#Lekh by Arvind Jain

अंडा खाओ और हृदय रोग बुलाओ ——-डॉक्टर अरविन्द जैन भोपाल ====================================== वैसे भारत अहिंसक देश माना जाता हैं पर आधुनिकता के कारण हमारी सभ्यता, संस्कृति और आचार,विचार और आहार पर इस प्रकार प्रहार किया हैं कि भारतीय संस्कृति को अब सांस लेना मुश्किल हो रहा हैं . हमारे खान पान में सेंध लग गयी हैं . नए नए खाद्य उत्पादन के कारण हमारे आहार में आवांछित तत्व जुड़ गए या मिला दिए गए. अब यह…

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#Lekh By Anupama Srivastava ‘Anushri’

आधुनिकता का पर्याय कपड़े नहीं !! किस तरह हम अपने सोच और कर्मों से अधिक कपड़ों से अपना परिचय देने लगे। कपड़े आवश्यक हैं , अच्छी वेशभूषा का महत्व भी कम नहीं , लेकिन आज जिस तरह सब आकर ‘कपड़ा केंद्रित’ हो गया ! हर दिन फैशन की अंधी दौड़ ने हमारे दिमाग और विवेक को जिस तरह अपनी गिरफ्त में ले लिया है इसका ख़ासा परिणाम मेट्रो सिटीज में तो दिखता ही है, नक़ल…

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#Lekh By Deepak Kumar

आलोचना लेख विकास पाल की कविता में जन के प्रति सहानुभूति : ———————————————- राजनीतिक शब्दकोश में विकास शब्द केवल जनता को बहलाने वाला भ्रमात्मक शब्द है। इसका वास्तविक अर्थ समकालीन कवि विकास पाल की कविता ‘विकास’ पढ़कर पता चलता है। उत्तरप्रदेश के फतेहपुर जनपद के एक छोटे से गाँव के रहनेवाले विकास पाल शोषित जनता से सच्ची सहानुभूति रखने वाले कवि हैं। जन समाज पर द्वेष, दम्भ, छल का प्रहार मैं सह न सकूँगा। ××××××××××××××××××××××××…

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"#Lekh By Deepak Kumar"

#Lekh By Pankaj Prakhar

एक महान सती थी “पद्मिनी” लेखक:-पंकज प्रखर एक सती जिसने अपने सतीत्व की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया उसकी मृत्यु के सैकड़ों वर्ष बाद उसके विषय में अनर्गल बात करना उसकी अस्मिता को तार-तार करना कहां तक उचित है | ये समय वास्तव में संस्कृति के ह्रास का समय है कुछ मुर्ख इतिहास को झूठलाने का प्रयत्न करने में लगे हुए है अब देखिये एक सर फिरे का कहना है अलाउद्दीन…

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"#Lekh By Pankaj Prakhar"

#Lekh by Dr. Arvind Jain

विवाह के बाद प्रेम या प्रेम विवाह आज भोपाल के समाचार पत्र में प्रथम समाचार अत्यंत दर्दनाक और वीभस्त,अकल्पनीय .कोई इतना भी गिर कर घृणित कार्य कर सकता हैं जिसने अपनी प्रेमिका की हत्या कर अपने घर में दफनाया और उसके ऊपर सीमेंट का चबूतरा बनाया और उस पर सोता रहा .एक माह के बाद खुलासा हुआ. जिससे ये तय्थ सामने आया कि लड़की के द्वारा प्रेम किया और लिव इन रिलेशन में रहना शुरू…

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"#Lekh by Dr. Arvind Jain"

#Lekh By pankaj prakhar

गौरवशाली राष्ट्र का गौरवशाली गणतांत्रिक इतिहास गणतन्त्र दिवस यानी की पूर्ण स्वराज्य दिवस ये केवल एक दिन याद की जाने वाली देश भक्ति नही है बल्कि अपने देश के गौरव ,गरिमा की रक्षा के लिए मर मिटने की उद्दात भावना है | राष्ट्र हित में मर मिटने वाले देश भक्तों से भारत का इतिहास भरा पड़ा है अपने राष्ट्र से प्रेम होना सहज-स्वाभाविक है। देश का चाहे राजनेता हो योगी हो सन्यासी हो रंक से…

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"#Lekh By pankaj prakhar"

#Lekh by Dr. Arvind Jain

चॉकलेट  वर्ल्ड चॉकेलट वर्ल्ड  हमारे शहर को वह महशूर जगह हैं जहाँ पर हर नौजवान लड़का और लड़की एक बार जाने के बाद फिर बारबार जाते .कारण एक तो एकांत और शहर से अलग थलग . इस स्थान की यह विशेषता हैं  जो युगल दोस्त जाते हैं अधिकतर जिंदगी भर के दोस्त होते हैं /बन जाते हैं .यहाँ का जाना कम से कम दो से  एक हजार तक का खर्चहोता हैं . पर यहाँ अधिकाँश…

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"#Lekh by Dr. Arvind Jain"

