#Prem Prakash

“मैं जानती हूं मैं क्या हूं” हवा हूं पानी हूं प्रकृति हूं धरती हूं आकाश हूं पाताल हूं मुझे मालूम

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#Kavita By Sunil Gupta

“धूप-छाँव” “धूप-छाँव आँगन खेले, कोमल कलियाँ पावक झेले। घर-आँगन में बच्चे सब, मस्ती संग खेल-खेले।। समस्या मे बंधे बैठे जो,

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#Kavita By Kirti

हम स्तुति तेरी करते हैं अब मातु पधारो आंगन में, भक्ति -भाव सौहार्द ख़ुशी का, विस्तार करो माँ कण कण

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#Kavita By Prem Prakash

जीवन का आधार है मोहब्बत गुलशन का आधार है मोहब्बत जनमानस की आत्मा है मोहब्बत जंतुओं की एकाग्रता है मोहब्बत

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#Kavita By Gaurav Gupta

बावरा प्रेम ढूढ़ लेती उसकी नज़रें, मेरे अंदर से मुझकों, चूल्हा-चौकें में उलझी, भुला बैठीं हूँ ख़ुदकों, किसे याद था

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#Kavita By Ramesh Raj

राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत एक बालगीत।। बोल बोलते प्यारे हम दुश्मन को अंगारे हम। हर बहरे के कान खुलें भगत

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