#Kavita by Ranjan Mishra

काव्यरंजन  –  कृष्णऔर_धृतराष्ट्र मैं पाण्डव का शांतिदूत है युद्ध नहीँ चाहत मेरी मैं निरा-प्रेम प्रस्तावक हू है बुद्धि नहीँ दाहक

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