kahani by surendr kumar singh chance

कहानी योगी सुरेन्द्र कुमार सिंह चांस जिस्म को झुलसा देने वाली हवा चल रही है।कमरे के बाहर सन्नाटा है।सन्नाटा। लोंगों ने अपने को कमरे में बन्द कर रखा है।हम भी तो बन्द है अपने कमरे में।खिड़की से हाथ बाहर निकालते है लगता है हवा आग की तरह गर्म है।झट से हाथ अंदर खींच लेते है। बाहर से एक प्यारी सी आवाज आ रही है बतावा जननी राम कहिया ले अइहें।थोड़ी सी खिड़की खोलता हूँ देखता…

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kahani by surendr kumar singh chance

–                                                                          -हमारी कहानी एक सुंदर सी कुटी में कोई ध्यान लगाये बैठा है। उसके पास एक आदमी आता है उसके कंधे पर हाथ रखकर कहता है आँखें खोलो तुम जिसके ध्यान में हो वो तुम्हारे पास खड़ा है। उसकी…

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kahani by Neerja Mehta

–                                                          –  “सच्ची लगन” मैं ऑफिस में काम करते करते थक गयी थी । सोचा एक कहानी लिख लूँ। तभी भाई का ध्यान आ गया। कैसे हम आधी आधी कहानी लिखते थे फिर एक दूसरे की कहानी पूरी करते थे।मैंने सर पीछे कुर्सी से टिका लिया और…

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kahani by dr. vinita rahurikar

समझौता नहीं समर्पण “ रिश्ते बनते तो प्यार से है लेकिन निभाए समझौते से ही जाते है . जो जितना ज्यादा समझौता करेगा उसका जीवन और रिश्ता उतना ही सुखी दिखेगा लोगो को . “ मनस्वी ने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा . बाहर घाना कोहरा छाया हुआ था . बुँदे बरस रही थी दिलो की उदासी मौसम पर छाई थी और मौसम की उदासी दिलो पर . बादलों से पानी की नहीं दर्द…

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kahani by surendr kumar singh chnance

उम्मीद ******* ख़ामोशी है न ख़ामोशी बज रही है गीत की तरह।बोल भी है उसके और संगति भी है उसकी।कह नही सकते ये कोई बिदाई गीत है या स्वागत गीत। जैसे सुबह बुला रही है रात को अपने घर और रात आत्म मुग्ध हो सुबह के निमन्त्रण से नाचती हई गुनगुनाती हुयी जा रही है सुबह के घर।उसकी सरसरसराहट ही है एक गीत सुबह की संगति पर। कान हैं न ये कान सुंनने वाले डूबे…

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kahani by jyotirmai pant

–                                                                         -जिजीविषा रीना का विभा से आज अचानक मिलना हुआ .शहर के एक बड़े अस्पताल में डाक्टर की केबिन में वह डाक्टर की प्रतीक्षा में बैठी  थी .अपने एक रिश्तेदार के बारे में उसे कुछ पूछना था .उनकी सारी…

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kahani by kedar nath ‘ shbdh masiha

नाल === -अब्बू ! उठो ! अब इस गाँव से अपना दाना पानी उठ गया . -अबे ! क्या बकता है ? यहाँ हमारे दादाओं के नाल गढ़े हैं . तुम सब चले जाओ , मैं नहीं जाऊंगा . – अब्बू  जिद न करो , कल ही तो हमारे लोगों के कई घर जला डाले बलबाईयों ने, न जाने ये कहर हम पर कब नाज़िल  हो जाए . – अरे ! मैं कैसे भूल जाऊं…

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kahani by kedar Nath “Shabd Masiha”

.बे-आवाज ======= -अरे ! दुलिया जरा जूते तो पालिश कर दे….. चमकने चाहिएं . आज कचहरी में जाना है . कोई नया साहब आया है हमको समन भेजा है . क्या ज़माना आ गया है ठाकुरों की तो कोई इज्जत ही नहीं रही अब . साले आजादी कहते हैं इसको . – हुजूर ! कौन सी अदालत में जाना है ? – अबे ! तू तो ऐसे पूछ रहा है, जैसे तेरा ही बेटा अदालत…

