#Lekh by Jaya Singh

आतंरिक खासियतों की हिफ़ाजत………! ************************************** आज चलिए एक ऐसे विषय पर कुछ सोचा जाए जो हम सब की जिंदगी का एक अहम् हिस्सा है। पर हम दूसरों से तुलना में उस हिस्से को खोते जा रहें हैं। वह हिस्सा है हमारी आतंरिक विशेषताएं। हम सभी अपनी अलग अलग विशेषताओं के कारण एक दूसरे से अलग है। ये विशेषताएं दो तरह की होती हैं पहली आतंरिक और दूसरी शारीरिक। शारीरिक विशेषताओं हमें पैतृक रूप में जन्म…

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#Lekh by Pankaj Prakhar

“कस्तूरी कुंडल बसे , मृग ढूंढे बन माहि”समाधान स्वयं में ही छिपा हुआ है आज के इस आपाधापी के युग में हर व्यक्ति अनेक प्रकार की समस्याओं से घिरा हुआ है कोई न कोई ऐसी समस्या हर व्यक्ति के जीवन में है जिससे पीछा छुडाने के लिए वो हर सम्भव प्रयास करता है लेकिन विडम्बना ये है की जैसे ही वो एक समस्या से पीछा छुड़ाता है तो उसी समय दूसरी समस्याएं मुंह फाड़ के…

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"#Lekh by Pankaj Prakhar"

#Lekh by Pankaj Prakhar

“नज़रे बदलो नज़ारे बदल जायेंगे” आपकी सोच जीवन बना भी सकती है बिगाढ़ भी सकती है सकारात्मक सोच व्यक्ति को उस लक्ष्य तक पहुंचा देती है जिसे वो वास्तव में प्राप्त करना चाहता है लेकिन उसके लिए एक दृण सकारात्मक सोच की आवश्यकता होती है| जब जीवन रुपी सागर में समस्यारूपी लहरें हमे डराने का प्रयत्न तो हमे सकारात्मकता का चप्पू दृण निश्चय के साथ उठाना चाहिए | यदि आप ऐसा करते है तो निश्चितरूप…

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"#Lekh by Pankaj Prakhar"

#Lekh by sameer shahi

आंदोलन अपने आस पास देखें, हर जगह कोई ना कोई आंदोलन चल रहा है. जाट आंदोलन, किसान आंदोलन, पटेल आंदोलन – आजकल के कुछ प्रचलित आंदोलन हैं. कुछ पुराने आंदोलन अगर याद करें तो ‘चिपको’ आंदोलन – नर्मदा बचाओ आंदोलन आदि के नाम याद आते हैं. अभी हाल में मध्यप्रदेश में ही किसानों ने ‘ जल – सत्याग्रह ‘ किया था जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था – वे लोग कामयाब भी…

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"#Lekh by sameer shahi"

#Lekh by Amit Khare Sevada

एक सपना जो सच न हो सका-अमित खरे 1999 तक मुझे यह मालूम नहीं था कि साहित्य में कवि सम्मेलन भी होते हैं। हमारे नगर की एक संस्था गाँधी पुस्तकालय 1946 से लगातार कवि सम्मेलन करती है जिसमें वसंत पंचमी पर आयोजित होने बाला अखिल भारतीय कवि सम्मेलन भी शामिल है । 1999 में कुछ मित्रों ने जिद करके दतिया से बुलबाया कि इसबार वसंत पंचमी पर मधुमिता शुक्ला आ रहीं है सो पहली बार…

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"#Lekh by Amit Khare Sevada"

#Lekh by Pankaj Prakhar

भारत का महान सम्राट अकबर नही महाराणा प्रताप थे लेखक :- पंकज “प्रखर” कोटा (राजस्थान) राजस्थान की भूमि वीर प्रसूता रही है इस भूमि पर ऐसे-ऐसे वीरों ने जन्म लिया है जिन्होंने अपने देश की रक्षा में न केवल अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया बल्कि शत्रुदल को भी अपनी वीरता का लोहा मानने पर विवश कर दिया | लेकिन दुर्भाग्य ये रहा की हमारे देश का इतिहास ऐसे मुर्ख पक्षपातियों द्वारा लिखा गया जिन्होंने…

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"#Lekh by Pankaj Prakhar"

