#Kahani by Lucky Nimesh

कत्ल नही होने दुगां डबल बैड पर आडी तिरछी अवस्था में पडी वह लडकी दुनिया जहान से बेखबर सोयी पडी थी! काली जिन्स और लाल टॅाप मे वह बला की हसीन थी! बैड पर उल्टी पोजीसन मे उसका चेहरा चमक रहा था और बता रहा था कि वह बेहद हसीन थी ,बेहद खूबसूरत! एक हाथ उसका आधा बैड से लटक रहा था जिसकी वजह से उसके हाथ में पहना बेशकीमती ब्रेसलेट ,जो कि सोने का…

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"#Kahani by Lucky Nimesh"

#Kahani by Harprasad Pushpak

अभिनय (लघु कथा ) ——————————- लम्बी दूरी की रेलगाड़ी जंक्शन पर आकर रूकी।यहां से कुछ डिब्बे और जुड़ने थे ।इस लिये टे्न को कुछ समय रूकना था ।अचानक एक दस बारह साल का एकलड़का रोता हुआ डिब्बे में चढ़ा ।हाथ में कटोरा लिये चीख चीख कर आंसू बहा रहा था वह हाथ से ईशारा कर कहता जा रहा था वह दूर चादर में लिपटा मेरा बाप थोड़ी देर पहले ही मरा है उनके पास मेरी…

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"#Kahani by Harprasad Pushpak"

#Kahani by Ajeet Singh Avdan

कहानी – ( समाज ) हरखू लकड़ी काटने का काम करता था, आज वह कुछ देर से जंगल के उस हिस्से में पहुँचता है जहाँ कटाई का काम चल रहा है, उसके साथी एक पेड़ की छाया में बैठे आराम कर रहे हैं, सब लोग उसके देर से आने का कारण पूँछते हैं, तो वह बताता है कि उसकी जोरू पेट से है जो कि आज भोर से ही तकलीफ में है । अरे यार…

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"#Kahani by Ajeet Singh Avdan"

#Kahani by Vikas Pal

शिक्षा (लघुकथा) “चोप्प…” सरजी कक्षा में घुसते ही दहाड़े। आगे की सीटों में बैठे छात्र सन्न हो गए। पीछे अभी भी खुसुर-फुसुर हो रही थी। “ऐय…पीछेवालो, ज्यादा चर्बी चढ़ी है क्या, दो डंडे में सुद्ध हो जाओगे। सीधे अपने मुँह में ऊँगली रख लो, आवाज न निकले, वरना मार-मार के गुड़िया कर देंगे।” सरजी ने अँगूठे और बीच की ऊँगली से चुटकी बजाकर तर्जनी को ऊपर-नीचे हिलाते हुए खड़े होने का इशारा किया– “ऐ चश्मेवाली,…

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"#Kahani by Vikas Pal"

#Kahani by Shuchi

एक लघु कथा… अश्कों की जमा पूंजी— आज बहुत दिनों बाद वो मायके आयी थी।एक ही शहर में विवाह, माँ-पापा ने ये सोच किया था कि बेटी से मिलते रहेंगे। शादी की पहली रात ही पति ने मुँह दिखाई में ये हिदायत दी थी कि मायके को भूल जाओ,ज्यादा नहीं जाना,नये घर को अपनाने में दिक्कत होगी,रोज जाने से सम्मान भी कम होता है।चुपचाप सुनती रही थी वो और पति के सोते ही नम आँखों…

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"#Kahani by Shuchi"

#Kahani by Sanjay Kumar Avinash

कल किसने देखा🌹 मन-मस्तिष्क में अठखेलियां जब हुंकार भरने लगे तो उसे नजरअंदाज करना संभव नहीं। आज भी उस रात की याद आती है तो मन व्याकुल हो उठता। नस-नस में कंपन शुरू हो जाती; मेरी जिन्दगी में अनायास आई और चली भी गई। अप्सरा या कोई देवी नहीं, वह मेहनत व मजदूरी करने वाली, सुशील व कर्मठ महिला थी, जो अपने साथ दो-दो बच्चों के भी बोझ उठा रखी थी। सुबह उठकर घर का…

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"#Kahani by Sanjay Kumar Avinash"

