#Kavita by Sanjay Verma

प्रदूषण के गुबार भौरे की निंद्रास्थली होती बंद कमल में उठाती  सूरज की पहली किरण  देती दस्तक खुल जाती आँखों  की तरह पंखुड़ियाँ कमल की गुंजन से करते स्वागत खिले फूलों का मुग्ध समर्पित हो फूल देते दानी की तरह किट -पतंगों को मकरंद भोरें कृष्ण की राधा के लिए कभी बन जाते थे संदेश वाहक मूछों पर मकरंद लिए कृष्ण की माला का बालों में सजे राधा के फूलों में बैठ बतियाते गुंजन से- कृष्ण…

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"#Kavita by Sanjay Verma"

#Kavita by Sanjeev Kumar Singh

…….यादें…… किस क़दर तुमने यादों को मिटाया होगा…. याद है मुझको तेरी हर वो बात, जो तुमने कभी सुनाया था, कहते कहते अश्क़ आँखों में उतर आया था। वो एक एक बूंद तुम्हारी पलकों से जब, हमने उँगलियों पे अपनी उठाया था, दर्द सब तुम्हारा मेरे सीने में उतर आया था। किस कदर तुमने यादों को मिटाया होगा। वो आखिरी मुलाक़ात का मंज़र भी अजीब था दूर तक हाँथ तुम्हारा थामे चला था, फिर गाड़ी…

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"#Kavita by Sanjeev Kumar Singh"

#Kavita by Kavi Alok Pandey

” वह ” ** वह हर दिन आता सोचता बडबडाता,घबडाता कभी मस्त होकर प्रफुल्लता, कोमलता से सुमधुर गाता… न भूख से ही आकुल न ही दुःख से व्याकुल महान वैचारक धैर्य का परिचायक विकट संवेदनाएँ गंभीर विडंबनाएँ कुछ सूझते ध्यान में पद, संभलता, बढाता पग ! होकर एक दिन विस्मित् किछ दया दूँ अकिंचित् इससे पहले ही सोचकर… कहा, जाने क्या संभलकर लुटती, टुटती ह्रदय दीनों की नष्ट होती स्वत्व संपदा सारी मुझे क्या कुछ…

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"#Kavita by Kavi Alok Pandey"

#Kavita by Sushma Dubey

वो लड़की  नए ड्रेस में इठलाती वो सुन्दर नन्ही सी लड़की ! चौराहे पर झूमती गाती भाग भाग कर चलती लड़की ! छोटा फ्रॉक पहनती लड़को के संग खेलती लड़की ! भाई बहनो से झगड़ती लडाकी चतुर सयानी लड़की ! चंचल नटनी सी लगती मटक मटक कर चलती लड़की ! पेड़ो से आम चुराती बेपरवाह सी घूमती लड़की ! दो चोटी मे स्कूल जाती नदी पहाड़ खेलती लड़की ! वो पनघट से पानी लातीं बाबा संग…

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"#Kavita by Sushma Dubey"

#Kavita by Amit kaithwa

चलते रहेंगे हम जब तक है इस देह में दम. मिले कितनी भी पीड़ाए फिर भी चलते रहेंगे हम. लाख रोकोंगे हम सबको ये जमाने वाले. हम तो हैं प्यार में दुनिया को हंसाने वाले. करो ना कोशिश ऐ पैर अड़ाने वाले. जब तक रहेगी जां ये हौसला न होगा कम. चलते रहेंगे हम…… अमन ओ चैन के चिरागो को जलाएंगे हम. आपस की जलन को भी बुझाएंगे हम . मोहब्बत के चरागो को हवाए…

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"#Kavita by Amit kaithwa"

#Kavita by Shambhu Nath

पात्र बेचारे भूखे सोते है अपात्र डकारे लेते है ॥ अपने सारे हितैषी को ॥ प्रधान भी सुविधा देते है ॥ जांच करा के देख सकते हो ॥ हर गाँव में पाये जायेगे ॥ गरीबी रेखा के नीचे यूं  ॥ बहुत लोग नहीं आयेगे ॥ बी पी एल कार्ड बना है उनका ॥ साहब के वही चहेते है ॥ अपने सारे हितैषी को ॥ प्रधान भी सुविधा देते है ॥ हाफ सेंचुरी पार नहीं है…

