#Lekh by Ramesh Raj

डॉ. नामवर सिंह की आलोचना के अन्तर्विरोध +रमेशराज ‘‘एक नये सृजनशील कवि के नाते मुक्तिबोध ‘काव्य और जीवन, दोनों ही

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#Samiksha by Avdhesh Kumar Avadh

संस्कार सभ्यता संस्कृति एवं स्वदेशी का सामासिक समन्वय है “वर्णिका”   समीक्षक : अवधेश कुमार ‘अवध’     ‘राष्ट्र बगैर

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#Lekh by Ramesh Raj

डॉ. नगेन्द्र की दृष्टि में कविता +रमेशराज ‘‘कविता क्या है? यह एक जटिल प्रश्न है। अनेक आलोचक यह मानते हैं

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#Lekh by Ramesh Raj

डॉ. नामवर सिंह की आलोचना के प्रपंच +रमेशराज डॉ .नामवर सिंह अपनी पुस्तक ‘कविता के नये प्रतिमान’ में लिखते हैं

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#Lekh by Ramesh Raj

आचार्य शुक्ल की कविता सम्बन्धी मान्यताएं -रमेशराज ‘‘जिस प्रकार आत्मा की मुक्तावस्था ज्ञान-दशा कहलाती है, उसी प्रकार हृदय की यह

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#Lekh by Vishal Shukla

प्रसंगवश हमारा प्यारा लोकतंत्र छोटी संख्या जब बड़ी संख्या पर प्रहार करती है तो समझिए वो नालायको का ही उद्धार

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#Lekh ( Pustak Samiksha) by Subodh Srivastava

पुस्तक समीक्षा: ‘सरहदें’-कवि कलम की चाह लेकर सर हदें-आचार्य संजीव सलिल —————————————————————————————————     मूल्यों के अवमूल्यन, नैतिकता के क्षरण

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Samiksa by Avdhesh Kumar Avadh

पुस्तक समीक्षा : अन्तर्ध्वनि   समीक्षक : अवधेश कुमार ‘अवध’   मनुष्यों में पाँचों इन्द्रियाँ कमोबेश सक्रिय होती हैं जो

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#Lekh by Ramesh Raj

जीवन के अंतिम दिनों में गौतम बुद्ध +रमेशराज ——————————————————————- सत्य और धर्म के वास्तविक स्वरूप को समझाने के लिये समाजिक

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#Lekh by Ramesh Raj

नव नवोन्मेषी साहित्य-साधक ‘ रमेशराज ’ +डॉ. रमेश प्रसून ————————————————– ‘ घर का जोगी जोगना, आन गाँव का सिद्ध ‘

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#Kavita by Ramesh Raj

डॉ. नामवर सिंह की रसदृष्टि या दृष्टिदोष +रमेशराज ———————————————————————— ‘‘जो केवल अपनी अनुभूति-क्षमता के मिथ्याभिमान के बल पर नयी कविता

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#Lekh by Ravindra Bramar ( Ramesh Raj )

तेवरीः युवा आक्रोश की तीसरी आँख +डॉ . रवीन्द्र ‘भ्रमर’ ———————————————————————– ‘तेवरी’ के प्रति मेरा ध्यान निरन्तर आकर्षित होता रहा

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