Lekh by Anupama Srivastava ‘Anushri’

‘ ठोको ‘ सोच समझकर ! भाषाई व्याभिचार, अभद्र,  अशिष्ट शब्दों के अतिक्रमण से ,  भाषा की अस्मिता के साथ दुर्व्यवहार।   आजकल हर जगह , हर मंच पर  , हर जगह  भाषा  की गरिमा , उत्कृष्टता के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और बताया जाता है कि हम  “ज़रा हट कर  “हैँ !   जरा हटकर के फंडे को अपनाने वाले लोग समझते हैं कि हम इस प्रतिद्वंदिता के युग में तभी टिक  सकते हैं,…

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#Lekh सामाजिक प्रतिबद्धताओं से सजा व्यंग्य संग्रह: शोरूम में जननायक समीक्षक: एम. एम. चन्द्रा

अनूप मणि त्रिपाठी का पहला व्यंग्य संग्रह “शोरूम में जननायक” में लगभग तीन दर्जन व्यंग्य है. व्यंग्य संग्रह में भूमिका नहीं है, सुधी पाठक इससे अंदाज लगा सकते है कि नव लेखन के सामने आने वाली चुनौतियां कम नहीं होती. पुस्तक में भूमिका का न होना एक तरह अच्छा ही हुआ है. अब पाठक अपनी स्वतंत्र सोच से पुस्तक पढ़ने का साहस जुटा सकते हैं. क्योंकि देखा जाता है यदि पुस्तक में किसी बड़े लेखक की भूमिका…

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Lekh by Dr. Arvind Jain

पुनः मूषको भव- एक किवदन्ति सुनी थी की एक गरीब आदमी की इच्छा थी रईस बनने की ,उसने बहुत प्रयास किया पर सफलता नहीं .एक दिन वह निराश होकर आत्म हत्या करने  का सोचा ,उसके शहर में एक आत्म हत्या या ख़ुदकुशी करने का स्थान था .वहाँ बहुत आत्महत्याएं होने के कारण सरकार ने वहां पर एक चार की गार्ड लगा दी थी. वह बेचारा गरीब आत्म हत्या का साहस लेकर चोरी छिपे जा रहा…

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"Lekh by Dr. Arvind Jain"

#Lekh by Kirti Gandhi

राजस्थान में  लोकपर्वके रुप  में गणगौर बड़ी धूमधाम से मनाया  जाता है ।यू तो गणगौर स्त्रियों का त्यौहार है किंतु कमोबेश पूरा परिवार ही इसमें शामिल रहता है। इसमें भगवान शंकर और पार्वती की पूजा ईश्वर और गणगौर के रुप में की जाती है ।होलिका दहन के दूसरे दिन होली की राख एवं मिट्टी मिलाकर 16 पिंडिया बनाई जाती है ।जिन्हें ईश्वर गणगौर मानकर इनकी पूजा की जाती है ।        मान्यता है…

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"#Lekh by Kirti Gandhi"

#Lekh by sanjay verma ‘drushti’

कंडों का होलीदहन: पर्यावरण की पक्ष में कंडे की होली जलाएं ,लाखों गायों का सालभर का खर्च निकल जाएगा । ये कार्य  पर्यावरण के हक़ में एवं  गो सेवा के लिए  पुनीत कार्य होगा ।आज भी कई क्षेत्रों में दाहसंस्कार में कंडों का ही पूर्ण रूप से उपयोग किया जाता है। जो की पर्यावरण व ,लकड़ी के हित  में है  ।  वर्तमान में  मोहल्लों में कई स्थानों पर होलीदहन  किया जाने लगा है ।सुझाव है…

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Samiksha/Lekh by Dr. Brhmjeet Goutam/Ramesh Raj

विरोध की कविता : “ जै कन्हैयालाल की “ [ प्रथम संस्करण ] + डॉ. ब्रह्मजीत गौतम —————————————————————— ‘ तेवरी ‘ विधा के प्रणेता, कथित विरोधरस के जन्मदाता श्री रमेशराज की लघु कृति ‘ जै कन्हैयालाल की ‘ आज के समाज और समय की विसंगतियों और विद्रूपों का जीवंत दस्तावेज़ है | 105 द्विपदियों से समन्वित इस कृति को कवि ने ‘ लम्बी तेवरी ‘ नाम दिया है | प्रत्येक द्विपदी में एक प्रथक भाव…

