kavita by : Neerja Mehta

~~”कलम”~~ मैं कलम हूँ भूत, वर्तमान और भविष्य लिखती हूँ, मैंने ही वेद पुराण उपनिषद लिखे मैंने ही धर्मग्रन्थ लिखे,

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tewari by ramesh raj

“ऊधौ कहियो जाय”(तेवरी शतक) से तेवरी — …………………………………………………………………10. मानस सलगा राजभा नसल नसल ताराज हास न मन में, पीर-सी, गुमसुम

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kavita by Gulzar Singh Yadav

”  ठंडी बड़ी बेदर्दी” ———“””””””””””””””””””””“—— यह ठंडी है  बड़ी बेदर्दी सबको कर देती है वर्दी बच्चे बुढ़े या महिलाएँ किसी

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tewari by ramesh raj

“ऊधौ कहियो जाय”(तेवरी शतक) से तेवरी — …………………………………………………………………9. इस शोषण की मार से कब होंगे आज़ाद? ऊधौ  अत्याचार से कब

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kavita by shambhu nath

दीपो का त्यौहार दिवाली // उपहारों का मान दिवाली // व्यापारी का व्यापार दिवाली // आदर्शो का सम्मान दिवाली //

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tewari by ramesh raj

“ऊधौ कहियो जाय”(तेवरी शतक) से तेवरी — …………………………………………………………………8. चूल्हा सजे न आजकल, कुछ भी पके न आजकल, ऊधौ कहियो जाय।

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