#Kavita by Ram Shukla

बाबा बर्फानी के भक्तों का क्या जीवन लौटा पाओगे बोलो अब दिल्ली के दरबारों अब क्या निन्दा रस बरसाओगे या

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#Kavita by Ved Pal Singh

दहशतगर्दों की रूहें …………… काबिले बददुआ हैं वे सभी जमींदोज़ रूहें, जिन्होंने जीते जी गलत काम किया था। कबीलों की

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