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#Lekh by Dr. Arvind Jain

अमेरिका  स्वर्ग या नरक —-डॉक्टर अरविन्द जैन भोपाल – ———————————————————————- हर व्यक्ति अपने घर को अपना घर कहता हैं जब तक वह अपने परिवार से न्यारा /अलग न हो जाये. उसके बाद उसे अपना स्वयं का घर, घर लगता हैं और जहाँ से अलग हो जाता हैं तो वह घर उसे घर जैसा लगता हैं .जैसे बहु को सास कहती हैं कि हमारी बहु ,हमारी लड़की जैसी हैं ,लड़की नहीं .इसी प्रकार home और house  …

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#Lekh Samiksha by Ramesh Raj

डॉ. गोपाल बाबू शर्मा की कविता-यात्रा +रमेशराज ———————————————————————– प्रसिद्ध व्यंग्यकार और जाने-माने कवि डॉ. गोपाल बाबू शर्मा विलक्षण प्रतिभा के धनी हैं। कविता उनके लिए मनोरंजन का एक साधनमात्र नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकारों, शोषित-लाचारों की दुर्दशा, दयनीयता और घृणित व्यवस्था से उत्पन्न अराजकता, विसंगति और असमानता को भी प्रमुखता के साथ अपना विषय बनाकर चलती है। जहां भी जो चीज खलती है, कवि उसके विरुद्ध खड़ा होता है और वसंत या खुशहाली के सपने बोता…

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"#Lekh Samiksha by Ramesh Raj"

#Lekh by Dr.Arvind Jain

सहिष्णुता और अनेकान्तवाद वर्तमान में भारत में शब्दों के बाणों का इतना अधिक  उपयोग हो रहा जिससे आपसी कलह बढ़ रहा हैं कारण कोई किसी की बात को आदर नहीं देता और सब अपनी अपनी बात पर अड़े हैं और सब सही हैं .जैसे आधा गिलास भरा हैं और आधा खाली हैं .पांच अंधे हाथी को छूकर बताते हैं की यह खम्बा जैसा हैं ,कोई कहता पंख जैसा हैं ,कोई कहता रस्सा जैसा हैं .…

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"#Lekh by Dr.Arvind Jain"

#Lekh by Dr. Arvind Jain

हम न सुधरेंगे और न सीखेंगे हम भारतवासी  बहुत अच्छे गुणोंके धारी जीव हैं जंतु नहीं .हमें या हमारे खून में विरोध करने की आदत हैं ,हमको नियम को तोड़ने में मजा आता हैं ,जैसे हम कुछ भी भले के लिए बोले पर पाकिस्तान /चीन को विरोध करना . ऐसे ही हमारे देश में यदि किसी सुधार की बात करे ,कहने या सुनने के पहले विरोध ,समझना नहीं .कारण हमारा खून ख़ास तौर पर अस्सी…

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"#Lekh by Dr. Arvind Jain"

#Lekh by pankaj prakhar

विद्यार्थी परीक्षाओं से डरें नही बल्कि डटकर मुकाबला करें (लेखक :- पंकज “प्रखर”) प्रिय विद्यार्थीयों जैसा की आप लोग जानते है की कुछ ही दिनों में बोर्ड की वार्षिक परीक्षाएं शुरू होने जा रही है ऐसे में आप लोगों के परीक्षा संबंधी तनाव और परेशानियों को दूर करने के लिए मै कुछ नये सकारात्मक सूत्र आपको देना चाहता हूँ, क्योकि अपने इतने वर्षों के शिक्षण काल में मैंने अनुभव किया है की छात्र अथवा छात्रा…

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"#Lekh by pankaj prakhar"

#Lekh by Ramesh Raj

माना नारी अंततः नारी ही होती है….. किसी भी काव्य-रचना की उपादेयता इस बात में निहित होती है कि उसके प्रति लिये गये निष्कर्ष वैज्ञानिक परीक्षणों पर आधारित हों। वैज्ञानिक परीक्षणों से आशय, उसके कथ्य और शिल्प सम्बन्धी चरित्र को तर्क की कसौटी पर कसना, जांचना, परखना होना चाहिए। उक्त परीक्षण के अभाव में जो भी निष्कर्ष मिलेंगे, वे साहित्य में व्यक्त किये गये मानवीय पक्ष का ऐसा रहस्यवादी गूढ़ दर्शन प्रस्तुत करेंगे जिसमें कबीर…

