#Lekh by Dr. Mrs. Tara Singh

भगीरथ   गंगा के साथ अनेक पौराणिक कथाएँ जुड़ी हुई हैं, इनमें राजा सगर की कथा और मिथकों के अनुसार ब्रह्मा ने विष्णु के पैर के पसीनों की बूँदों से गंगा की जन्म-कथा, तथा अन्य कथाएँ भी हैं । महाभारत के अनुसार भगीरथ ,अंशुमान के पौत्र तथा दिलीप के पुत्र थे । उन्होंने सौ अश्वमेध यग्य करवाये; उनके महान यग्य में इन्द्र सोमपान कर मदमस्त हो गये थे । भगीरथ ने गंगाघाट के दोनों किनारों…

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#Lekh by Nitish Kumar Rajput

लेख- हल्के होते मंच   मुझे आज भी याद आते हैं वे दिन जब हमारे शहर में कवि सम्मेलन और मुशायरा होता था । कवियों को सुनने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती थी क्योंकि उस समय मंचों की एक गरीमा होती थी । कविगण भी साहित्य तथा देश को समर्पित होते थे । उनकी रचनाओं में सच्चाई तथा सादगी झलकती थी । जब वे मंच पर आते थे तो तालियों की गड़गड़ाहट से…

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#Lekh by Dr. Mrs. Tara Singh

आनंद **   सुख से अनंत गुना एवं उससे भी परे की सर्वोच्च अवस्था, आनंद है । यह किसी बाहरी उत्तेजना से संबंधित नहीं है, बल्कि आनंद आत्मा से संबंधित एक अनुभूति है , हमारे विचार का एक भाग है, जो हमारी भावनाओं से जुड़ा होता है । यही कारण है, आनंद , मन को मिलने वाले सुख की तुलना में उच्चस्तरीय एवं अधिक सुख का अनुभव देता है । जब हम आत्मा से आनंद…

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Lekh by Masneesh ( Mannu ) Bhatt

आदत से मजबूर हम सभी को शायद ये लगे कि समाज बुरा और बुरा होता जा रहा है पर यकीन मानिये बस ये बात तो बेवजह मान लेने वाली है, मैंने एक दुनियाँ देखी है शायद आपने भी आपके आस पास इसे देखा हो। ये भी सम्भव है कि आप खुद इसका हिस्सा होकर भी इसे नकार रहे हो शायद मैं भी ऐसा ही कुछ कर रहा हूँ। मैं एक काल्पनिक दुनिया की बात करता…

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Vyang by M M Chandra

नागनाथ सांपनाथ का चुनावी उत्सव: लेखक – एम. एम. चन्द्रा (व्यंग्य ) …………………………………………….. गजब ये है कि अपनी मौत की आहट नहीं सुनते, वो सबके सब परीशां हैं, वहां पर क्या हुआ होगा। दुष्यंत कुमार की यह ग़ज़ल कोयल एक पेड़ पर बैठी गा रही है . तभी अचानक उस पेड़ के नीचे पड़ा सड़ा आधा जमीं में धंसा बाहर फन निकले एक नागनाथ ने आवाज लगाई. बस करअब तो अपनी हार मान ले. हम चुनाव…

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"Vyang by M M Chandra"

Lekh by dr arvind Jain

पद ,पैसा ,प्रतिष्ठा और पुरुस्कार —- भाई मुरारी की उम्र चालीस साल की कब होगयी उन्हें पता तक नहीं चला .कारण वेचारे को पच्चीस साल लग गए बी,ए.की डिग्री लेने में. उसके बाद पढाई पढाई करते समय आराम प्रेमी होने से अधिक आराम में उनका विश्वास. उनका विश्वास हैं की मनुष्य को आराम मौलिक आधार के साथ मिलना चाहिए. चाहे हम पढ़े या नौकरी करे या व्यापार . तभी तो उनको पच्चीस साल लग गए…

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#Lekh by Sushil M Vyas

कुतुबुद्दीन की मौत   इतिहास की किताबो में लिखा है कि उसकी मौत पोलो खेलते समय घोड़े से गिरने पर से हुई. ये अफगान / तुर्क लोग “पोलो” नहीं खेलते थे, पोलो खेल अंग्रेजों ने शुरू किया. अफगान / तुर्क लोग बुजकशी खेलते हैं जिसमे एक बकरे को मारकर उसे लेकर घोड़े पर भागते है, जो उसे लेकर मंजिल तक पहुंचता है, वो जीतता है.   कुतबुद्दीन ने अजमेर के विद्रोह को कुचलने के बाद…