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"#Kavita by Shambhu Nath"

#Kavita by Kashan Iqbal Pahlwan

मुहब्बत काँच का सौदा.. मुहब्बत आग का दरिया..   मुहब्बत जून जैसी है.. मुहब्बत बर्फ का गोला..   मुहब्बत रात काली है.. मुहब्बत नीला मौसम है..   मुहब्बत कच्चा आँगन है.. मुहब्बत तितलियों का घर..!!   मगर फिर भी, मुहब्बत काँच का सौदा..!!   किसी नामालूम बस्ती से.. किसी अनजान हस्ती से.. किसी कागज की कश्ती से..   किसी खिड़की के मंजर से.. किसी पत्थर के खंजर से..   किसी धुंधली सी हसरत से.. किसी बेदर्द किस्मत से..??   किसी झूठी तसल्ली से…   मुहब्बत हो ही जाती है….!!! मुहब्बत…

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"#Kavita by Kashan Iqbal Pahlwan"

#Kavita by Kumari Archana

” ओ मेरे प्रियतम प्यारे”   ओ मेरे प्रियतम प्यारे समर्पण है तुझपर अब मैं अर्पण हूँ !   मैं चाहती हूँ कि तुम हर- पल,पल- पल तुम मेरे पास रहो इसलिए तुम फूल बनो जाओ मैं मालिन ! तुम फसाल बन जाओ मैं किसानी ! तुम मालिक बन जाओ मैं दासिन ! तुम घर बन जाओ मैं पहरेदारिन ! तुम भगवान बन जाओ मैं भक्तिन तुम शरीर बन जाओ मैं आत्मा ! कुमारी अर्चना

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#Kavita by Surendra Kumar Singh Chance

कभी मन नही करता क्या?   कभी मन नही करता क्या साथ बैठे कहीं भी भागती हुयी भीड़ के रास्ते में डाल दें बाहें एक दूसरे के गले में आँखे हों आँख में और बातेँ करते रहें भीड़ में खामोश जैसे भीड़ छंटने के बाद की ख़ामोशी और डूब जायें एक दूसरे की आँख में और उत्तर जाएं भीतर और भीतर जहां परमात्मा अपनी रचनाओं की खूबसूरत सी मूर्ति लिए एकटक निहार रहे हों उसे…

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"#Kavita by Surendra Kumar Singh Chance"

#Kavita by Rifat Shaheen

बहुत अच्छे लगे हो तुम मैं ये इक़रार करती हूँ तुम्हारा दिल नही देखा न कुछ परखा,न कुछ जाना मगर अच्छे लगे हो तुम तेरी प्यारी सी सूरत ने मुझे दीवाना कर डाला तुम्हारी उँगलियों के लम्स की चाहत भी है मुझको तुम्हारे लब मुझे चूमें ये हसरत भी ,है अब मुझको मैं ये भी चाहती हूँ तुम मुझे बाँहों में यूँ भर लो के मेरी साँस रुक जाए मेरी पलकें भी झुक जाएँ बहुत…

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"#Kavita by Rifat Shaheen"

#Kavita by Akash Khangar

ताबीज न कुछ कर पाया न दुआ ही रंग लायी जब चली गलतफेहमियो की हवा मेरा घर तबाह कर आयी   कितने सपने संजोये थे कितने मढ़के पिरोये थे एक पल में बिखर गया सब जो वक़्त ने ली अंगड़ाई   खुशबुओं का सौदागर था वो कलमे गुलाब की लगाता था पत्ता पत्ता झड़ गया जब रुत पतझड़ की आयी   आज यकायक ही धड़क गयी धड़कन अचानक ही सिहर उठा मेरा मन ये यूँ…

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"#Kavita by Akash Khangar"

#Kavita by Jyoti Mishra

घरौंदा     बचपन में बनाया करते थे हमसब सपनों  का घरौंदा … मिट्टी की खुश्बू से तर भावनाओं से महकता सोंधा -सोंधा…. निश्छल, निर्मल प्यार की अटूट दीवारें सबको  छाया देने वाली छत .. ओसारा…ऑगन अपनेपन से ओत -प्रोत कोना -कोना …. कच्चा …अधपक्का सा पर कितना सादा …सुन्दर सच्चा सा …. दादा -दादी, चाचा -चाची बुआ ..दीदी , भईया सबके लिए होती थी जगह सबके बच्चे  लाड़ले जैसे कृष्ण कन्हैया …. घर  -ऑगन…

