kahani by srimati dr. tara singh

  –                                                                           =भाग्य विडंबना   एक तरफ़ फ़ाल्गुनी पूर्णिमा का चाँद, धरती की शुभ्र छाती पर रात आलोक धारा का सृजन कर रहा था ; दूसरी तरफ़ सुरेन्द्र की बेटी माला, एक नई दुनिया बसाने , एक नये…

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kahani by dr. srimati tara singh

  –                                                                          —पुत्रमोह                देवना के पिता सुखेश्वर लाल के  नशे की बात का पूछना ही क्या  दिन चढ़े तक सोता रहता है और जब नींद खुलती है तब धरती पर लोट रही बोतल को लात मारकर कहता…

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kahani by piyush kumar dwivedi ‘ putu

अमूल्य भेंट पंकज एक नामी विश्वविद्यालय में हिंदी के प्रवक्ता थे।उनको नौकरी करते हुए एक साल हुआ था लेकिन छात्रों में बहुत लोकप्रिय थे। पंकज जी को अबकी का पाँच सितम्बर नहीं भूलता क्योंकि उस दिन ऐसी घटना घटी जो उनके जहन में अंकित हो गई।पंकज अपने कमरे में अध्ययन कर रहे थे, उस समय शाम के चार बज रहे थे।दरवाजे पर दस्तक हुई,पंकज ने देखा उनके दो छात्र दरवाजे पर खड़े थे। उनमें एक…

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kahani by Bhupendra Singh ‘ gargvanshi ‘

– –हरामजादा कहानी काफी पुरानी और वास्तविक घटना पर आधारित है। इसकी समानता किसी भी तरह से अन्य लोगों से नहीं हो सकती क्योंकि यह मेरी अपनी कहानी है। इसके पात्र काल्पनिक न होकर मेरे अपने ही करीबी परिवारी जन हैं। अब तो मैंने अपनी इस कहानी का जिसे आगे लिख रहा हूँ के बारे में स्पष्टीकरण दे दिया है बस आप पढ़िए और यदि आपके मन में कोई विचार आए तो झट से कमेण्ट…

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kahani by Kavita Saxena

अधूरा ख्वाव (कहानी ) रात के बारह बज रहे थे लेकिन नींद मेरी आँखों से कोसो दूर थी में जागते जागते सोच रही थी कि वक्त का कुछ पता नहीं कि कब किस करवट मोड़ ले ले आज से लगभग छह साल पहले की बात हैं हम लोग मुरादाबाद रहते थे हम आवास विकास कॉलोनी में रहते थे हमारे पड़ोस में एक सम्पन्न परिवार रहता था वह पेशे से डॉक्टर थे उनके तीन बच्चे थे…

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kahani by Rashmi Abhaya

डाइरी के पन्नों से………………..(एक कहानी….यूं हीं) तकरीबन 15 रोज हो गए हमारे बीच कोई बातचीत नहीं हुई,यूँ तो ज़िंदगी ऊपर से बिलकुल सहज है मगर अंदर बहुत कुछ दरक गया है…..16 साल….एक युग कहलाता है…..इन 16 सालों में क्या क्या नही गुज़र गया….अब तो बच्चे भी बड़े हो गए हैं।तुमने एक बार कहा तो होता कि तुम्हारी ज़िंदगी में कोई धीरे धीरे मेरी जगह ले रहा है। ऐसी क्या कमी थी मेरे प्यार,विश्वास एउम समर्पण…

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kahani by Madhav Rathore

#बेजुबां_दर्द “मामीसा,मामीसा! मामोसा आ गये” बाहर मोटरसाईकिल की आवाज़ व् अबोध बालिका के स्वर  सुनकर वह  तंद्रा से जागी उसने रसोई की बारी से झांका तो पतिदेव  की गाड़ी दिखाई दी। शाम ढल चुकी थी।सुबह से साँझ तक गृह्स्थी का सारा काम और साथ ही दिनभर किसी के  इंतजार को निहारती पलकें थक सी गई थी पति इस बार जिला परिषद सदस्य के लिए टिकट की दावेदारी कर रहे है इसलिए भागदौड़ के कारण ज्यादातर…

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kahani by surendr kumar singh chance