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kahani by Shambhu Nath

–                          –ट्रेन का सफर मदुरै से देहली नंदिनी सेन :- हुस्न से सजी जवानी से सजी एक साहित्यकार की एकलौती बेटी मुझे लोग प्यार से नंदिनी पुकारते है ॥ कैलाशी :- एक गरीब नाई शरीफ खान दान से हूँ पिता जी खेती किसानी करते थे पिता जी तो चल बेस लेकिन गरीबी अभी भी हमारा साथ नहीं छोड़ रही थी मुझे पता है…

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kahani by Omprakash chandel

–                                                                  -“पंगत” “दीदी, दीदी जल्दी आओ! बरात आ गयी है” -घर के छज्जे पर एक गोरा चिट्ठा, पतला ,दुबला गोल मुख धारी, तलवार के जैसे नैन नक्स लिये मात्र आठ साल का करीम जोर-जोर से चिल्ला रहा है। ‘राधा दीदी’ की कमरे के…

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kahani by Vivek Mishra

–                                          -दास्तान ए इम्तिहान (कहानी) संजीव ने जब उसे पहली बार देखा था “वो नीली और कांस्य कलाकृति-सी त्वचा ;उसके चेहरे पर गजब का आत्मविश्वास, अहंकार बिल्कुल नहीं, चाल पूर्णतः मर्यादित, उसका बदन वस्त्रों से ढका था फिर भी संजीव उसके अंदर छिपे आलेख और सौन्दर्य को देख सकता था ;जब वह किताबों को सीने…

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"kahani by Vivek Mishra"

kahani by sushil yadav

–                                                              -एक चिता अचानक …… पता नहीं किस टेलीपेथी से, बरसों बाद मै अपने पुराने पुश्तैनी मकान की तरफ चला गया, जिसे बरसों पहले बेचकर, हम भाई लोग अलग-अलग शहर में अपनी सुविधानुसार बस गए थे| पुराने इलाके के, टपोरी होटल में चाय पीने की…

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kahani by vivek tripathi

सुबह की सैर (कहानी) लखनऊ ललितकला अकादमी में राष्ट्रीय स्तर की कला प्रदर्शनी का आज पाँचवाँ दिन था। कलाकृतियों के चिर प्रेमी अरनव बाबू दस वर्ष पश्चात् लखनऊ आये तो पुरानी यादें न्यु हाइद्राबाद की सड़क पर सैर करने को विवश कर गयीं आवाक निगाहों से देखते हैं इतने ही वर्षों में कितना कुछ बदल चुका है। वो हनुमान मंदिर छोटा सा था,गोमती के किनारे फर्श और पैडल बोट की व्यवस्था नहीं थी सड़क के…

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"kahani by vivek tripathi"

kahani by devanand sharma ‘ dev ‘

–                                                  – -: निःशक्त रमेश बाबू अभी अभी मल्टीनेशनल कम्पनी में सुपरवाइज़र बने है सपनो को पर लग गए मां बाप की पसंद से CA लड़की का रिश्ता भी मिल गया आज पहली बार रमेश बाबू घर वालो के साथ लड़की देखने पीलीभीत जा पहुचे खूब आवभगत हुई कोई कमी नही…

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kahani by Dharambir Dhull

संयम            (       लघु कहानी) अंकित सात वर्ष का बच्चा,ने मोबाइल उठाया ही था, उसके बडे भाई रिकूं ने झपट्टा मारा और मोबाइल आंगन में बने छोटे से गढे में पड गया जिसमे बरसाती पानी भरा हुआ था। रिंकू दौडा मां, मां, अकिंत से मोबाइल पानी में छूट गया। मां घर से बाहर निकली,देखा उसके हाथ में मोबाइल गीली मिट्टी मे धसा हुआ था और पूर्ण रूप से खराब…