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"#Kavita by Jyoti Mishra"

#Kavita by Alok Shrivas

कश्मीर में सेना का अपमान करने वालों की भर्त्सना करती मेरी कविता । ********************     बस यही रह गया है बाकी , घुसें , लातें  खाने  को। शर्म नहीं बचा है तुममे, और क्या रहा दिखाने को।।     जिस सेना ने जाँ पे खेल, खतरों से तुझे बचाया है। उस सेना के जज़्बातों को, तूने  ठेस  पहुँचाया  है ।।     लोकतंत्र ने संविधान की, पहलु में मुँह छिपाई है। धारा तीन सौ…

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"#Kavita by Alok Shrivas"

#Kavita by Vivek Prajapati ,Kashipur

कश्मीर में कुछ सैनिकों के साथ कुछ देशद्रोहियों द्वारा निंदनीय व्यवहार करने पर विरोध प्रकट करती मेरी ये कविता-   आज कलम कैसे पकड़ूँ जब आँखों में अंगार भरे आज लिखूँ कैसे जब मेरा शब्द शब्द हुंकार भरे।   आज धधकती ज्वाल हृदय में जीना व्यर्थ हुआ जाता केसर की घाटी में क्योंकर नित्य अनर्थ हुआ जाता।   आज वहाँ अपनी सेना के कुछ जवान पर वार हुआ ऐसा लगता है जैसे अब संविधान पर…

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"#Kavita by Vivek Prajapati ,Kashipur"

#Kavita by Ajeet Singh Avdan

संकल्प { बाल-गीत } ~~~~ हम बच्चों ने ठान लिया हम वृक्ष लगाएँगे । अपनी प्यारी धरती पर हरियाली लाएँगे ।।   हरी-भरी रहे वशुन्धरा यह अपना नारा , प्राण-वायु की कमी न हो संकल्प हमारा । जन-जीवन के मूल-भूत आधार बचाएँगे, अपनी प्यारी धरती पर हरियाली लाएँगे ।।   हिन्द-चमन से मुँह मोड़ेगी शीतलता जो, अपने पेड़ों से कह देंगे जल बरसा लो । छाएँगे घनघोर जलद जल बरसाएँगे, अपनी प्यारी धरती पर हरियाली…

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"#Kavita by Ajeet Singh Avdan"

#Kavita by Sanjay Ashk Balaghati

जिन घरो मे साजिशे हुआ करती है मेरे नाम की वहा की लडकिया तारीफ किया करती है मेरे काम की।   हक की लडाई को बगावत का नाम देने वालो देखना एक दिन मेरी आवाज बनेगी अवाम की।   लुटकर गरीबो के घर,छिनकर बेबसो के निवाले मौज करोगे कब तक,पुरेगी दौलत कब तक हराम की।   तुम भी मेरी राह चलोगे मेरी राह मे बारूध रखने वालो जब लुटेगा ,लुटेरा कमाई तुम्हारे मेहनत घाम की।…

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"#Kavita by Sanjay Ashk Balaghati"

#Kavita by Gayaprasad Mourya , Rajat

दो घनाक्षरी भारतीय खून कुलभूषण हमारा वीर, कर षणयंत्र तूने जाल में फंसा दिया। भारतीय शौर्य का न भान तुझे कुछ रहा, जासूसी का ठप्पा मेरे वीर पै लगा दिया। बार बार करता है थोथी थोथी बातें पाक, कई बार ताला तेरे मुँह पै लगा दिया। ढूंढता फिरेगा तुझे ठौर ना मिलेगा कहीं, एक बार सेना को जो पाक में पठा दिया। 2-🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲 एक भी खरोंच यदि उसके वदन आई, चीर देंगे सीना तेरा तुझको…

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"#Kavita by Gayaprasad Mourya , Rajat"

#Kavita by Nirdosh Kumar

[मरदूद……]       ऐ मरदूद !यूं आंखें ना दिखा गोटी खेलना हमें आता है ऊंह !धुंध को और धुंआ ना दिखा राख बनाना हमको आता है फीके रंग को और गाढा ना दिखा लहु से होली खेलना हमें आता है        निर्दोष कुमार        

