर गया है बादलों से आसमान बरसेंगे लहक के तो जी जाएगा ये किसान खाद-बीज-बुवाई का बड़ा कर्ज है पहले से लील जाएगी उसको मोटे बनिये की दुकान हाथ पीले करने हैं इस कार्तिक में कन्या के बेटे की पढ़ाई है और बनाना है इक मकान बीवी बेवा-सी लगती है बेरंग चीथड़ों में बाप के दमे की दवा का करना है इंतजाम जमीन गिरवी पड़ी है बैंक में परसाल से ही कहा नहीं…

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#Gazal by Karan Bahadur Sahar

सभी इल्ज़ाम वो मुझ पर करते हैं, इतने निडर हैं कि मौत से डरते हैं।।   अजी पत्थर तो पत्थर ही होगा ना, फिर क्यूँ वो इस दिल पर मरते हैं।।   अजब दोस्ताना है अपना भी, वो जीते हैं हम मरते हैं।।   कुछ लोग ही कर गुज़रते हैं, हम तो बस अर्ज़िया भरते हैं।।   वो क्या समझें वो क्या जाने, हम कितना उन पे मरते हैं।।   अपना ये इश्क अमर हो…

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#Gaszal by Dr. Sulaxna Ahlawat

आज अफ़साना ऐ मोहब्बत लिख दूँ, सोचती हूँ तेरे नाम एक खत लिख दूँ। जो लबों पर आकर ठहर गयी मेरे, सोचती हूँ वो ही हकीकत लिख दूँ। वफ़ा के सिवा कुछ नहीं मेरे पास, आ तेरे नाम मैं ये वसीयत लिख दूँ। तेरी मजबूरियों को समझा था मैंने, क्यों नहीं हुई पूरी इबादत लिख दूँ। बेवफ़ाई नहीं की हमने एक दूजे से, क्यों अधूरी रह गयी चाहत लिख दूँ। आज भी दिल में तेरा…

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#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

सब कुछ लुटा कर, कुछ मिला तो क्या मिला, अरे इज़्ज़त गवां कर, कुछ मिला तो क्या मिला ! सारी ज़िन्दगी तो गुज़ार दी बेचारगी में हमने, अपनी मौत पा कर, कुछ मिला तो क्या मिला ! शराफत की ज़िन्दगी न जीने दी किसी ने भी, यारो आँखें दिखा कर, कुछ मिला तो क्या मिला ! देखा है बड़े गौर से ईमान ओ करम अपनों का, गैरों से रिश्ते जोड़ कर, कुछ मिला तो क्या…

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"#Gazal by Shanti Swaroop Mishra"

#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

कभी न कभी तो, ये वक़्त भी आना ही था ! जो आया था उसे तो, एक दिन जाना ही था ! क्यों लगा बैठे थे तुम एक मुसाफिर से दिल, उसे तो अपनी, मंज़िल की ओर जाना ही था ! होती नहीं ये दूरियां राहों की असीम यारो, कभी न कभी तो छोर, उनका आना ही था ! कुछ भी न साथ लेकर गया वो जाने वाला, उसे सब कुछ तो इधर, छोड़ जाना…

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#Shayari by Ishq Sharma

इश्क़-ऐ-चाँद ** धीरे – धीरे से बढ़ने  लगी  चाँदनी, तारे शरमा  गये  देख  के चाँदनी। बादलो में चमकती देखा चहुँओर, रूह  में  चाँद के है बसी चाँदनी।।   धीरे – धीरे से बढ़ने  लगी  चाँदनी, °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° चाँद तरसे कभी ना कभी चाँदनी, है मोहबत इनकी अमर कहानी।। ये हरयुग में देखा सभी ने कभी।। दुलहा चाँद तो है दुल्हन चाँदनी।।   धीरे – धीरे से बढ़ने  लगी  चाँदनी, °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° गर ठोस चाँद है तो कोमल…

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"#Shayari by Ishq Sharma"

