kavita by Gulzar Singh Yadav

….   वह  ” माँ ”  कहलाती ———–“”””””———- ( यह कविता मेरी माँ – स्मृति शेष – “विमला देवी ” को सादर हृदय से  समर्पित है☆ ) नाजों से पालती , झूलों में झूलाती गले से लगाती ,  फूलों  में  सूलाती वह ममता में , सब सूधबुध खोकर खुद जमीं में सोती, सीने में सुलाती •••••••••••••• वह  “माँ” कहलाती ।। मुँह से निवाला बना, बचपन में खिलाती सारी रातें जागकर, जो खुद उसे सुलाती अपने लाल-दुलार…

Share This
"kavita by Gulzar Singh Yadav"

prtiyogita kavita by ashok snehi

………,बेटियाँ…….. तूने भले ही गोद से सूरज को उगाया पर वक्त पर तो काम आई चाँद की छाया जो पत्थरों में प्रेम के अंकुर को उगा दे खुद भीग कर भी गैर के सिर छाता लगा दे यह बेटियों को वंशगत उपहार है माँ  का करुणा सृजन शालीनता श्रृंगार है माँ का ……….नाम बडा है नामी से…….. हरी घास पर नाम तुम्हारा लिखते हैं हम तुमसे जंगल में जाकर मिलते हैं अँधकार में जब जग…

Share This
"prtiyogita kavita by ashok snehi"

kavita by Shiva Kumar Pandit

वनवासी ———– रात बीती सुबह हुई नये सफर की चहल हुई सदियों के तिमिरवन से मुक्ति हेतु पहल हुई आजादी तो कहने को है संस्कारों में कब छूट मिली रीतियों मे संग होने में अपमानों की चोट मिली नगर शहर से विलग रहे पर्वत-वन  में पड़े रहे न आकांक्षा न ईर्ष्या द्वेष प्रेम ही प्रेम से भरे रहे उन्नति और विकास में अधुनातन के अहसास में उनका भी योगदान रहा भारत का सम्मान रहा

Share This
"kavita by Shiva Kumar Pandit"

kavita by jai rathiya

–       =- छतीसगढ़ छतीसगढ़ हमर बसेरा , ये ल कहीथे धान कटोरा , दया धरम के हावे जोईहा , मया दुलार  के भरे भंडर , नदीया नरवा डबरी तरिया , हावे सबो के पयास  बुझइया, छत्तीसगढ  हमर बसेरा, रहीथे सब जुजुर्माना मिमिल के, करथे सबो धरम के आदर, छत्त्तीसगढीय सबो ले नाता जोरे, छत्तीसगढीय सबले बढिया कहाथे।।

Share This
"kavita by jai rathiya"

tewari by ramesh raj

|| लम्बी तेवरी-तेवर पच्चीसी  || ………………………………………. चीनी है पैंतीस तौ सौ से ऊपर  दाल अब है महँगाई कौ दौर, करैगौ कैसे लाँगुरिया । 1 और बढ़ै सिर पर चढ़ै बड़ी निगौडी भूख जाकौ सुरसा जैसौ  पेट भरैगौ कैसे लाँगुरिया । 2 तेरे खेतन में बढ़ौ भारी खरपतवार बता तू बिन खुर्पी के खेत नरैगौ कैसे लाँगुरिया । 3 बंजर पै बिल्डिंग बनीं दगरे दीखें मैंड़ बछरा अब जंगल में घास चरैगौ कैसे लाँगुरिया ।4 पुलिस-सुरक्षा…

Share This
"tewari by ramesh raj"

kavita by mithilesh rai ‘ mahadev ‘

–          – रहने लगा हूँ! तेरे बगैर तन्हा अब मैं रहने लगा हूँ! अपने गम को खामोश सा मैं सहने लगा हूँ! जब होती है शाँम-ए-गम मेरे ख्यालों की, अश्क बनकर पलकों से मैं बहने लगा हूँ!

Share This
"kavita by mithilesh rai ‘ mahadev ‘"

kavita by Sunil Rana

: दादरी हत्याकाण्ड  पर – धर्म के सभी ठेकेदारों को सप्रेम समर्पित ये कैसी बस्ती है ? ********************** हिन्दू भी हैं , मुस्लिम भी हैं हैं सिख भी और ईसाई भी ये कैसी बस्ती है जहाँ इंसान नहीं बस्ते ऐसे लोगों के दिलों मे तो भगवान नही बस्ते I लड़ते हैं धर्म के नाम पर लहू बहाते हैं मज़्लूमों और मासूमों की लाशें भी गिराते हैं रोते हैं और रूलाते हैं नादान नहीं हँसते ऐसे…

