#Kavita by Ramesh Raj

कवि रमेशराज के पिता स्व. श्री ‘लोक कवि रामचरन गुप्त’ का एक चर्चित ‘लोकगीत’………… जागौ-जागौ रे भारत की वीर जवान,

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# kavita by Shanti Swaroop Mishra

रिमझिम रिमझिम सावन आया !  तन मन में अजब तरंगें लाया !! हर तरफ दीखती हरियाली है ! हर उपवन का तू ही माली है !! है अति पावन मास ये सावन !  करें इंद्र भी झुक अभिवादन !! शिव मन को सावन अति भाया ! रिमझिम रिमझिम सावन आया !! चहु दिश छाईं घनघोर घटाएं ! रह रह प्रीतम की याद दिलाएं !! अति मुदित मयूरा नाच दिखावें ! दिल से कुहू कुहू की टेर लगावें !! सब का मन ही अति हुलसाया !  रिमझिम रिमझिम सावन आया !! यारो झूमें विटप करें अठखेली ! मिल के झूला झूलें सखी सहेली !! यारो तन भी भीगा मन भी भीगा ! गाये कोकिल भी भजन सुरीला !! अब कृषकों का मन भी इठलाया ! रिमझिम रिमझिम सावन आया !!

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#Tewari by Ramesh Raj

| लोक- शैली ‘रसिया’ पर आधारित तेवरी || ..……………………………………… पूँजीवादी चैंटे, कुछ दिन खुश हो लें करकैंटे जनवादी चिन्तन की

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