#Shayari by Sanjay Ashk Balaghati

  मेरे दिल मे तुम्हारी मोहब्बत का घर बना है ऐसे तुम्हे याद करना ईश्वर को याद करना है जैसे तुम्हे महसूस कर ही रोज जीते आया हुं अब तक तुम ही बताव राधा को श्याम भूलाये भला कैसे … संजय अश्क बालाघाटी 9753633830

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"#Shayari by Sanjay Ashk Balaghati"

#Gazal by Dr. Raghvendra Mishra Pranay

तलवारों  से  जब भी  कभी  सवाल  हुआ समझो एक  सवाली  तभी  हलाल  हुआ।   अपने  घर का  झगड़ा  खुद  सुलझा  लेना जहाँ सियासत  पहुँची  वहाँ बवाल  हुआ।   सभी  भेड़ियों   ने   मिलकर   तैयारी   की जबसे   सुना  मेमना  कहीं   बहाल  हुआ।   सत्ता   कैसे    सबको  अपना   घर    देगी रामलला का घर भी जब  तिरपाल  हुआ।   पापों   को   धुल    कैसे   स्वर्ग   सिधारेंगे तोड़  रही  दम  गंगा , देख  मलाल  हुआ।   दारू – मुर्गा  पाकर  मैकू  …

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"#Gazal by Dr. Raghvendra Mishra Pranay"

#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

गिर के फिर संभलने का, मज़ा ही कुछ और है ! अपने पैरों से चलने का, मज़ा ही कुछ और है ! प्यार में चोट खाने का अफसोस न करो दोस्त, मोहब्बत में बिछड़ने का, मज़ा ही कुछ और है ! ज़िन्दगी जीने के लिए कोई तिकड़म न लगाइये, सिर्फ अपनी तरह जीने का, मज़ा ही कुछ और है ! अपने अमोल रिश्तों को दौलत से न तौलिये कभी, अपनों के आगे झुकने का, मज़ा…

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"#Gazal by Shanti Swaroop Mishra"

#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

कभी क़ातिल रिहा, कभी मासूम लटक जाता है ! फरेबों के सहरा में, बेचारा सच भटक जाता है ! शराफ़त की औकात कुछ भी नहीं जमाने में, बदमाशियों के आगे, सब कुछ अटक जाता है ! अजीब सा आलम है इस बेसब्र शहर का यारो, यहां ज़रा सा मसला भी, दिलों में खटक जाता है ! लोग बिछाते हैं जाल कुछ इस कदर फरेबों का, कि ज़िन्दगी का सफ़र, अधर में अटक जाता है !…

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"#Gazal by Shanti Swaroop Mishra"

#Gazal by Jyoti Mishra

मुहब्बत का सलीका सिखा दिया मैंने दफन करके दर्द दिल में ,मुस्कुरा दिया मैंने   शतरंज की बाजी नहीं, मुहब्बत है मेरी खुद को हरा कर, सिकंदर तुम्हें बना दिया मैंने   कुबुल हैं सारे जुर्म, जो मैंने किये नहीं इक तेरी हंसी की खातिर, खुद को फिर रूला दिया मैंने   रौशन वो रहें, मुबारक़ हो रोशनी उनको चिराग की मानिंद, खुद को ही जला दिया मैंने   देना खुशी उदास चेहरे को, इबादत…

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"#Gazal by Jyoti Mishra"

#Gazal by Peeyush Gupta Gagan

सुख से मेरा मिलना मुश्किल अब सूरज का निकलना मुश्किल   इस मतलब की दुनिया में यार भरोसा करना मुश्किल   आज के युग में इक लड़की का मीरा जैसा बनना मुश्किल   इक प्तथर को मूरत बनना होता होगा कितना मुश्किल?   नजरों में गिरना आसाँ है पर नजरों में उठना मुश्किल   जग रौशन करने के खातिर दीपक बनकर जलना मुश्किल   वो ऊपरवाला क्या जाने  जग मे जीना कितना मुश्किल पीयूष गुप्ता…

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#Shayari by Amit Kaithwar Mithouli