Share This
"kavita by Sunil Rana"

kavita by Nishant Sandilya

“बोल माटी की” लोगों ने उठती मिट्टी कह फिर मुझे उढ़ा दिया लहराती फसलो ने उन्हें मेरी औकात पढ़ा दिया जिसकी कीमत लगाई निशांत लोगो ने कौडियों के भाव बनाकर इमारात उस पर मैने अपनी माटी का भाव चढ़ा दिया क्या देखता है आज मुझको यूं बार बार नजारे झुका कर देख कैसे मैंने तेरा गुरुर कुछ  पल मे मिटा दिया इमारत बनाकर मैं आज भी डब डब आंखो से रोती हूँ किसानो के अरमानो…

Share This
"kavita by Nishant Sandilya"

kavita by Dharambir Dhull

योगचंद ने अपनी पत्नी का कदापि सम्मान नहीं किया,कलह को मन में बसाकर उसकी आयु छोटी होती गई और जल्दी ही चल बसी।उसके जाने के बाद योगचंद को उसकी… ** मानवी              ** जीवन बिखर गया मेरा तुम्हें समझ नहीं सका सदा चित उखडा मेरा निष्ठा तुम्हारी जान नहीं सका चूल्हें तक सीमित तुम्हें मात्र तवा समझा बर्तन धोती नव सृजन ज्योति सुगोद को यंत्र समझा तुम नहीं रही लौट…

Share This
"kavita by Dharambir Dhull"

kavita by Sagar Sameep

चली जा दूर कहीं तू जा, मुहोब्बत अब नज़र ना आ.. न अब कोई मुलाकातें न अब कोई प्यार की बातें न अब आवाज गूंजेगी सिसकती सांसों को छूकर न होंगे फिर से वो वादे सर्द पूनम की रातों में न टूटेंगे आज के बाद वफाओं के भरे प्याले सम्भल तू छोड़ नादानी और तू करीब अब ना आ मेरी परछाईयों से भी मुहोब्बत दूर अब तू जा मेरी यादों की महफ़िल में खनक पायल…

Share This
"kavita by Sagar Sameep"

kavita by mithilesh rai ‘ mahadev ‘

–                   -: सहारा हर कश्ती को मौजों का किनारा नहीं मिलता! हर शक्स को जमाने में हमारा नहीं मिलता! हम करते हैं आजमाईशें उम्र भर मगर, हर ख्वाब को नसीब का सहारा नहीं मिलता!

Share This
"kavita by mithilesh rai ‘ mahadev ‘"

kavita by dr. koushal kishore

                                                                  अवरोध                                                                                                                                                  …

Share This
"kavita by dr. koushal kishore"

kavita by neeloo neelpari

हम पैंतीस साला औरतें ============= थोड़ी हठीली, सजीली, थोड़ी शर्मीली हरपल ऊँची उड़ान के ख्वाब सहेजती सजती, संवरती, दर्पण छवि निहारती अपने ही अक्स पर खुद ही वो रीझती कभी रूठती, चिल्लाती, कभी चरमराती मिल जाएंगी, हम पैंतीस साला औरतें रातभर निशाचर बनी, कभी झपकी लेती लैपटॉप पर ऑफिसवर्क से माथा मारती मुर्गे की बांग का कभी न इंतज़ार करती चारों बर्नर पर दाल, सब्ज़ी, दूध, रोटी थोड़ा सा प्यार, थोड़ा खीज मिला पकाती हर…

Share This
"kavita by neeloo neelpari"

kavita by Neerja Mehta

~~”रहगुज़र”~~ बीत गया ज़माना जब मिले थे कभी किसी रहगुज़र पे पर आज भी उस याद की कसक मेरे दिल की रहगुज़र पर ठहरी हुई है आज भी मैं उन्हीं क़दमों के निशान को बेतहाशा तलाशती फिर रही हूँ। आज तुम्हारी रहगुज़र पर कदम रखते ही अतीत के मुरझाये फूल विकसित हो गए, मेरी बेबसी के पल, आँखों की उदासी, डूबता दिल, अन्धकार भरी रातें, चाँदनी में नहा गयीं। जानते हो क्यों? तुम्हारे आने की…

Share This
"kavita by Neerja Mehta"

kavita by Rekha Joshi

बस यही इक पल आगोश अपने में ले रही मौत हर पल अब जो है पल मिट रहा जा चुका वह काल में आ रहा फिर नव पल तैयार है मिटने को वह पल पल पल मिट रही यह ज़िंदगी है जो अपना बस यही इक पल कर ले पूरी सभी चाहते बस इसी में इक पल संवार सकता है जीवन बस यही इक पल

Share This
"kavita by Rekha Joshi"

KAVITA BY CHANDAN MUKHERJEE

–         – पाप में डिस्काउंट बहुत से पाप-पुन्य कर लेने के बाद मुझे ले गए खेंच के एकदिन यमराज मैं लाचार सा संग उनके चला जा रहा था पहुँचा ऊपर तो सामने चित्रगुप्त बैठा था मेरे कर्म के बही-खाते को टटोल रहा था बड़ी-बड़ी आँखें थी उसकी मूछों पे ताव दे रहा था जोड़ा घटाया फिर जोड़ा फिर घटाया यमराज को कान में कुछ फुसफुसा के बताया यमराज ने भी हाँ…

