#Kavita by shivanand singh shayogi

पोंछेवाली धूल-धूसरित टुटियल चप्पल हाथ उठाये रोनी सूरत भीगीं आँखें मुँह लटकाये कोण बनाती पैदल चलती पोंछेवाली फटही साड़ी गंदेपन

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#Kavita by shyam snehi

ये बताता रहा है बजट देश प्रदेश का हलकान परेशान किसान बूढ़ा खूसट और जवान कितना खायेंगे कितना खिलाएंगे औ’

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#Kavita by d p s chauhan

नक्सलवाद की समस्या पर नक्सलवादियों और सरकार के समक्ष एक निवेदन करती कविता हिंसा से हिंसा उगती है ,ये बात

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