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"#Kavita by Nirdosh Kumar"

#Kavita by Uma Mehata Trivedi

    ‘एक पूर्ण विराम…।‘ तुम्हारें अक्षरों के हर अक्षर में,  अनेक स्वर-व्यंजन गुम हें..  तुम्हारें शब्द तुम से हीं खामोश,  वहीं तो…,  पता नहीं तुम्हें…?  अब हमझ जाती हूँ..  अनकही,अनबुझी ओर अनजानी-सी..  अक्सर लिख जाती…  असंख्य कोरे-कोरे कागजों को,  नीले रंगों से रंगती रहती हूँ…  पता है तुम्हें…?  कुछ-कुछ रह जाता,  वो रंग बिखरा-सा..  सोच जिसे मुस्कुराती हूँ..  चुन-चुनकर समेटना चाहती हूँ..  हजारों रंगीन धागों में  अपार स्नेह रूप में पिरोकर  शब्द-साधना में जोड़कर…  तारों…

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"#Kavita by Uma Mehata Trivedi"

#Kavita by Sanjay Ashk Balaghati

देखकर हमको दुश्मन हमारे सून्न है चारो दिशाओ मे हमारे दहाड की गुंज है। दुश्मन रचकर साजिश मना रहा खैर है, हमे डर कैसा साथियो हम तो भीम के शेर है। … जब जब दुश्मन इंसानियत के बिगडेंगे हम और हौसला लिये मंजिल पर बडेंगे। चलते चलेंगे आगे आम्बेडकर के हम पैर है, हमे डर कैसा साथियो……!!! …. उठेगी जो राह मे तोड देंगे हम हर वो दीवारे तुफानो मे लगाते है हम कश्तियो को…

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"#Kavita by Sanjay Ashk Balaghati"

#Kavita by Vishal Narayan

-” बोलो विधाता …”–   माना कि बहुत विधाता हो सम्पूर्ण ब्रहाण्ड के निर्माता हो पर क्या मिला तुमको एक बालक को बेघर कर के बोलो विधाता मैं रोउं किसके कंधे सर कर के….   जैसे सारे धरती पर आते हैं मैं भी धरती पर आया था पर तुम्हीं बताओ मुझको संग में पाप कौन से लाया था कहने को मैं जिंदा हूं पर जीता हूं रोज मर मर के बोलो विधाता मैं रोउं किसके…

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"#Kavita by Vishal Narayan"

#Kavita by Kishor Chhipeshwar Sagar

आदत सी हो जाती है…… ——————————– इस भरी दुनिया में किसी से चाहत तो किसी से अदावत सी हो जाती है किसी से बेइंतेहा मोहब्बत तो किसी से बगावत सी हो जाती है रहना है इस दुनिया में तो ये सब तो फिर आदत सी हो जाती है” –किशोर छिपेश्वर”सागर” भटेरा चौकी बालाघाट जिला बालाघाट(म.प्र.) 9584317447

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"#Kavita by Kishor Chhipeshwar Sagar"

#Kavita by Vivek Prajapati ,Kashipur

लगा माँ भारती के भाल पर उस दाग वाला दिन रुलाने आ गया फिर आज जलियाँ बाग वाला दिन।   ग़ुलामी की तड़प से लोग दो दो हाथ करने को इकट्ठे हो रहे थे देशहित की बात करने को। निभाने चल पड़े थे जो किया बेख़ौफ़ वादा था नहीं लेकिन किसी की जान लेने का इरादा था। वहाँ पर औरतें थी और थे बच्चे व बूढ़े भी वहाँ परिवार भी थे साथ पर कुछ थे…

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"#Kavita by Vivek Prajapati ,Kashipur"

#Kavita by Alok Shirivas

” कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान द्वारा फांसी की सजा दिए जाने पर मेरा आक्रोश ” ******************   पाकिस्तानी चेहरे पर एक, नया मुख़ौटा आया है। एक हिंदुस्तानी को उसने, फिर जासूस बताया है ।।     कर के कपट उसने फिर एक, नया  शगूफा छोड़ा है। अपनी समझ में उसने अपने, एटम बम को फोड़ा है।।     छल, छद्म और धोखे से, उसने मासूम फंसाया है। सजा – ए – मौत झूठ की, बुनियाद…

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"#Kavita by Alok Shirivas"