#Kahani by Vinod Sagar

रिक्शेवाली (लघुकथा) “बाबूजी, कहाँ चलिएगा?” सड़क किनारे चलते दो व्यक्तियों को देखकर अपने रिक्शे को उसी दिशा में मुड़ाते हुए

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