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Lekh by Anupama Srivastava ‘Anushri’

‘ ठोको ‘ सोच समझकर ! भाषाई व्याभिचार, अभद्र,  अशिष्ट शब्दों के अतिक्रमण से ,  भाषा की अस्मिता के साथ दुर्व्यवहार।   आजकल हर जगह , हर मंच पर  , हर जगह  भाषा  की गरिमा , उत्कृष्टता के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और बताया जाता है कि हम  “ज़रा हट कर  “हैँ !   जरा हटकर के फंडे को अपनाने वाले लोग समझते हैं कि हम इस प्रतिद्वंदिता के युग में तभी टिक  सकते हैं,…

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#Lekh सामाजिक प्रतिबद्धताओं से सजा व्यंग्य संग्रह: शोरूम में जननायक समीक्षक: एम. एम. चन्द्रा

अनूप मणि त्रिपाठी का पहला व्यंग्य संग्रह “शोरूम में जननायक” में लगभग तीन दर्जन व्यंग्य है. व्यंग्य संग्रह में भूमिका नहीं है, सुधी पाठक इससे अंदाज लगा सकते है कि नव लेखन के सामने आने वाली चुनौतियां कम नहीं होती. पुस्तक में भूमिका का न होना एक तरह अच्छा ही हुआ है. अब पाठक अपनी स्वतंत्र सोच से पुस्तक पढ़ने का साहस जुटा सकते हैं. क्योंकि देखा जाता है यदि पुस्तक में किसी बड़े लेखक की भूमिका…

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Lekh by Dr. Arvind Jain

पुनः मूषको भव- एक किवदन्ति सुनी थी की एक गरीब आदमी की इच्छा थी रईस बनने की ,उसने बहुत प्रयास किया पर सफलता नहीं .एक दिन वह निराश होकर आत्म हत्या करने  का सोचा ,उसके शहर में एक आत्म हत्या या ख़ुदकुशी करने का स्थान था .वहाँ बहुत आत्महत्याएं होने के कारण सरकार ने वहां पर एक चार की गार्ड लगा दी थी. वह बेचारा गरीब आत्म हत्या का साहस लेकर चोरी छिपे जा रहा…

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"Lekh by Dr. Arvind Jain"

#Lekh by Kirti Gandhi

राजस्थान में  लोकपर्वके रुप  में गणगौर बड़ी धूमधाम से मनाया  जाता है ।यू तो गणगौर स्त्रियों का त्यौहार है किंतु कमोबेश पूरा परिवार ही इसमें शामिल रहता है। इसमें भगवान शंकर और पार्वती की पूजा ईश्वर और गणगौर के रुप में की जाती है ।होलिका दहन के दूसरे दिन होली की राख एवं मिट्टी मिलाकर 16 पिंडिया बनाई जाती है ।जिन्हें ईश्वर गणगौर मानकर इनकी पूजा की जाती है ।        मान्यता है…

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#Lekh by sanjay verma ‘drushti’

कंडों का होलीदहन: पर्यावरण की पक्ष में कंडे की होली जलाएं ,लाखों गायों का सालभर का खर्च निकल जाएगा । ये कार्य  पर्यावरण के हक़ में एवं  गो सेवा के लिए  पुनीत कार्य होगा ।आज भी कई क्षेत्रों में दाहसंस्कार में कंडों का ही पूर्ण रूप से उपयोग किया जाता है। जो की पर्यावरण व ,लकड़ी के हित  में है  ।  वर्तमान में  मोहल्लों में कई स्थानों पर होलीदहन  किया जाने लगा है ।सुझाव है…

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"#Lekh by sanjay verma ‘drushti’"

Samiksha/Lekh by Dr. Brhmjeet Goutam/Ramesh Raj

विरोध की कविता : “ जै कन्हैयालाल की “ [ प्रथम संस्करण ] + डॉ. ब्रह्मजीत गौतम —————————————————————— ‘ तेवरी ‘ विधा के प्रणेता, कथित विरोधरस के जन्मदाता श्री रमेशराज की लघु कृति ‘ जै कन्हैयालाल की ‘ आज के समाज और समय की विसंगतियों और विद्रूपों का जीवंत दस्तावेज़ है | 105 द्विपदियों से समन्वित इस कृति को कवि ने ‘ लम्बी तेवरी ‘ नाम दिया है | प्रत्येक द्विपदी में एक प्रथक भाव…