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kahani by vivek tripathi

–                                                            – …प्रेम-पुनर्जन्म.  (राजा-रानी) वर्तमान समय के चित्रकारों का विषय जहाँ नदियाँ,पहाड़ी व परियाँ होतीं वहीं विशाल सिंह एक जादूगर था। उसकी कला का मुख्य विषय पुराने किले, इमारत होते थे। राजसी ठाट-बाट को जीवंत करने वाली चित्रशैली जिसमें बहुधा बारहदरी का चित्रण,बारहदरी के सामने विस्तृत…

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kahani by anita mishra

–                                         -सोच  रही थी “”कितनी खुश “”थी रेखा आज बरसों की तमन्ना पुरी हुयी! बेटा अच्छे कम्पनी मे नौकरी पर लग गया!! उसे कमी तो किसी चीज की नही थी,फिर भी मां का दिल है,मानो उसे पर लग गये हों,सोच रही थी,पहली उसकी तनख्वाह मिलेगी तो सब जगह मंदिर मे उसके नाम से प्रसाद अर्पित…

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kahani by kedar nath sabdh masiha

=                                                              =गोली का धर्म गोद में अपने लाडले सलीम की लाश लिए सलमा दहाडें मारकर रो रही थी . एक तरफ बस्ता पड़ा हुआ था जिस से खून सनी किताबें मुँह निकाले यह सारा नजारा देख रहीं थीं . आसपास के लोग मातमी आँगन में…

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kahani by Kedar Nath Shabd Masiha

माँ का गाँव ======= बाईस वर्ष की अपनी लाडली को लादे वह अस्पताल पहुँचे . अस्पताल में पहले से ही बहुत अफरातफरी मची हुई थी . सरकारी घोषणा हुई थी सरकार हर मदद मुहैय्या करवाएगी . किसी तरह एक चादर बिछाकर बेटी को जमीन पर लिटाया . डाक्टर भगवान की ओर भगा उसका बाप . साहब मेरी बेटी को देखिये जरा . पहले पर्चा बनवाओ और फिर आओ . पर्चा बनाने की लाइन बहुत लंबी…

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"kahani by Kedar Nath Shabd Masiha"

kahani by jyotirmai pant

                                                                 -रेत घड़ी आज सुबह  बर्षों बाद अंजू को चाचा जी का फोन आया ..”अंजू तुम्हारी माँ बीमार हैं .उन्हें इलाज के लिए दिल्ली लाया गया है.वे तुम से मिलना  चाहती हैं ”.सुनकर अंजू कहीं खो सी गयी .सोचने लगी कि क्या करूँ ?जाऊँ …

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"kahani by jyotirmai pant"

kahani by Dharambir Dhull

                                                          -बहादूर बेटी लालचंद का अपना पूरा भरा हुआ परिवार था। उसके नाती पोते ओर दयोते तक जवान हो चुके थे। अभी तक वह अपनी देखरेख स्वयं कर लेता था।उसके बिस्तर के सिरहाने पर दवाइयों का अंबार लगा रहता था लेकिन अब कमजोर होते शरीर के लिए…

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"kahani by Dharambir Dhull"

kahani by Parmit Singh Dhurandhar

                                                                -: गुलाब और परमीत आज तो मेरे १४ साल के दोस्त गुलाब ने भी दोस्ती तोड़ दी. मैंने सोचा क्यों ना विदेशी धरती पर विदेशी कन्या को प्रेम-निवेदन किया जाय. आज तक मैंने जितने भी प्रेम-निवेदन कियें, उनमे मेरे दोस्त ने हमेशा साथ…

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"kahani by Parmit Singh Dhurandhar"

kahani by Dimple Gaur ‘Ananya’

         -अश्कों  से लिखा एक खत जानने की इच्छा होगी न कि मैं कैसी हूँ ? तो सुनो  हाँ मैं  साँसे ले रही हूँ…जिन्दा हूँ अभी | कभी मेरा खूबसूरत चेहरा तुम्हारी रातों की नींदें चुरा लिया करता था क्योंकि बेइंतहा  प्यार जो करते थे तुम मुझसे | मगर मैंने कभी तुम्हें नहीं चाहा  | क्या  यही  मेरा  सबसे  बड़ा दोष था !! जब मैंने तुम्हारा प्रेम प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया तो…

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"kahani by Dimple Gaur ‘Ananya’"