#Lekh by Brijmohan Swami

बृजमोहन ‘बैरागी’ का चिंतन —————————————— एक यतार्थ आलोचना – प्रवीण चारण बृजमोहन स्वामी ‘बैरागी’ (जन्म 1 जुलाई सन् 1995) , हिंदी प्रगतिवाद-यतार्थवाद के युवा लेखक और कवि हैं। इस वर्ष आगामी जुलाई में ‘बैरागी’ जी का तेईसवां जन्मदिन भी आ रहा है। ‘बैरागी’ जी आधुनिक काल के युवा वर्ग में महत्वपूर्ण प्रगतिवादी लेखक हैं। यह महत्वपूर्ण बात है कि हिंदी आंचलिक लेखन के साथ साथ उनका विदेशी “काव्य केंद्रीकरण” पर काफ़ी ज़ोर रहा है। ‘बैरागी’…

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"#Lekh by Brijmohan Swami"

#Lekh by Sushil M Vyas

टालस्टाय ने एक छोटी सी कहानी लिखी है। मृत्यु के देवता ने अपने एक दूत को भेजा पृथ्वी पर। एक स्त्री मर गयी थी, उसकी आत्मा को लाना था। देवदूत आया, लेकिन चिंता में पड़ गया। क्योंकि तीन छोटी-छोटी लड़कियां जुड़वां–एक अभी भी उस मृत स्त्री से लगी है। एक चीख रही है, पुकार रही है। एक रोते-रोते सो गयी है, उसके आंसू उसकी आंखों के पास सूख गए हैं–तीन छोटी जुड़वां बच्चियां और स्त्री…

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"#Lekh by Sushil M Vyas"

#Lekh by Pankaj Prakhar

स्त्री और नदी का स्वच्छन्द विचरण घातक और विनाशकारी ** स्त्री और नदी दोनों ही समाज में वन्दनीय है तब तक जब तक कि वो अपनी सीमा रेखाओं का उल्लंघन नही करती | स्त्री का व्यक्तित्व स्वच्छ निर्मल नदी की तरह है जिस प्रकार नदी का प्रवाह पवित्र और आनन्दकारक होता है उसी प्रकार सीमा रेखा में बंधी नारी आदरणीय और वन्दनीय शक्ति के रूप में परिवार और समाज में रहती है| लेकिन इतिहास साक्षी…

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"#Lekh by Pankaj Prakhar"

Lekh – BOOK REVIEW OF “कुछ व्यंग्य की कुछ व्यंग्यकारों की ” by M M handra

आत्ममंथन से व्यंग्यमंथन तक समीक्षक : एम. एम. चन्द्रा वरिष्ठ व्यंग्यकार हरीश नवल की पुस्तक “कुछ व्यंग्य की कुछ व्यंग्यकारों की ” जब मेरे हाथों में उन्होंने सौंपी, तो कुछ समय के लिए तो मुझे विश्वास ही नहीं हुआ. बसदो पल का आत्मीय मिलन सदियों पुराना बन गया. यह पुस्तक आत्म मंथन से व्यंग्य मंथन तक का सफ़र तय करती हुई आगे बढ़ती हैं. जिसका अध्ययन करते ही मेरे मन में सिर्फ एक विचार उत्पन्न…

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#Lekh by Pankaj Sharma

स्त्री और नदी का स्वच्छन्द विचरण घातक और विनाशकारी लेखक:- पंकज प्रखर कोटा (राज.)   स्त्री और नदी दोनों ही समाज में वन्दनीय है तब तक जब तक कि वो अपनी सीमा रेखाओं का उल्लंघन नही करती | स्त्री का व्यक्तित्व स्वच्छ निर्मल नदी की तरह है जिस प्रकार नदी का प्रवाह पवित्र और आनन्दकारक होता है उसी प्रकार सीमा रेखा में बंधी नारी आदरणीय और वन्दनीय शक्ति के रूप में परिवार और समाज में …

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"#Lekh by Pankaj Sharma"

#Lekh by Pankaj Prakhar

“सफलता की आधारशिला सच्चा पुरुषार्थ   मानव ईश्वर की अनमोल कृति है लेकिन मानव का सम्पूर्ण जीवन पुरुषार्थ के इर्द गिर्द ही रचा बसा है गीता जैसे महान ग्रन्थ में भी श्री कृष्ण ने मानव के कर्म और पुरुषार्थ पर बल दिया है रामायण में भी आता है “कर्म प्रधान विश्व रची राखा “ अर्थात बिना पुरुषार्थ के मानव जीवन की कल्पना तक नही की जा सकती इतिहास में ऐसे अनगिनत उदाहरण भरे पढ़े है…

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"#Lekh by Pankaj Prakhar"