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"Samiksha/Lekh by Dr. Brhmjeet Goutam/Ramesh Raj"

#Lekh by Dr. Arvind Jain

अमेरिका  स्वर्ग या नरक —-डॉक्टर अरविन्द जैन भोपाल – ———————————————————————- हर व्यक्ति अपने घर को अपना घर कहता हैं जब तक वह अपने परिवार से न्यारा /अलग न हो जाये. उसके बाद उसे अपना स्वयं का घर, घर लगता हैं और जहाँ से अलग हो जाता हैं तो वह घर उसे घर जैसा लगता हैं .जैसे बहु को सास कहती हैं कि हमारी बहु ,हमारी लड़की जैसी हैं ,लड़की नहीं .इसी प्रकार home और house  …

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#Lekh Samiksha by Ramesh Raj

डॉ. गोपाल बाबू शर्मा की कविता-यात्रा +रमेशराज ———————————————————————– प्रसिद्ध व्यंग्यकार और जाने-माने कवि डॉ. गोपाल बाबू शर्मा विलक्षण प्रतिभा के धनी हैं। कविता उनके लिए मनोरंजन का एक साधनमात्र नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकारों, शोषित-लाचारों की दुर्दशा, दयनीयता और घृणित व्यवस्था से उत्पन्न अराजकता, विसंगति और असमानता को भी प्रमुखता के साथ अपना विषय बनाकर चलती है। जहां भी जो चीज खलती है, कवि उसके विरुद्ध खड़ा होता है और वसंत या खुशहाली के सपने बोता…

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"#Lekh Samiksha by Ramesh Raj"

#Lekh by Dr.Arvind Jain

सहिष्णुता और अनेकान्तवाद वर्तमान में भारत में शब्दों के बाणों का इतना अधिक  उपयोग हो रहा जिससे आपसी कलह बढ़ रहा हैं कारण कोई किसी की बात को आदर नहीं देता और सब अपनी अपनी बात पर अड़े हैं और सब सही हैं .जैसे आधा गिलास भरा हैं और आधा खाली हैं .पांच अंधे हाथी को छूकर बताते हैं की यह खम्बा जैसा हैं ,कोई कहता पंख जैसा हैं ,कोई कहता रस्सा जैसा हैं .…

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"#Lekh by Dr.Arvind Jain"

#Lekh by Dr. Arvind Jain

हम न सुधरेंगे और न सीखेंगे हम भारतवासी  बहुत अच्छे गुणोंके धारी जीव हैं जंतु नहीं .हमें या हमारे खून में विरोध करने की आदत हैं ,हमको नियम को तोड़ने में मजा आता हैं ,जैसे हम कुछ भी भले के लिए बोले पर पाकिस्तान /चीन को विरोध करना . ऐसे ही हमारे देश में यदि किसी सुधार की बात करे ,कहने या सुनने के पहले विरोध ,समझना नहीं .कारण हमारा खून ख़ास तौर पर अस्सी…

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#Lekh by pankaj prakhar

विद्यार्थी परीक्षाओं से डरें नही बल्कि डटकर मुकाबला करें (लेखक :- पंकज “प्रखर”) प्रिय विद्यार्थीयों जैसा की आप लोग जानते है की कुछ ही दिनों में बोर्ड की वार्षिक परीक्षाएं शुरू होने जा रही है ऐसे में आप लोगों के परीक्षा संबंधी तनाव और परेशानियों को दूर करने के लिए मै कुछ नये सकारात्मक सूत्र आपको देना चाहता हूँ, क्योकि अपने इतने वर्षों के शिक्षण काल में मैंने अनुभव किया है की छात्र अथवा छात्रा…

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"#Lekh by pankaj prakhar"

#Lekh by Ramesh Raj

माना नारी अंततः नारी ही होती है….. किसी भी काव्य-रचना की उपादेयता इस बात में निहित होती है कि उसके प्रति लिये गये निष्कर्ष वैज्ञानिक परीक्षणों पर आधारित हों। वैज्ञानिक परीक्षणों से आशय, उसके कथ्य और शिल्प सम्बन्धी चरित्र को तर्क की कसौटी पर कसना, जांचना, परखना होना चाहिए। उक्त परीक्षण के अभाव में जो भी निष्कर्ष मिलेंगे, वे साहित्य में व्यक्त किये गये मानवीय पक्ष का ऐसा रहस्यवादी गूढ़ दर्शन प्रस्तुत करेंगे जिसमें कबीर…

