lekh samikshak : m m chandra by pustak samiksha

शहरी जीवन की मनोदशा का वर्णन : सपना  ***************************************. समीक्षक – एम.एम.चन्द्रा  डॉ. लवलेश दत्त की कहानी संग्रह की समीक्षा लिखना बहुत ही श्रमसाध्य रहा. वैसे तो इस कहानी संग्रह को दो अन्य साथियों ने भी पढ़ा और अपनी राय जाहिर की लेकिन उनका नजरिया इस पुस्तक को लेकर काफी भिन्न था. इस संग्रह में कुल पन्द्रह कहानियाँ हैं जिन्हें बिना किसी भूमिका के प्रकाशित किया गया है. शायद नये लेखकों के सामने आने वाली…

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lekh by sushil yadav

हिंदी को आन्दोलन की जरुरत …… हम सरकारी दफ्तर वाले, १४ सितम्बर को हर साल ‘हिन्दी दिवस’ के नाम इकठ्ठा हो के चर्चा में व्यस्त हो जाते हैं |अति व्यस्तता के बीच कार्यालय के मुखिया प्रकट होकर बताते हैं कि आज वे ज्यादा वक्त नहीं दे सकेंगे |अगली मीटिंग के लिए ‘टेडर’ वाले लोग कारीडोर में प्रतीक्षारत बैठे हैं |टूटी- फूटी हिंदी में औपचारिकता पूरी की जाती है |साहब हर साल वाला भाषण, हिन्दी को…

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lekh by chander prabha sood

–                                                              -जन्म से मृत्यु के बीच जन्म व मृत्यु के बीच जीवन एक कड़ी है जीने के लिए। इसी प्रकार एक जीवन से दूसरे जीवन तक पहुँचने का सेतु मृत्यु है। पूरा जीवन संघर्ष करते हुए जब मनुष्य थक जाता है तब उसे आराम की…

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lekh by sushil yadav

–                                                        -दृष्टिकोण चांगला पाहिजे ….. वे प्रबुद्ध हैं |उन्हें देश की चिंता रहती है| वैसे आजकल प्रबुद्ध कहाने का शार्टकट भी यही है कि, एक स्वस्थ आदमी देश के बारे में सोचें | वैसे तो पर्यावरण वाले भी देश के मौसम ,मिजाज ,हरारत ,सर्दी की दिनरात सोचते रहते…

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lekh by ramesh raj

–                                                -ग़ज़ल पर लेख –                                          -|| हिन्दीग़ज़ल में कितनी ग़ज़ल? || ………………………………………………………………………………………………………………………… हिन्दी में ग़ज़ल अपने विशुद्ध  शास्त्रीय सरोकारों के साथ कही या लिखी जाए, इस बात पर किसे आपत्ति हो सकती…

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"lekh by ramesh raj"

lekh by chander prabha sood

–                                                        -. जीवन संघर्ष का दूसरा नाम मानव का जीवन संघर्ष का दूसरा नाम है। जन्म से मृत्यु तक वह पापड़ बेलता रहता है। एक के बाद एक कोई-न-कोई समस्या उसके समक्ष मुँह बाये खड़ी रहती है। वह उनको सुलझाने में ही चक्कर घिनी की तरह पिसता रहता…

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lekh by chander prabha sood

–                                                                      -झोली भर नेमतें मानव को ईश्वर ने झोली भर-भर कर नेमतें दी हैं। उन सबसे बड़कर उसे बुद्धि दी है। इस बुद्धि के बल पर उसने अनेकानेक चमत्कार किये हैं, इसमें कोई दोराय नहीं। इस बात से भी हम इंकार…

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lekh by feature sewa ( neha nahata )

एक मुलाकातः हरफनमौला किशोर से प्रस्तुतिः नेहा नाहटा (जैन), नई दिल्ली ज़रूरी नहीं है कि कोई व्यक्ति फिल्मी दुनियाॅ, खेल या राजनीति जैसे क्षेत्रों में ही अपने कुछ कारनामें दिखाये तभी उसके चाहने वालों की फौज इकट्ठी होगी। आज सोशल साइट्स का ज़माना है और बहुत से लोग अपने विभिन्न मस्ती भरे जलवों से फेसबुक, ट्वीटर और वाट्सअप आदि जैसी सोशल साइट्स पर लोगों को अपनी ओर खींचने में कामयाब रहते हैं। जी हां, आप…