#Kahani by Manoj Karn

एन.आर.आइ बहू — अरे ! चड्ढा साहेब, देश छोड़ने की तैय्यारी मे पार्टी है क्या ? — नही पाजी ,आज बहू ब्याही जायेगी ! — यानी वो लड़की…..लिव इन रिलेशन वाली है ? — बिल्कुल नही ! बहू तो है ही पर अधुरी ! — अधुरी ? — आज मंगलसुत्र की रस्म अदायगी के बाद पुरी बहू हो जायेगी . — तो पहले किस रस्म से पनाह ली थी आप के परिवार मे ? –वहाँ…

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"#Kahani by Manoj Karn"

#Kahani by Rajender Palampuri

” माँ ~~~~~~~” एक ऐसा अतुलनीय शब्द , जो कानों में पड़ते ही बस मिसरी सा रस घोल देने की क्षमता रखता है !  मां किसी भी भाषा या फ़िर बोली में कहा जाने वाला सबसे मीठा लफ़्ज़ है ! स्वार्थ का तो इसमें दूर-दूर तक का भी रिश्ता नहीं है ! और न ही कोई अन्तर जानता है यह लफ़्ज़ ! बस एक यही बह ऐसा शब्द है जिसमें लिंग , जाति ,धर्म ,…

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"#Kahani by Rajender Palampuri"

#Kahani by Sanjay Kumar Avinash

डरकडोर माँ थी! पूर्ण माँ!  एक-एक कर तीन बेटियों की माँ। शादी के चार-पांच वर्षों के अंदर ही दो-तीन-चार से पांच हो गई। उस समय खुद को गौरवान्वित महसूस कर रही थी,  जब सौरी घर के करीब से आवाज आई, “अरी! लक्ष्मी आई है”, वहीं आदित्य के पिता बोल रहे थे, “चलो, ठीक-ठाक से हो गया न….. पुत्र होता तो अभी से जश्न मनाना शुरू कर देता…. फिर भी कोई बात नहीं, बेटी है तो…

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"#Kahani by Sanjay Kumar Avinash"

kahani by Sanjay Kumar Avinash

लुटन की मेहरारू ************** वर्षों बाद जश्न मनाने का मौका मिला। लुटन की माँ तूतुहियाँ बाजा की धुन पर ठुमके-पर-ठुमके लगाए जा रही थी। एक-से-बढ़कर एक अंदाज में नृत्य भी परोस रही थी।घर वालों के काफी जद्दोजहद के बाद लुटन शादी के लिए तैयार हुआ था| घर के देवी-देवताओं के साथ-साथ चौधरी जी के बंग्ला के पास अवस्थित ब्राह्मणी स्थान में भी कबूलती कर आई, “माय, ई लुटना के बियाह होए जाए तो एगारह गो…

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"kahani by Sanjay Kumar Avinash"

#Kahani by Pratik Palor

लघु कथा: पश्चाताप बड़े दिनों के बाद अपनी बाइक पर मौज करने मानव निकल पड़ा अनन्या के साथ । शहर के बाहर पहाड़ी पर चढ़ कर डूबते सूरज को देखने का अनन्या का बड़ा मन था । गाते-गुनगुनाते अभी आधे रास्ते ही पहुँचे होंगे की एक घुमावदार मोड़ पर सामने से तेज़ आते ट्रक से बचते हुए मानव ने बाइक मोड़ी तो सन्तुलन खो बैठा और बाइक फिसल गई । ईश्वर की दया से दोनों…

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"#Kahani by Pratik Palor"

#Kahani by Shabdh Masiha

साहित्य-मानव ========== लेखकों के सम्मान में बहुत बड़ा आयोजन किया गया था . सभी नामचीन लेखकों को आमंत्रित किया गया था . संयोजक की भूमिका निभाते नीलाभ की माँ की बड़ी इच्छा थी कि वह भी इस कार्यक्रम को खुद देखे .किन्तु अस्वस्थता के चलते वह बहुत धीरे-धीरे चलती थीं . उस रोज वह नीलाभ के साथ ही कार्यक्रम स्थल पर गयीं . लेकिन नीलाभ के लिए जरुरी फोन आ गया . वह अपने पुराने…

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"#Kahani by Shabdh Masiha"