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#Lekh by Dr. Arvind Jain

क्या  संस्कृति और मर्यादा केवल भाषण और किताबों तक सीमित रह गयी ? यह बात हर युग में उठायी गई थी , हैं और उठायी जाएँगी .वर्तमान सन्दर्भ में इस बात को उठाना आवश्यक हैं या नहीं ? क्या सचमुच हम आधुनिक हो गए ? हम ज्ञानवान हो गए ?हम पूर्ण वैज्ञानिक रूप से विकसित हो गए ?क्या आधुनिक ज्ञान विज्ञानं हमारे सर्वांगीण विकास के लिए पूर्ण हैं ?क्या हमने भौतिक संसाधनों को जुटा कर…

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#Lekh By Ramesh Raj

साहित्य का बुनियादी सरोकार +रमेशराज ————————————————————– किसी भी देश या काल के साहित्य के उद्देश्यों में पीडि़त जनता की पक्षधरता इस बात में निहित होती है कि यदि तत्कालीन सामाजिक व्यवस्था में किसी भी प्रकार की विसंगतियां, कुरीतियां पनप गई है, तो उनके निर्मूलन हेतु साहित्य का प्रयोग एक गाल पर तमाचा खाने के बाद दूसरा गाल करने या प्रेयसी की जांघें सहलाने, प्रकृति-चित्रण करने के बजाय संस्कृति और सभ्यता के तस्करों की मानसिकता पर…

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"#Lekh By Ramesh Raj"

#Lekh by Arvind Jain

अपसंस्कृति एवम उससे मुक्ति के उपाय आज इस विषय पर बहुत चर्चा हैं कि हम किस दिशा में जा रहे हैं ,युवा वर्ग में भटकाव हैं .दिशाहीन हैं और पश्चिमी सभ्यता ने हमें बहुत नुक्सान पहुचाया हैं .क्या हमें पश्चिमी संस्कृति का अनुपालन करना चाहिए.? क्या भारतीय सभ्यता परिपूर्ण नहीं हैं ? क्या हमारे माता पिता अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन ठीक से नहीं कर रहे हैं ? क्या हमारा परिवेश ,परिजन दिशा से भटक गए…

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"#Lekh by Arvind Jain"

#Lekh By pankaj prakhar

वैलेंटाइन डे युवाओं का एक दिवालियापन प्रेम शब्दों का मोहताज़ नही होता प्रेमी की एक नज़र उसकी एक मुस्कुराहट सब बयां कर देती है, प्रेमी के हृदय को तृप्त करने वाला प्रेम ईश्वर का ही रूप है| एक शेर मुझे याद आता है की…. “बात आँखों की सुनो दिल में उतर जाती है जुबां का क्या है ये कभी भी मुकर जाती है ||” इस शेर के बाद आज के लेख की शुरुआत एक कहानी…

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"#Lekh By pankaj prakhar"

#Lekh by Dr. Arvind Jain

चुनाव आजकल चुनाव का माहौल बहुत गर्म हैं ,वैसे भारत चुनाव प्रधान देश हैं हर बात  में चुनाव होता ही हैं कुछ को छोड़कर , लोकसभा ,विधान सभा ,नगर निगम ,नगर पालिका ,जनपद पंचायत ,ग्राम पंचायत ,सरपंच ,पञ्च ,इसके बाद कई बैंकों के चुनाव और फिर नेता का चुनाव ,प्रतिपक्ष के नेता का चुनाव ,कोई मर गया तो उप चुनाव बहुमत से हार गए तो मध्यावधि चुनाव. ये कुछ नमूने हैं देश के. हां हमें…

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#Lekh By Pankaj Prakhar

राम केवल एक चुनावी मुद्दा नही हमारे आराध्य है (लेखक:- पंकज प्रखर ) राम केवल चुनावी मुद्दा नही बल्कि हमारे आराध्य होने के साथ-साथ हमारे गौरव का प्रतीक है | ये देश जो राम के आदर्शों का साक्षी रहा है ये अयोध्या जहां राम ने अपने जीवन आदर्शों के लिए न केवल कष्ट सहे बल्कि मनुष्यत्व के श्रेष्ठ गुणों को उसके चरम तक पहुँचाया वो राम आज केवल एक चुनावी मुद्दा है जिसे नेता अपनी–अपनी…

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#Lekh by Arvind Jain

अंडा खाओ और हृदय रोग बुलाओ ——-डॉक्टर अरविन्द जैन भोपाल ====================================== वैसे भारत अहिंसक देश माना जाता हैं पर आधुनिकता के कारण हमारी सभ्यता, संस्कृति और आचार,विचार और आहार पर इस प्रकार प्रहार किया हैं कि भारतीय संस्कृति को अब सांस लेना मुश्किल हो रहा हैं . हमारे खान पान में सेंध लग गयी हैं . नए नए खाद्य उत्पादन के कारण हमारे आहार में आवांछित तत्व जुड़ गए या मिला दिए गए. अब यह…