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lekh by chander prabha sood

–                                                                   -. सामंजस्य बनाकर रहें इस संसार में हर जीव सामंजस्य बना कर रहता है। सभी जीव अर्थात् पशु-पक्षी अर्थात् पानी में रहने वाले (जलचर),  आकाश में उड़ने वाले (नभचर) और पृथ्वी पर रहने वाले (भूचर) सभी मिलजुल कर, झुंड बनाकर रहते…

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lekh by maharaj singh

–                                                                 -: व्यंग : आज रात्रि मैंने एक  विचित्र सपना  देखा क़ि मुझे मच्छरों की बोली समझने की शक्ति प्राप्त हो गयी है । मुझे बाहर से मच्छरों की आवाज का शोर सुनाई दे रहा था और लग रहा था जैसे आस पास…

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lekh by chander prbha sood

–                                                                 -. कंक्रीट के जंगल कंक्रीट के जंगल में रहते-रहते हम सभी शहर वासी संवेदना से रहित होते जा रहे हैं। ऊँची-ऊँची बहुमंजिली इमारतें हमारी प्रगति व वैभव का प्रतीक हैं। एक जैसे बने ये आलिशान भवन मानो हमें मुँह चिढ़ा रहे हैं।…

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lekh by chander prabha sood

–                                                                      -प्रकृति दूर कष्ट हम जितना प्रकृति से दूर हो रहे हैं उतना ही कष्ट पा रहे हैं। सुनने में बड़ा अजीब लग रहा है पर वास्तविकता यही है।हम सभी दिन प्रतिदिन कृत्रिम जीवन जी रहे हैं। हमारे आचार-व्यवहार में बनावटीपन…

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lekh by vandana Dubey

” नालंदा एक अदिव्तीय विरासत और धरोहर ” ” नालंदा” विश्व का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय था। प्राचीन काल का सबसे बड़ा अध्ययन केंद्र था तथा इसकी स्थापना पांचवी शताब्दी ईसवी में हुई थी। दुनिया के इस सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय के अवशेष बोधगया से ६० किलोमीटर दूर एवं पटना से १०० किलोमीटर दक्षिण में स्थित हैं। राजगीर से ११ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है बस अब नालंदा के “भग्नावशेष” ही बाकी है नालन्‍दा विश्‍वविद्यालय के…

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lekh by Shyam Snehi

–                                                          -व्यंग भारत और भारत की खोज विश्व-पटल पर जब से भारत की खोज हुई, तब से अब तक भारत के लगभग सभी क्षेत्रों में नई-नई खोज हुई | पहले भारतीय लोग राम-रहमान से काम-कला तक के कलात्मक खोज में तल्लीन रहा करते थे, जिसके बदौलत ही…

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lekh (samiksha : m m chandra by pustak samiksha

शहरी जीवन की व्यंग अभिव्यक्ति : कौआ कान ले गया …………………………………………………………………… समीक्षक : एम. एम. चन्द्रा विवेक रंजन श्रीवास्तव का व्यंग संग्रह 90 के दशक के बदलते रंग-ढंग, रहन-सहन या उपभोगतावादी संस्कृति में तबदील होती नई पीढ़ी की दशा का सीधा-सरल किन्तु प्रभावशाली व्यंग्यात्मक विवरण प्रस्तुत करता है. इसमें वैश्वीकरण, उदारीकरण और निजीकरण के कारण देश में उस विकास की प्रक्रिया को समझने का मौका मिलेगा जिसमें आम आदमी की जेब देखी जाती है आदमी…

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lekh by chander prabha sood

–                                                                 -समय बड़ा बलवान समय बड़ा बलवान है। बड़े-बड़े राजवंशों व सभ्यताओं को समय के साथ-साथ तहस-नहस होते देखा गया है। इतिहास इसका साक्षी है। समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता। हमें समय के साथ-साथ चलना चाहिए। समय के साथ कदम मिलाकर चलने…