Share This
"KAVITA BY CHANDAN MUKHERJEE"

tewari by ramesh raj

[  लम्बी तेवरी-तेवर चालीसा  ] ……………………………………………………. +घोटाले मंत्री को प्यारे, लिपट पेड़ से बेल निहाल छिनरे सुन्दर नारि ताकते खडे़ हुए हैं बम भोले। 1 +अज्ञानी को मद भाता है, भला लगे मछली को ताल गुड़ है जहाँ वहाँ पर चीटें लगे हुए है बम भोले। 2 +थाने-हवालात कारा को गुण्डे समझ रहे ससुराल बच्चे कार्टून फिल्मों में रमे हुए हैं बम भोले। 3 +मोबाइल में ब्लू फिल्मों की चिप डाले नेता का लाल जिसे…

Share This
"tewari by ramesh raj"

kavita by Gulzar Singh Yadav

—–” ढूँढेगी जमीं और ये आसमाँ ” गर सागर की रेत पर वो छोड़ चलें निशान या शबनम की सेज पर छोड़ चले पहचान तो गुलों की सेज से गुलाबों के सफर तक ढूँढेगी उसे ये जमीं और ढूँढेगा ये आसमाँ लिख चलें थे हम कुछ एक नयी कहानियाँ पर मिटा दियेआज वही,सब वो निशानियाँ अब सागर की रेत पर छोड़ चलें वो निशान ढूँढेगी उसे ये जमीन और ढूँढेगा आसमान

Share This
"kavita by Gulzar Singh Yadav"

kavita by BRAHMA DEV SHARMA

आधार छंद – बिहारी वाचिक मापनी – 221 1221 1221 122 समांत – आओ , पदांत – अपदांत। आज़ाद परिंदों सी’ उड़ानों को’ सजाओ | पाताल छुओ नील गगन चूम दिखाओ || हर बार यहाँ आप निशाने में’  रहे  हैं  | अब चील व बाजों से’ निगाहों को’ मिलाओ || बदमाश यहाँ रोज बड़ी घात करें तो | उनके विरुद्ध जोर की’ आवाज़ उठाओ || चालाक बड़े, दंभ भरी बात बनाते | कंधे जो’ चढ़े…

Share This
"kavita by BRAHMA DEV SHARMA"

kavita by murtaza shagird

–              -: meri parchai mere sath… Meri parchai mere sath nahi rehti hai …. ek muddat ke baad door khadi rehti hai …. Meri sifat – mere wujood ki khatir ….. mere baba ki aankh bhari rehti hai ….. Mujhe thokar lage yeh bhi mumkin nahi …. baap ke Dil ki zami malmal si bani rehti hai ….. Mujhko unchai pe dekh kar aksar duniya …. kehti hai MAA…

Share This
"kavita by murtaza shagird"

geet by surendr kumar singh chance

हंसते हुए चेहरे पर मायूसी का पहरा है बदले हुए मौसम की कोई तो वजह होगी। निकला था सवेरे वो उम्मीद से मंजिल को अब तक नही लौटा घर कोई तो वजह होगी आकाश में सूरज की चर्चा है बहुत लेकिन दिखता ही नही कुछ भी कोई तो वजह होगी अनजान परिंदों की अनजान सी बोली से घबराता बहुत दिल है कोई तो वजह होगी खत उसने लिखे होंगे उसकी तो ये आदत है अब…

Share This
"geet by surendr kumar singh chance"

kavita by Mithilesh Rai ( Mahadev )

सोचकर तुमको : सुबह होती है मेरी सोचकर तुमको! साँस चलती है मेरी सोचकर तुमको! चादरें रश्म की दीवार हैं दरमियाँ लेकिन, आरजू जिंदा है अभी मेरी सोचकर तुमको!

Share This
"kavita by Mithilesh Rai ( Mahadev )"

kavita by Dhrarambir Dhull

‘दिल जले’ मनुज,सौन्दर्य की मूर्ति अदभूत मन स्फूर्ति सर्वोतम प्राणी सी स्तुति तदापि मनोविकार बहुत फले सदा दिल जले बाड को खाते रखवाले रिस्ते अनेक साध रखे पशु,खग जग से अनोखे देव देवी रूप बना रखे दोहरे मापंदड पोषित करते सर, निषाद उभरते पल पल जीवन के अखरते कंही जानवर को पूजते कंही रक्त उसका,सोखते दुषित मन,अपयश घोलते कत्लेआम संहार करते दैत्य कृत्य सा आगाज भरते तोष पोष दिखें बिखरते पशु मास भक्षण करता   …

Share This
"kavita by Dhrarambir Dhull"