muktak by Mithilesh Rai ( Mahadev)

–                  – कोशिश कोशिश तुझे भुलाने की नाकाम हो रही है! हर ख्वाब की मदहोशी तेरे नाम हो रही है! पिघल रही है साँसें याद के पायदानों पर, जाँम की सरगोशी सुबह-शाँम हो रही है!

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"muktak by Mithilesh Rai ( Mahadev)"

gazal by ramesh raj

||आंतरिक तुक सौन्दर्य से युक्त ग़ज़ल || –                 -फ़ायलातुन ——————————————– प्यार के, इकरार के अंदाज सारे खो गये वो इशारे, रंग सारे, गीत प्यारे खो गये। ज़िन्दगी से, हर खुशी से, रोशनी से, दूर हम इस सफर में, अब भँवर में, सब किनारे खो गये। आप आये, मुस्कराये, खिलखिलाये, क्यों नहीं? नित मिलन के, अब नयन के चाँद-तारे खो गये। ज़िन्दगी-भर एक जलधर -सी इधर  रहती खुशी…

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gazal by AMARESH GAUTAM ‘AYUJ’

झुकी हुई नजरों से,मुस्कुराना तेरा, बहुत याद आ रहा, मिल के जाना तेरा। वो नजाकत औ शरारत, कि अब तक याद है, घुटनों पर ढ़ुड्डी रखकर, इतराना तेरा। उदासियों का अब,नामो-निशान नहीं है, दिल में बसा है,बच्चों सा,खिलखिलाना तेरा। नजरों से कनखियाँ, चलाना वो दूर से, सूनेपन में, जिन्दगी का,है नजराना तेरा। अब भी उस गली में, जाता हूँ कभी-कभी, जिस गली से कभी, था आना जाना तेरा। बदला जो भी जिक्र, तुम्हारा मेरे हुजूर,…

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gazal by kishor sharma

संभालकर रखना मोहब्बत हमारी लौट कर आएंगे हम कभी ना कभी रास्ते मुश्किल है यहाँ इश्क़ के मगर पार कर लेंगे हम भी कभी ना कभी वादे जो किये थे साथ जीने मरने के निभाने आएंगे हम भी कभी ना कभी मोहब्बत करते है ये समझ लेना कभी अहसास तुम्हे भी होगा कभी ना कभी

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"gazal by kishor sharma"

muktak by Mithilesh Rai ‘ mahadev ‘

तेरी याद मुझसे दूर होती जा रही है! मंजिल मेरी मजबूर होती जा रही है! भटक रही है तमन्नाऐं सुराबों में, जिन्दगी हरपल एक कसूर होती जा रही है!

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muktak by bhushan lamaba bhushan

गुस्सा इन्सान का सबसे बडा दुश्मन है, यह भले इन्सान को, हैवान बना देता है। गुस्से में कर बैठता है ये ऐसे ऐसे अनर्थ, सारी उर्म पछताता है, चैन नहीं पाता है। आप प्रभु जगत पिता, हम बालक नादान, मानव धर्म निभा सकें, ऐसा दीजिये ज्ञान। काम क्रोध मद लोभ से, हमको रखिये दूर, ऐसे कर्म हम करें कि, जिनसे हो कल्याण।

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gazal by s.k.gupta

बीमार के साथ बीमार नहीं हुआ जाता टूटी क़िश्ती में सवार नहीं हुआ जाता। हज़ार आफ़तें लिपटती हैं क़दमों से फ़िर भी तो लाचार नहीं हुआ जाता। बेशुमार धब्बे हैं धूप के भी दामन पर हम से ही गुनहगार नहीं हुआ जाता। रिश्तों को बेच दें पैसों की ही खातिर इतना तो शर्मसार नहीं हुआ जाता। उम्र गुज़र गई फ़ाक़ा मस्ती में सारी इतना भी ईमानदार नहीं हुआ जाता।

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muktak by kunwar bharti

शब्दों भावों और मुखाकृति से, स्थितियां पल में बदलें, वाणी से जब तीर चलें तो, दिल शांत संत के भी दहलें; वचनों से झंकृत वीणा हो, पुष्प सुगंधित जमकर बरसें, कटुतम रिपु भी हो जाए द्रवित, साख भाव से वह हरषे ।

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shayari by Abhishek kumar Amber

जिंदगी की इन राहों में मुझको तू ही मिलें। में भूल जाऊंगा जिंदगी से सारे गिले। उस खुदा से में तुझको ही मांगूगा बस । फिर चाहे ग़म ही मिले चाहे खुशिया मिलें।