कहानी योगी सुरेन्द्र कुमार सिंह चांस जिस्म को झुलसा देने वाली हवा चल रही है।कमरे के बाहर सन्नाटा है।सन्नाटा। लोंगों ने अपने को कमरे में बन्द कर रखा है।हम भी तो बन्द है अपने कमरे में।खिड़की से हाथ बाहर निकालते है लगता है हवा आग की तरह गर्म है।झट से हाथ अंदर खींच लेते है। बाहर से एक प्यारी सी आवाज आ रही है बतावा जननी राम कहिया ले अइहें।थोड़ी सी खिड़की खोलता हूँ देखता…

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"kahani by surendr kumar singh chance"

kahani by surendr kumar singh chance

–                                                                          -हमारी कहानी एक सुंदर सी कुटी में कोई ध्यान लगाये बैठा है। उसके पास एक आदमी आता है उसके कंधे पर हाथ रखकर कहता है आँखें खोलो तुम जिसके ध्यान में हो वो तुम्हारे पास खड़ा है। उसकी…

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kahani by Neerja Mehta

–                                                          –  “सच्ची लगन” मैं ऑफिस में काम करते करते थक गयी थी । सोचा एक कहानी लिख लूँ। तभी भाई का ध्यान आ गया। कैसे हम आधी आधी कहानी लिखते थे फिर एक दूसरे की कहानी पूरी करते थे।मैंने सर पीछे कुर्सी से टिका लिया और…

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kahani by dr. vinita rahurikar

समझौता नहीं समर्पण “ रिश्ते बनते तो प्यार से है लेकिन निभाए समझौते से ही जाते है . जो जितना ज्यादा समझौता करेगा उसका जीवन और रिश्ता उतना ही सुखी दिखेगा लोगो को . “ मनस्वी ने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा . बाहर घाना कोहरा छाया हुआ था . बुँदे बरस रही थी दिलो की उदासी मौसम पर छाई थी और मौसम की उदासी दिलो पर . बादलों से पानी की नहीं दर्द…

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kahani by surendr kumar singh chnance

उम्मीद ******* ख़ामोशी है न ख़ामोशी बज रही है गीत की तरह।बोल भी है उसके और संगति भी है उसकी।कह नही सकते ये कोई बिदाई गीत है या स्वागत गीत। जैसे सुबह बुला रही है रात को अपने घर और रात आत्म मुग्ध हो सुबह के निमन्त्रण से नाचती हई गुनगुनाती हुयी जा रही है सुबह के घर।उसकी सरसरसराहट ही है एक गीत सुबह की संगति पर। कान हैं न ये कान सुंनने वाले डूबे…

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kahani by jyotirmai pant

–                                                                         -जिजीविषा रीना का विभा से आज अचानक मिलना हुआ .शहर के एक बड़े अस्पताल में डाक्टर की केबिन में वह डाक्टर की प्रतीक्षा में बैठी  थी .अपने एक रिश्तेदार के बारे में उसे कुछ पूछना था .उनकी सारी…

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kahani by kedar nath ‘ shbdh masiha

नाल === -अब्बू ! उठो ! अब इस गाँव से अपना दाना पानी उठ गया . -अबे ! क्या बकता है ? यहाँ हमारे दादाओं के नाल गढ़े हैं . तुम सब चले जाओ , मैं नहीं जाऊंगा . – अब्बू  जिद न करो , कल ही तो हमारे लोगों के कई घर जला डाले बलबाईयों ने, न जाने ये कहर हम पर कब नाज़िल  हो जाए . – अरे ! मैं कैसे भूल जाऊं…

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kahani by kedar Nath “Shabd Masiha”

.बे-आवाज ======= -अरे ! दुलिया जरा जूते तो पालिश कर दे….. चमकने चाहिएं . आज कचहरी में जाना है . कोई नया साहब आया है हमको समन भेजा है . क्या ज़माना आ गया है ठाकुरों की तो कोई इज्जत ही नहीं रही अब . साले आजादी कहते हैं इसको . – हुजूर ! कौन सी अदालत में जाना है ? – अबे ! तू तो ऐसे पूछ रहा है, जैसे तेरा ही बेटा अदालत…