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#Lekh by Dr. Arvind Jain

क्या  संस्कृति और मर्यादा केवल भाषण और किताबों तक सीमित रह गयी ? यह बात हर युग में उठायी गई थी , हैं और उठायी जाएँगी .वर्तमान सन्दर्भ में इस बात को उठाना आवश्यक हैं या नहीं ? क्या सचमुच हम आधुनिक हो गए ? हम ज्ञानवान हो गए ?हम पूर्ण वैज्ञानिक रूप से विकसित हो गए ?क्या आधुनिक ज्ञान विज्ञानं हमारे सर्वांगीण विकास के लिए पूर्ण हैं ?क्या हमने भौतिक संसाधनों को जुटा कर…

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#Lekh By Ramesh Raj

साहित्य का बुनियादी सरोकार +रमेशराज ————————————————————– किसी भी देश या काल के साहित्य के उद्देश्यों में पीडि़त जनता की पक्षधरता इस बात में निहित होती है कि यदि तत्कालीन सामाजिक व्यवस्था में किसी भी प्रकार की विसंगतियां, कुरीतियां पनप गई है, तो उनके निर्मूलन हेतु साहित्य का प्रयोग एक गाल पर तमाचा खाने के बाद दूसरा गाल करने या प्रेयसी की जांघें सहलाने, प्रकृति-चित्रण करने के बजाय संस्कृति और सभ्यता के तस्करों की मानसिकता पर…

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#Lekh by Arvind Jain

अपसंस्कृति एवम उससे मुक्ति के उपाय आज इस विषय पर बहुत चर्चा हैं कि हम किस दिशा में जा रहे हैं ,युवा वर्ग में भटकाव हैं .दिशाहीन हैं और पश्चिमी सभ्यता ने हमें बहुत नुक्सान पहुचाया हैं .क्या हमें पश्चिमी संस्कृति का अनुपालन करना चाहिए.? क्या भारतीय सभ्यता परिपूर्ण नहीं हैं ? क्या हमारे माता पिता अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन ठीक से नहीं कर रहे हैं ? क्या हमारा परिवेश ,परिजन दिशा से भटक गए…

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"#Lekh by Arvind Jain"

#Lekh By pankaj prakhar

वैलेंटाइन डे युवाओं का एक दिवालियापन प्रेम शब्दों का मोहताज़ नही होता प्रेमी की एक नज़र उसकी एक मुस्कुराहट सब बयां कर देती है, प्रेमी के हृदय को तृप्त करने वाला प्रेम ईश्वर का ही रूप है| एक शेर मुझे याद आता है की…. “बात आँखों की सुनो दिल में उतर जाती है जुबां का क्या है ये कभी भी मुकर जाती है ||” इस शेर के बाद आज के लेख की शुरुआत एक कहानी…

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"#Lekh By pankaj prakhar"

#Lekh by Dr. Arvind Jain

चुनाव आजकल चुनाव का माहौल बहुत गर्म हैं ,वैसे भारत चुनाव प्रधान देश हैं हर बात  में चुनाव होता ही हैं कुछ को छोड़कर , लोकसभा ,विधान सभा ,नगर निगम ,नगर पालिका ,जनपद पंचायत ,ग्राम पंचायत ,सरपंच ,पञ्च ,इसके बाद कई बैंकों के चुनाव और फिर नेता का चुनाव ,प्रतिपक्ष के नेता का चुनाव ,कोई मर गया तो उप चुनाव बहुमत से हार गए तो मध्यावधि चुनाव. ये कुछ नमूने हैं देश के. हां हमें…

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#Lekh By Pankaj Prakhar

राम केवल एक चुनावी मुद्दा नही हमारे आराध्य है (लेखक:- पंकज प्रखर ) राम केवल चुनावी मुद्दा नही बल्कि हमारे आराध्य होने के साथ-साथ हमारे गौरव का प्रतीक है | ये देश जो राम के आदर्शों का साक्षी रहा है ये अयोध्या जहां राम ने अपने जीवन आदर्शों के लिए न केवल कष्ट सहे बल्कि मनुष्यत्व के श्रेष्ठ गुणों को उसके चरम तक पहुँचाया वो राम आज केवल एक चुनावी मुद्दा है जिसे नेता अपनी–अपनी…

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"#Lekh By Pankaj Prakhar"