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gazal by satyendra gupta

नए पते पर पुरानी चिठ्ठी मिली पता मेरा सब से ही पूछती मिली। मुद्दत बाद चिठ्ठी  को देख कर दिल को एक तसल्ली  सी मिली। वक़्त की रौंदी  हुई ज़मीं पर जैसे मुहब्बत  की  कोई  हवेली मिली। याद आ गया  महका  हुआ  बाग़ हर तह में ख़ुश्बू वो लिपटी मिली। एक बार नहीं  हज़ार बार उसे पढ़ा ज़िंदगी उन पलों में सिमटी मिली। भुला दिया  बेरहम  वक़्त ने  जिसे खबर आज उस आशिक़ी की मिली।

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muktak by Mithilesh Rai ‘ mahadev ‘

मेरी उम्मीद-ए-रात टूट रही है! मंजिल से मेरी मुलाकात रूठ रही है! दर्द के नकाबों में छुपी है जिन्दगी, आरजू-ए-सौगात हाथों से छूट रही है!

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muktak by Kunwar Bharti

मेघों के अंदर सुषुप्त हो गये, भानु तेजस और ज्योति, झमझम होती वर्षा चहुँदिश, तम तिमिर की भवभीति; स्वेद खिझा रहा था पहले, अब शीतल समीर आह्लाद, उदित भास्कर फिर हो रहा, थम रही बूँदें, यही है रीति ।

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gazal by jyoti azad khatri

ग़म ए दुनिया को बहरहाल भुला रखा हैं जैसे तहखाने में सामान छिपा रखा हैं यूँ तो राहों में मुझे मुश्किलें आईं लेकिन फिर भी विश्वास भरा दीप जला रखा हैं आंधिया भी मेरे विश्वास को तोडें कैसे खुद को इस तरहा से मजबूत बना रखा हैं इश्क रब से हो अगर सच्ची इबादत है ये इश्क का नाम तो अब मैंने खुदा रखा हैं अब भला कैसे जलाएगी तपिश जीवन की खुद को अब…

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gazal by shams bhopali

खोलकर दिल मिला करे कोई हमसे क्यों फासला करे कोई तर्के उल्फत में दर्द होता है सोच कर फ़ैसला करे कोई कू-ए-क़ातिल में सैर मुमकिन है हां मगर हौसला करे कोई हम ने ता-उम्र सबको लूटा है क्यों हमारा भला करे कोई नाज़ है हम गुलाम-ए-अहमद हैं गर है ज़ालिम, हुआ करे कोई सर पटकते रहेंगे हम तब तक जब तलक दर न वा करे कोई आदतन शम्अ़ हम जलाते हैं अब तो आ के…

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"gazal by shams bhopali"

muktak by mithlesh rai (mahadev )

क्यों मुझे हरबार इंतजार मिलता है? हर मुकाम पर क्यों मुझे इंकार मिलता है? छुपी हैं मंजिलें हालात की लकीरों में, दर्द का आलम क्यों मुझे बार-बार मिलता है?

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gazal by saurabh babu dube sahil

लिखी थी कविता तो आज किताब बन गयी , लोगो के दिलों मे बसकर वेहिसाब बन गयी। लिखे थे गीत तो आज गजल बन गयी , कविताओं से भी ज्यादा सरल बन गयी । धरती हरियाली से आज इस तरह सज गयी , कल नन्हे पौधे थे आज ललहाती फसल बन गयी। लहर साहिल से आगे बड़ी तो रेत में मिल गयी , सागर में ज्वार बन कर उठी तो सैलाब बन गयी। मन में…

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"gazal by saurabh babu dube sahil"

gazal by bhuvnesh chauhan ‘ chintan ‘

यहाँ मानते ना,वहाँ मानते हो। कहाँ तुम हमारा कहा मानते हो।। मिटा दी जिन्होंने गृहस्थी तुम्हारी। उन्हें आज तक तुम सगा मानते  हो।। मेरा घर जलाने में जो जो थे शामिल। तरक्की हो उनकी दुआ मानते हो।। मैं समझा के हारा कई बार तुमको। मेरी सीख को तुम दगा मानते हो  ।। मुझे बेबफाई के किस्से सुनाकर। फतह कर लिया है किला मानते हो।। किसी और के साथ करना वफायें । यहाँ रह गया क्या…

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"gazal by bhuvnesh chauhan ‘ chintan ‘"

muktak by bhushan lamba bhushan

पाँव पडते ही नहीं, जमीन पे मेरे, मैं आसमान पर, उड़ाने भरती हूँ। जब से मिली हैं, ये निगाहें तुझसे, हर पल तुम्हारी ही बातें करती हूँ।   अपनी तन्हाईयों में हमने,, ये ख़ास खूबी देखी, तेरी यादों के सिवा, कोई भी नजदीक न आया। योंतो कई हमसफ़र मिले, जिंदगी के सफ़र में, हमें हमीं से चुराले, ऐसा कोई मनमीत न पाया।     रंग बदलने का हुनर ही, न सीख पाये, फिर इस बेवफा…

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"muktak by bhushan lamba bhushan"