#Kahani By Pratik Palor

लघु कथा: साइकिल सात वर्ष की उम्र से ही हेमन्त को अपने दोस्तों को साइकिल चलाते हुए देख कर बड़ा अरमान होता था की उसकी भी एक चमचमाती, सुन्दर, आधुनिक रूप वाली छोटी-सी साइकिल हो । किसी पर रौब पड़े या न पड़े, पर अपनी साइकिल पर घूमने का आनन्द ही शानदार होगा । ऐसे धनाढ्य परिवार से तो था नहीं की इधर आवाज़ की और उधर साइकिल आ गई । तो उसने सोचा पहले…

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"#Kahani By Pratik Palor"

#Kahani by Harprasad Pushpak

लघुकथा—तकनीक अश्विन कई बार बचने के बाद भी आखिर एक दिन अधिकारी के चंगुल में फंस ही गया ।बचने के ऐ प्रयास करने के बाद भी उसे सफलता नही मिली क्योंकि अधिकारी की छवि एक ईमानदार कड़क अधिकारी की थी ।अब उसने एक अन्तिम प्रया्स किया और अधिकारी के घरेलू नौकर को पांच सौ रूपये का प्रलोभन देते हुए पूछा -बुधिया ये बताओ तुम्हारे साहब के घर रोज इतनी बड़ी बड़ी गाड़ियां क्यों आती हैं…

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"#Kahani by Harprasad Pushpak"

#Kahani by Pratik Palor

लघु कथा: दीदी शालिनी चचेरी बहन थी सुबोध की । बस कुछ महीने ही तो बड़ी थी । तीन साल की उम्र से ही सुबोध के लिए बहन कहने को वही थी और सगी है या नहीं, इसकी समझ आने में अभी वक़्त बहुत था । वैसे शालिनी ने कभी एहसास भी नहीं होने दिया की ऐसा नहीं है । सुबोध को जो आत्मविश्वास, सम्बल और ख़ुशी शालिनी से मिलती थी, वो सुबोध के लिए…

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"#Kahani by Pratik Palor"

#Kahani by Harprasad Pushpak

अभिनय (लघु कथा ) ——————————- लम्बी दूरी की रेलगाड़ी जंक्शन पर आकर रूकी।यहां से कुछ डिब्बे और जुड़ने थे ।इस लिये टे्न को कुछ समय रूकना था ।अचानक एक दस बारह साल का एकलड़का रोता हुआ डिब्बे में चढ़ा ।हाथ में कटोरा लिये चीख चीख कर आंसू बहा रहा था वह हाथ से ईशारा कर कहता जा रहा था वह दूर चादर में लिपटा मेरा बाप थोड़ी देर पहले ही मरा है उनके पास मेरी…

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#Kahani by Pratik Palor

लघु कथा: साइकिल सात वर्ष की उम्र से ही हेमन्त को अपने दोस्तों को साइकिल चलाते हुए देख कर बड़ा अरमान होता था की उसकी भी एक चमचमाती, सुन्दर, आधुनिक रूप वाली छोटी-सी साइकिल हो । किसी पर रौब पड़े या न पड़े, पर अपनी साइकिल पर घूमने का आनन्द ही शानदार होगा । ऐसे धनाढ्य परिवार से तो था नहीं की इधर आवाज़ की और उधर साइकिल आ गई । तो उसने सोचा पहले…

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#Kahani by Vishal Narayan

–” बेमतलब किरदार “– कहानी में कुछ किरदार बेमतलब, बिला वजह ही आ जाते हैं. ना तो उनकी जरुरत होती है और ना ही कोई महत्वपूर्ण कार्य कि जिसको अंजाम न दो तो कहानी रुक जाएगी. फिर भी ये आते हैं. मुस्कुराते हैं. अपना सबकुछ लगा देते हैं और आपको हंसाते भी हैं. और फिर…. फिर क्या, कुछ भी नहीं. समाज की यही रीति रही है, वक्त की यही नीति रही है. जिस पात्र का…

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"#Kahani by Vishal Narayan"

#Kahani by Vikas Pal

(लघुकथा) भीतर का हाल स्कूल में एक दिन पहले ठहरे बारातियों के खाकर फेंके दोने-पत्तलों को कुचलते और धूल के हवाई हमलों को सहते हुए शर्मा जी, शुभम का पाँचवीं में एडमिशन कराने को कार्यालय कक्ष की तरफ एक-एक कदम बढ़ा रहे थे किन्तु उनका निश्चय मन से पाँव पीछे खींच रहा था। पत्नी नही चाहती थी। आंतरिक इच्छा तो उनकी भी सरकारी स्कूल में पढ़ाने की नहीं थी किन्तु नवोदय विद्यालय में सरकारी स्कूल…