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kahani by Shambhu Nath

–                          –ट्रेन का सफर मदुरै से देहली नंदिनी सेन :- हुस्न से सजी जवानी से सजी एक साहित्यकार की एकलौती बेटी मुझे लोग प्यार से नंदिनी पुकारते है ॥ कैलाशी :- एक गरीब नाई शरीफ खान दान से हूँ पिता जी खेती किसानी करते थे पिता जी तो चल बेस लेकिन गरीबी अभी भी हमारा साथ नहीं छोड़ रही थी मुझे पता है…

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kahani by Omprakash chandel

–                                                                  -“पंगत” “दीदी, दीदी जल्दी आओ! बरात आ गयी है” -घर के छज्जे पर एक गोरा चिट्ठा, पतला ,दुबला गोल मुख धारी, तलवार के जैसे नैन नक्स लिये मात्र आठ साल का करीम जोर-जोर से चिल्ला रहा है। ‘राधा दीदी’ की कमरे के…

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kahani by Vivek Mishra

–                                          -दास्तान ए इम्तिहान (कहानी) संजीव ने जब उसे पहली बार देखा था “वो नीली और कांस्य कलाकृति-सी त्वचा ;उसके चेहरे पर गजब का आत्मविश्वास, अहंकार बिल्कुल नहीं, चाल पूर्णतः मर्यादित, उसका बदन वस्त्रों से ढका था फिर भी संजीव उसके अंदर छिपे आलेख और सौन्दर्य को देख सकता था ;जब वह किताबों को सीने…

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kahani by sushil yadav

–                                                              -एक चिता अचानक …… पता नहीं किस टेलीपेथी से, बरसों बाद मै अपने पुराने पुश्तैनी मकान की तरफ चला गया, जिसे बरसों पहले बेचकर, हम भाई लोग अलग-अलग शहर में अपनी सुविधानुसार बस गए थे| पुराने इलाके के, टपोरी होटल में चाय पीने की…

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kahani by vivek tripathi

सुबह की सैर (कहानी) लखनऊ ललितकला अकादमी में राष्ट्रीय स्तर की कला प्रदर्शनी का आज पाँचवाँ दिन था। कलाकृतियों के चिर प्रेमी अरनव बाबू दस वर्ष पश्चात् लखनऊ आये तो पुरानी यादें न्यु हाइद्राबाद की सड़क पर सैर करने को विवश कर गयीं आवाक निगाहों से देखते हैं इतने ही वर्षों में कितना कुछ बदल चुका है। वो हनुमान मंदिर छोटा सा था,गोमती के किनारे फर्श और पैडल बोट की व्यवस्था नहीं थी सड़क के…

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"kahani by vivek tripathi"

kahani by devanand sharma ‘ dev ‘

–                                                  – -: निःशक्त रमेश बाबू अभी अभी मल्टीनेशनल कम्पनी में सुपरवाइज़र बने है सपनो को पर लग गए मां बाप की पसंद से CA लड़की का रिश्ता भी मिल गया आज पहली बार रमेश बाबू घर वालो के साथ लड़की देखने पीलीभीत जा पहुचे खूब आवभगत हुई कोई कमी नही…

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"kahani by devanand sharma ‘ dev ‘"

kahani by Dharambir Dhull

संयम            (       लघु कहानी) अंकित सात वर्ष का बच्चा,ने मोबाइल उठाया ही था, उसके बडे भाई रिकूं ने झपट्टा मारा और मोबाइल आंगन में बने छोटे से गढे में पड गया जिसमे बरसाती पानी भरा हुआ था। रिंकू दौडा मां, मां, अकिंत से मोबाइल पानी में छूट गया। मां घर से बाहर निकली,देखा उसके हाथ में मोबाइल गीली मिट्टी मे धसा हुआ था और पूर्ण रूप से खराब…

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"kahani by Dharambir Dhull"

kahani by vivek tripathi

–                                                            – …प्रेम-पुनर्जन्म.  (राजा-रानी) वर्तमान समय के चित्रकारों का विषय जहाँ नदियाँ,पहाड़ी व परियाँ होतीं वहीं विशाल सिंह एक जादूगर था। उसकी कला का मुख्य विषय पुराने किले, इमारत होते थे। राजसी ठाट-बाट को जीवंत करने वाली चित्रशैली जिसमें बहुधा बारहदरी का चित्रण,बारहदरी के सामने विस्तृत…

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