#Lekh by pankaj prakhar

सफलता की आधारशिला सच्चा पुरुषार्थ मानव ईश्वर की अनमोल कृति है लेकिन मानव का सम्पूर्ण जीवन पुरुषार्थ के इर्द गिर्द ही रचा बसा है गीता जैसे महान ग्रन्थ में भी श्री कृष्ण ने मानव के कर्म और पुरुषार्थ पर बल दिया है रामायण में भी आता है “कर्म प्रधान विश्व रची राखा “ अर्थात बिना पुरुषार्थ के मानव जीवन की कल्पना तक नही की जा सकती इतिहास में ऐसे अनगिनत उदाहरण भरे पढ़े है जो…

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#Lekh by Dr. Mrs. Tara Singh

भूत   सृष्टि में कोई भी स्थान ऐसा नहीं है, जहाँ आत्मतत्व न हो , आत्मा का नाश नहीं होता है ; इसलिए इसे अविनाशी कहा गया है । जीवात्मा, इस देह में आत्मा का स्वरूप होने के कारण सदा नित्य है । जीवात्मा के देह मरते हैं ; आत्मा न किसी को मारता है, न ही मरता है । आत्मा अक्रिय होने के कारण किसी को नहीं मार सकता, जीवात्मा के शरीर उसके वस्त्र…

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"#Lekh by Dr. Mrs. Tara Singh"

#Lekh by Dr. Mrs. Tara Singh

भगीरथ   गंगा के साथ अनेक पौराणिक कथाएँ जुड़ी हुई हैं, इनमें राजा सगर की कथा और मिथकों के अनुसार ब्रह्मा ने विष्णु के पैर के पसीनों की बूँदों से गंगा की जन्म-कथा, तथा अन्य कथाएँ भी हैं । महाभारत के अनुसार भगीरथ ,अंशुमान के पौत्र तथा दिलीप के पुत्र थे । उन्होंने सौ अश्वमेध यग्य करवाये; उनके महान यग्य में इन्द्र सोमपान कर मदमस्त हो गये थे । भगीरथ ने गंगाघाट के दोनों किनारों…

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#Lekh by Nitish Kumar Rajput

लेख- हल्के होते मंच   मुझे आज भी याद आते हैं वे दिन जब हमारे शहर में कवि सम्मेलन और मुशायरा होता था । कवियों को सुनने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती थी क्योंकि उस समय मंचों की एक गरीमा होती थी । कविगण भी साहित्य तथा देश को समर्पित होते थे । उनकी रचनाओं में सच्चाई तथा सादगी झलकती थी । जब वे मंच पर आते थे तो तालियों की गड़गड़ाहट से…

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"#Lekh by Nitish Kumar Rajput"

#Lekh by Dr. Mrs. Tara Singh

आनंद **   सुख से अनंत गुना एवं उससे भी परे की सर्वोच्च अवस्था, आनंद है । यह किसी बाहरी उत्तेजना से संबंधित नहीं है, बल्कि आनंद आत्मा से संबंधित एक अनुभूति है , हमारे विचार का एक भाग है, जो हमारी भावनाओं से जुड़ा होता है । यही कारण है, आनंद , मन को मिलने वाले सुख की तुलना में उच्चस्तरीय एवं अधिक सुख का अनुभव देता है । जब हम आत्मा से आनंद…

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Lekh by Masneesh ( Mannu ) Bhatt

आदत से मजबूर हम सभी को शायद ये लगे कि समाज बुरा और बुरा होता जा रहा है पर यकीन मानिये बस ये बात तो बेवजह मान लेने वाली है, मैंने एक दुनियाँ देखी है शायद आपने भी आपके आस पास इसे देखा हो। ये भी सम्भव है कि आप खुद इसका हिस्सा होकर भी इसे नकार रहे हो शायद मैं भी ऐसा ही कुछ कर रहा हूँ। मैं एक काल्पनिक दुनिया की बात करता…

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"Lekh by Masneesh ( Mannu ) Bhatt"

Vyang by M M Chandra

नागनाथ सांपनाथ का चुनावी उत्सव: लेखक – एम. एम. चन्द्रा (व्यंग्य ) …………………………………………….. गजब ये है कि अपनी मौत की आहट नहीं सुनते, वो सबके सब परीशां हैं, वहां पर क्या हुआ होगा। दुष्यंत कुमार की यह ग़ज़ल कोयल एक पेड़ पर बैठी गा रही है . तभी अचानक उस पेड़ के नीचे पड़ा सड़ा आधा जमीं में धंसा बाहर फन निकले एक नागनाथ ने आवाज लगाई. बस करअब तो अपनी हार मान ले. हम चुनाव…