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#Lekh By Anupama Srivastava ‘Anushri’

आधुनिकता का पर्याय कपड़े नहीं !! किस तरह हम अपने सोच और कर्मों से अधिक कपड़ों से अपना परिचय देने लगे। कपड़े आवश्यक हैं , अच्छी वेशभूषा का महत्व भी कम नहीं , लेकिन आज जिस तरह सब आकर ‘कपड़ा केंद्रित’ हो गया ! हर दिन फैशन की अंधी दौड़ ने हमारे दिमाग और विवेक को जिस तरह अपनी गिरफ्त में ले लिया है इसका ख़ासा परिणाम मेट्रो सिटीज में तो दिखता ही है, नक़ल…

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#Lekh By Deepak Kumar

आलोचना लेख विकास पाल की कविता में जन के प्रति सहानुभूति : ———————————————- राजनीतिक शब्दकोश में विकास शब्द केवल जनता को बहलाने वाला भ्रमात्मक शब्द है। इसका वास्तविक अर्थ समकालीन कवि विकास पाल की कविता ‘विकास’ पढ़कर पता चलता है। उत्तरप्रदेश के फतेहपुर जनपद के एक छोटे से गाँव के रहनेवाले विकास पाल शोषित जनता से सच्ची सहानुभूति रखने वाले कवि हैं। जन समाज पर द्वेष, दम्भ, छल का प्रहार मैं सह न सकूँगा। ××××××××××××××××××××××××…

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#Lekh By Pankaj Prakhar

एक महान सती थी “पद्मिनी” लेखक:-पंकज प्रखर एक सती जिसने अपने सतीत्व की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया उसकी मृत्यु के सैकड़ों वर्ष बाद उसके विषय में अनर्गल बात करना उसकी अस्मिता को तार-तार करना कहां तक उचित है | ये समय वास्तव में संस्कृति के ह्रास का समय है कुछ मुर्ख इतिहास को झूठलाने का प्रयत्न करने में लगे हुए है अब देखिये एक सर फिरे का कहना है अलाउद्दीन…

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#Lekh by Dr. Arvind Jain

विवाह के बाद प्रेम या प्रेम विवाह आज भोपाल के समाचार पत्र में प्रथम समाचार अत्यंत दर्दनाक और वीभस्त,अकल्पनीय .कोई इतना भी गिर कर घृणित कार्य कर सकता हैं जिसने अपनी प्रेमिका की हत्या कर अपने घर में दफनाया और उसके ऊपर सीमेंट का चबूतरा बनाया और उस पर सोता रहा .एक माह के बाद खुलासा हुआ. जिससे ये तय्थ सामने आया कि लड़की के द्वारा प्रेम किया और लिव इन रिलेशन में रहना शुरू…

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#Lekh By pankaj prakhar

गौरवशाली राष्ट्र का गौरवशाली गणतांत्रिक इतिहास गणतन्त्र दिवस यानी की पूर्ण स्वराज्य दिवस ये केवल एक दिन याद की जाने वाली देश भक्ति नही है बल्कि अपने देश के गौरव ,गरिमा की रक्षा के लिए मर मिटने की उद्दात भावना है | राष्ट्र हित में मर मिटने वाले देश भक्तों से भारत का इतिहास भरा पड़ा है अपने राष्ट्र से प्रेम होना सहज-स्वाभाविक है। देश का चाहे राजनेता हो योगी हो सन्यासी हो रंक से…

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"#Lekh By pankaj prakhar"

#Lekh by Dr. Arvind Jain

चॉकलेट  वर्ल्ड चॉकेलट वर्ल्ड  हमारे शहर को वह महशूर जगह हैं जहाँ पर हर नौजवान लड़का और लड़की एक बार जाने के बाद फिर बारबार जाते .कारण एक तो एकांत और शहर से अलग थलग . इस स्थान की यह विशेषता हैं  जो युगल दोस्त जाते हैं अधिकतर जिंदगी भर के दोस्त होते हैं /बन जाते हैं .यहाँ का जाना कम से कम दो से  एक हजार तक का खर्चहोता हैं . पर यहाँ अधिकाँश…

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"#Lekh by Dr. Arvind Jain"