# Gazal By Shanti Swaroop Mishra

उनकी तो बद्दुआ भी, हमें दुआ सी लगती है उनकी तो हर नफ़रत, हमें दवा सी लगती है हम तो हर चट्टान को सलाम करते हैं यारो, हर पाषाण की सूरत, हमें खुदा सी लगती है जीना है गर मज़े से तो चलो दुनिया के साथ, वरना तो ये ज़िन्दगी, हमें सजा सी लगती है न बताओ राज़-ए-दिल किसी को भी अपना, दुनिया की हर सूरत, हमें बेवफ़ा सी लगती है “मिश्र” न रहे वो दोस्त जो कभी होते थे पहले, अब उनकी भी हर बात, हमें हवा सी लगती है शांती स्वरूप मिश्र  

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#Gazal By Ishq Sharma

ज़ख्म दे कर मुझे, मुस्काते रहे.. मेरे अपने  मुझे, आजमाते रहे.. •••••••••••••••••••••••••••••••• दर्द के घूँट पीकर,मैं जीता रहा.. इस खुशी

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#Gazal By Shanti Swaroop Mishra

उनकी फ़ितरतों के आगे तो, हम मजबूर हो गए ! उनके जितने क़रीब आये, उतने ही दूर हो गए ! अपना दीया बुझा के, चले थे जलाने उनका हम, मगर लोगों ने समझा ये, कि हम मग़रूर हो गए ! क्या दिखाएं खोल कर, अपने दिल को हम यारो, पहले तो उधर ज़ख्म थे, मगर अब नासूर हो गए ! पहले न समझा किसी ने, हमें माटी के मोल भी,    यारो वक़्त क्या बदला कि, हम तो मशहूर हो गए ! मैं किसको भूल जाऊं, तो किसको याद रखूँ “मिश्र“, इस दुनिया के नाते रिश्ते तो, अब दस्तूर हो गए !    शांती स्वरूप मिश्र [a1]   

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