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"#Kahani by Vikas Pal"

#Kahani by Vishal Narayan

-” मुहब्बत तो नहीं “– ओए हीरो, क्या बात है. सुबह से साफ सफाई चल रही है. धोए हुए कपड़े भी धो डाले. पूरा घर चमकाए जा रहे हो. दीवाली आने वाली है क्या. और मुझे तो नहीं लगता कभी गलती से भी जनवरी में दिवाली आई हो. और ये ऊंची आवाज में भजन कौन सून रहा है. कल तक तो मेरे रस्के कमर … मजा आ गया फुल वोल्युम में बज रहा था. और…

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"#Kahani by Vishal Narayan"

#Kahani by Harprasad Pushpak

पुरूस्कार (  लघु कथा) निष्ठा पूर्वक शिक्षण कार्य करते हुए। सीधे सरल और शान्त स्वाभाव पांडे जी ने विगत पांच बर्षों में एक भी अवकाश नही लिया था । स्टाफ रूम में बैठे साथी अध्यापको में मिश्रा जी ने चुटकी लेते हुए कहा- क्यों पांडे जी अवकाश बचाकर कहां ले जाओगे ?तभी तपाक से यादव जी ने कहा-अरे ! भाई भावी जी से वहुत डरते हैं,इसी लिये तो कोई अवकाश नही लेते है ।मिश्रा जी…

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"#Kahani by Harprasad Pushpak"

#Kahani by Surendra Kumar Singh

पूजा ** आज बहुत खुश दिख रही हो दर्शनांशि।लगता है कुछ खास है। हाँ राही आज कुछ खास है माँ का सन्देश है मुझे अपने देश जाना है पूजा में शरीक होने और माँ का कहना है मैं तुम्हे लेकर आऊँ। चलोगे न हाँ चल सकता हूँ देखना है तुम्हारा देश और तुम्हारे देश की पूजा। लेकिन तुम शरीर के साथ मेरे देश नही चल सकते।चलो तुम्हारे यहीं कहीं छिपा देते है और चलते हैं…

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"#Kahani by Surendra Kumar Singh"

#Kahani by ViShal Narayan

–” ख्वाहिश “– बहुत सारे डाक्टरों को दिखाने के बाद संतान हुआ था मैनेजर बाबू को. वो भी सुंदर सा सलोना लड़का. उसे देख देख फूले न समाते. जब वो हंसता रोम रोम खुश हो जाता और जब उदास या रोने लगता परेशान हो उठते मैनेजर बाबू. चाहते थे कि हमेशा हंसता रहे उनका लाल तो लगे हाथ किसी ने सलाह दें दिया फोटो क्यूं नहीं ले लेते. बस क्या था पिता के साथ साथ…

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"#Kahani by ViShal Narayan"

#Kahani by Naman Writer

“मूकबधिर” **** ” चल यहाँ से हट , भाग ” प्रखर के ये उच्चारण अपने से सात साल बडे बाईस वर्षीय “मूकबधिर” भाई अंकुर के लिए थे । जो रोज की तरह आज भी अपने घर की देहली के पास बनी नाली से सटकर बैठना चाहता था । जब तक माँ जीवित थी उन्होने ने अंकुर को पाला-पोसा पर उनके गुजरते ही प्रखर ने अपने “मूकबधिर” भाई को घर से बेघर कर दिया लेकिन घर…

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"#Kahani by Naman Writer"

#Kahani By Lovelesh Dutt

मिट्टी “अब ऐसे मुँह फुलाए बैठने से क्या होगा पिताजी? कुछ तो जवाब दीजिए।” “…” “वैसे भी उस ज़मीन में रखा ही क्या है? हमारे बचपन में थी उपजाऊ लेकिन अब तो बंजर ही है। उसमें सिवाय मिट्टी के और कुछ नहीं है…और मिट्टी की कोई कीमत नहीं होती यह आप अच्छी तरह जानते हैं फिर उसे कलेजे से चिपकाए बैठे रहने में कौन सी समझदारी है?” “पर बेटा…” “बस यही जो ‘पर’ है न…

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"#Kahani By Lovelesh Dutt"