फूल कागज के कभी महकते नही हैं कृत्रिम पक्षी जो कभी चहकते नही हैं. शराब शबाब देखकर लोग बहक जाते हैं . एक हम ही हैं जो कभी बहकते नहीं हैं . ** छप्पर न उड़ जाए आंधी में इस डर से वो सोता नहीं है. आंधी ,तूफ़ान, सब सह लेता है मगर वो रोता नहीं है. किसान हर साल उम्मीद की इमारतें खड़ी करता है . वो सोंचता भी बहुत कुछ है मगर कुछ…

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"#Shayari by Amit Kaithwar Mithouli"

#Gazal by Arun Sharma

नक्श-ए-कदम पर हूँ गुल के खार नहीं जानूँ होश में हूँ जो मगर कभी होशियार नहीं जानूँ   गाँव में आज कल जो ख़िज़ाँओं का मौसम है मैं तो शहर में रहता हूँ फ़क़्त बहार नहीं जानूँ   शाइर हूँ इबारत लिखता हूँ अब मौशिकी पर तलब है मुझे जीस्त का मगर प्यार नहीं जानूँ   सौदेबाज़ी के लिए उल्फत की दुकानें खुलीं हैं बाजार में घूमता हूँ पर मैं खरीदार नहीं जानूँ   मेरे…

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#Gazal by Rishabh Tomar Radhe

किसी को इस कदर चाहो,कि खुद को उसका दिल बनालो करो उससे इतनी मोहबत की मोहबत का आशियाना बनालो मेहबूब जो कही चाँद बन जाये या फिर कोई जर्द सा सितार तो तुम भी मोहबत में अपने आप को आसमाँ बनलो जुबाँ से बातें करो परपल इश्क मोहबत और प्यार की और दिल को दूसरों को खुशी देने वाला गुलाब बनालो वादा निभाओ मोहबत का ‘ऋषभ’ इस कदर कि मोहबत को विस्वास का प्यार आशियाना…

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"#Gazal by Rishabh Tomar Radhe"

#Gazal by Peeyush Gupta Gagan

ग़ज़ल ………खुदा के लिए   आज नज़रें मिलाओ ख़ुदा के लिए एक बार आ भी जाओ ख़ुदा के लिए   आज पहली दफ़ा कह रहा हूँ ग़ज़ल हौसला तुम बढ़ाओ ख़ुदा के लिए   चुप रहो,मत कहो तुम किसी से यहाँ रात वो भूल जाओ ख़ुदा के लिए   ज़िन्दगी तुम गुज़ारो अकेले नहीं हाथ सबसे मिलाओ ख़ुदा के लिए   अपने खातिर नहीं,मेरे खातिर नहीं प्यार को तुम निभाओ ख़ुदा के लिए   तीरगी…

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#Shayari by Kavi Nilesh

आंखों में तेरे मुझे सैलाब दिखता है। हार कि भीनी खुशबू में मुझे इतिहास दिखता है हार का सेहरा कभी मेरे माथे, कभी तेरे माथे पर पर आज मुझे इस हार में इंकलाब दिखता है । **   चमेली बाबू हास्य कवि किससे गए गुस्साए राधे मां को छोड़ दिए, अब ओम बाबा के शरण में आए   बाबाओं के दौर में बहुतों ने मारी बाजी राधे मां को देखकर, याद आती है मेरी चाची…

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"#Shayari by Kavi Nilesh"

#Gazal by Rishabh Tomar Radhe

मेरी हर शाम सुरमयी होगी तेरी पनाहों में ज़िंदगी होगी   मैने पलको में है तेरी सूरत तेरी लिये ये दिललगी होगी   जो मेरी नजर में बन्दगी है वो तेरे लिये आशिकी होगी   बिन तेरे क्या बताऊँ तुमको ताउम्र दिल में तिश्रगी होगी   तुम मेरे पास आकर बैठो तो तब मेरे दिल मे ताजगी होगी   और मेरी नजरों में  खो गई तो  मेरे लिये ज़िन्दगी होगी   तुम बस जुल्फों को…

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"#Gazal by Rishabh Tomar Radhe"