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Lekh by dr arvind Jain

पद ,पैसा ,प्रतिष्ठा और पुरुस्कार —- भाई मुरारी की उम्र चालीस साल की कब होगयी उन्हें पता तक नहीं चला .कारण वेचारे को पच्चीस साल लग गए बी,ए.की डिग्री लेने में. उसके बाद पढाई पढाई करते समय आराम प्रेमी होने से अधिक आराम में उनका विश्वास. उनका विश्वास हैं की मनुष्य को आराम मौलिक आधार के साथ मिलना चाहिए. चाहे हम पढ़े या नौकरी करे या व्यापार . तभी तो उनको पच्चीस साल लग गए…

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#Lekh by Sushil M Vyas

कुतुबुद्दीन की मौत   इतिहास की किताबो में लिखा है कि उसकी मौत पोलो खेलते समय घोड़े से गिरने पर से हुई. ये अफगान / तुर्क लोग “पोलो” नहीं खेलते थे, पोलो खेल अंग्रेजों ने शुरू किया. अफगान / तुर्क लोग बुजकशी खेलते हैं जिसमे एक बकरे को मारकर उसे लेकर घोड़े पर भागते है, जो उसे लेकर मंजिल तक पहुंचता है, वो जीतता है.   कुतबुद्दीन ने अजमेर के विद्रोह को कुचलने के बाद…

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Lekh by Anupama Srivastava ‘Anushri’

‘ ठोको ‘ सोच समझकर ! भाषाई व्याभिचार, अभद्र,  अशिष्ट शब्दों के अतिक्रमण से ,  भाषा की अस्मिता के साथ दुर्व्यवहार।   आजकल हर जगह , हर मंच पर  , हर जगह  भाषा  की गरिमा , उत्कृष्टता के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और बताया जाता है कि हम  “ज़रा हट कर  “हैँ !   जरा हटकर के फंडे को अपनाने वाले लोग समझते हैं कि हम इस प्रतिद्वंदिता के युग में तभी टिक  सकते हैं,…

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"Lekh by Anupama Srivastava ‘Anushri’"

#Lekh सामाजिक प्रतिबद्धताओं से सजा व्यंग्य संग्रह: शोरूम में जननायक समीक्षक: एम. एम. चन्द्रा

अनूप मणि त्रिपाठी का पहला व्यंग्य संग्रह “शोरूम में जननायक” में लगभग तीन दर्जन व्यंग्य है. व्यंग्य संग्रह में भूमिका नहीं है, सुधी पाठक इससे अंदाज लगा सकते है कि नव लेखन के सामने आने वाली चुनौतियां कम नहीं होती. पुस्तक में भूमिका का न होना एक तरह अच्छा ही हुआ है. अब पाठक अपनी स्वतंत्र सोच से पुस्तक पढ़ने का साहस जुटा सकते हैं. क्योंकि देखा जाता है यदि पुस्तक में किसी बड़े लेखक की भूमिका…

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"#Lekh सामाजिक प्रतिबद्धताओं से सजा व्यंग्य संग्रह: शोरूम में जननायक समीक्षक: एम. एम. चन्द्रा"

Lekh by Dr. Arvind Jain

पुनः मूषको भव- एक किवदन्ति सुनी थी की एक गरीब आदमी की इच्छा थी रईस बनने की ,उसने बहुत प्रयास किया पर सफलता नहीं .एक दिन वह निराश होकर आत्म हत्या करने  का सोचा ,उसके शहर में एक आत्म हत्या या ख़ुदकुशी करने का स्थान था .वहाँ बहुत आत्महत्याएं होने के कारण सरकार ने वहां पर एक चार की गार्ड लगा दी थी. वह बेचारा गरीब आत्म हत्या का साहस लेकर चोरी छिपे जा रहा…

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"Lekh by Dr. Arvind Jain"

#Lekh by Kirti Gandhi

राजस्थान में  लोकपर्वके रुप  में गणगौर बड़ी धूमधाम से मनाया  जाता है ।यू तो गणगौर स्त्रियों का त्यौहार है किंतु कमोबेश पूरा परिवार ही इसमें शामिल रहता है। इसमें भगवान शंकर और पार्वती की पूजा ईश्वर और गणगौर के रुप में की जाती है ।होलिका दहन के दूसरे दिन होली की राख एवं मिट्टी मिलाकर 16 पिंडिया बनाई जाती है ।जिन्हें ईश्वर गणगौर मानकर इनकी पूजा की जाती है ।        मान्यता है…

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"#Lekh by Kirti Gandhi"