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lekh by chander prabha sood

.     –                                                              – संयुक्त परिवार में विघटन संयुक्त परिवार में विघटन छोटी-छोटी बातों को लेकर होता है। बच्चों व बड़ों की असहिष्णुता इसका मुख्य कारण होता है। दोनों ही पक्ष जब अपने-आपको सही ठहराते हुए दूसरों की बात नहीं सुनना चाहते तो समस्या…

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lekh by pratap singh negi

–                                                      – E – book e- book is a electronic version of a traditional print book. साधारण भाषा में हम कह सकते हैं कि e – book कागज पर छपी किताबों के स्थान पर कम्पुटर द्वारा टाइप किया जाकर इन्टरनेट के माध्यम से हमें पढ़ने के लिए प्राप्त किताबें…

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lekh by chander prabha sood

.=                                                  = स्त्री को समाज में दोयम दर्जा स्त्री को हमेशा से ही दोयम दर्जा दिया जाता है। पुरुषवादी सोच उस पर हमेशा हावी रही। कहने को तो वह लक्ष्मी हैं, सरस्वती है, दुर्गा-काली है पर क्या जीवन में उसे वाकई वह मुकाम मिल पाता है? शायद नहीं। जब तक पुरुष…

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lekh by aman chandpuri

=                                                 =’हिन्दी साहित्य के ‘सुदामा’ थे ‘श्रीश’ जी ‘पूर्वाचल के शब्दर्षि’ और ‘साहित्य-सुदामा’ कहे जाने वाले छायावादोत्तर युग के अन्तिम कवि पंडित सत्यनारायण द्विवेदी ‘श्रीश’ हिन्दी साहित्य जगत में अपना एक विशेष स्थान रखते हैं। इनका जन्म अम्बेडकर नगर (तत्कालीन फैजाबाद) के सेठवां गाँव में 12 अक्टूबर 1920 ई. में पंडित…

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lekh by Ankit kuma

अभी बिहार मे चुनाव की घोषणा के बाद अलग अलग राजनीतिक दलो के द्वारा अपने उम्मीदवारो की घोषणा की गई तो लगभग सभी दलो मे दल बदल की बाढ सी आ गई ।जिनको भी इस बार टिकट नही दिया गया उन्होंने रातों रात पाली बदल ली ।लगभग सभी दल बदले नेता के वक्तव्य भी एक जैसे आ रहे है। जैसे पार्टी अपने विचारों से भटक गई है।कुछ चमचे टाइप लोगों की पहुँच संगठन के ऊपर…

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"lekh by Ankit kuma"

lekh by chander prabha sood

=-                                                                         -. कन्या भ्रूणहत्या कन्या बचाओ मुहिम बहुत जोरों से चल रही है। भ्रूणहत्या का विरोध भी बहुत मुखर रूप से किया जा रहा है। सोशल मीडिया व सामाजिक संगठनों ने इस समस्या के विरोध में कमर कस ली…

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lekh by shyam snehi sahstri

प्रसंगवश   :     देश विभाजन और अराजकता का षड्यंत्र   आरक्षण आन्दोलन   गुजरात में आरक्षण आन्दोलन और इसके नौजवान नेता हाएदिक पटेल की गिरफ्तारी साथ ही उस परिपेक्ष्य में नेट सेवा पर प्रतिबन्ध |  कोई मामूली घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए | शांत और समृद्ध प्रदेश का आरक्षण के आग में धू-धू कर जलना किसी सोची-समझी गयी रणनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा तो नहीं ? बाहरी तौर पर बेशक ये आन्दोलन…

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samikshak M.M.Chandar by pustak samiksha

अँधेरे दौर में रोशनी दिखाती कविताएँ  ————————————————– -समीक्षक : एम. एम. चन्द्रा        आओ कोई ख्वाब बुनें ​ क्या अँधेरे दौर में भी कविता लिखी जायेगी ? क्या अँधेरे दौर की कविता लिखी जायेगी ? हाँ! अँधेरे दौर में भी कविता लिखी जाएगी. अरविन्द कुमार का काव्य संग्रह इस अँधेरे दौर की वह कविता है जो सिर्फ अँधेरे की गहराई और विस्तार का मुआयना ही नहीं करती बल्कि अपने समय के साथ संवाद…

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