#Lekh by Pankaj Prakhar

आधुनिकता के इस दौर में संस्कृति से समझौता क्यों लेखक :- पंकज प्रखर आज एक बच्चे से लेकर 80 वर्ष का बुज़ुर्ग आधुनिकता की अंधी दौध में लगा हुआ है आज हम पश्चिमी हवाओं के झंझावत में फंसे हुए है |पश्चिमी देशो ने हमे बरगलाया है और हम इतने मुर्ख की उससे प्रभावित होकर इस दिशा की और भागे जा रहे है जिसका कोई अंत नही है |वास्तव में देखा जाए तो हमारा स्वयं  का…

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"#Lekh by Pankaj Prakhar"

#Lekh by Anil Ayaan

नोट फ्लू हो गया रे। मेहरारू परेशान है। मोहल्ले मे हो हल्ला है कि हर घर का काला धन फट पडा है। पत्नियां हवाला कारोबार करती जो बहुत खुश थी वो अचानक ही लक्ष्मी पूजा के बाद लक्ष्मी विसर्जन से दुखी हैं। नोट ने ऐसी चोट दी कि ना लोग बाद दिखा सकते हैं और ना ही बता सकते हैं। मेहरारू तो ठीक बाजार भी जमीन में मुंह भरा गिर पडाहै। हवाला कारोबारी तो ऐसे…

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#Lekh By Dr. Arvind Jain

सावधान  होटल का मीनू (खाने की लिस्ट) 100  गुना गन्दी टॉयलेट के ढक्कन से जबसे होटल में खाने का  चलन बढ़ा हैं उससे बीमारियां हमें गिफ्ट में मिलती हैं . वैसे आज से चालीस पचास पहले होटल में खाना खाया यानि आपने सात जातों का खाना खा लिया.कारन होटल का खाना अच्छा नहीं माना जाता था. क्योंकि वहाँ पर  बनने वाला सामान बहुत उत्तम गुणवत्ता का नहीं होता था /हैं .बनाने वाले व्यक्तिगत स्वच्छता पर…

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#Lekh by Dr. Arvind Jain

भृम पश्चिमी संस्कृति के पीछे भाग रहे हैं हम सब विषय भृम के साथ हम सब पश्चिमी संस्कृति के पीछे भाग रहे क्या ? खैर जो समझ में आया और जो प्रस्तुसकर्ता जो कुछ चाहरहा. एक दृष्टि से हम सब पश्चिमी संस्कृति के पीछे भाग रहे हैं कारण पश्चिम सभ्यता भौतिकता को सिखाती हैं ,विज्ञानं को प्रमुखता से स्वीकार करती हैं .और हम इस समय भौतिक साधन को जुटाने में इतने अधिक दीवाने हुए की…

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"#Lekh by Dr. Arvind Jain"

#Lekh By Dr. Arvind Jain

साहित्यकारों से सहयोग राशि लेकर ,साहित्यिक अधिवेशन /आयोजन करना एवम उनको सम्मान लेना कहाँ तक अनुचित ? विषय बहुत चिंतनीय ,सोचनीय हैं पर अनुकरणीय नहीं . पर ये सब पहले काम होते थे पर २१ वी शताब्दी में नवधनाड्य में यह होड़ लग गयी हैं की हमें मान ,सम्मान ,प्रशंसा चाहिए ,ख्याति चाहिए. पहले लेखक ,,कवि फटीचर होते थे ,उनके पास अपने भरण पोषण के लाले पड़े रहते थे और वे कलम घिस घिस कर…

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"#Lekh By Dr. Arvind Jain"

#Lekh By Pankaj Prakhar

आधुनिकता के इस दौर में संस्कृति से समझौता क्यों आज एक बच्चे से लेकर 80 वर्ष का बुज़ुर्ग आधुनिकता की अंधी दौध में लगा हुआ है आज हम पश्चिमी हवाओं के झंझावत में फंसे हुए है |पश्चिमी देशो ने हमे बरगलाया है और हम इतने मुर्ख की उससे प्रभावित होकर इस दिशा की और भागे जा रहे है जिसका कोई अंत नही है |वास्तव में देखा जाए तो हमारा स्वयं  का कोई विवेक नही है…

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"#Lekh By Pankaj Prakhar"

#Lekh by Dr. Arvind Jain

छत्तीसगढ़  हाई कोर्ट में हिंदी में होगा काम रायपुर .छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम फैसला लेते हुए १२ साल पहले जारी अपना आदेश वापसले लिया हैं .२००४ में जारी सर्कुलर में हाई कोर्ट व हाइ कोर्ट रजिस्ट्री कार्यालय में सिर्फ अंग्रेजी में पत्र व्यवहार का आदेश दिया गया था .इसे वापस लेने से अब न्यायिक अधिकारी व अन्य हिंदी में पत्र व्यवहार कर सकेंगे .इधर हाई कोर्ट ने हाई कोर्ट रजिस्ट्री और सुबोर्डिनटे कोर्ट को पत्रव्यवहार…

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"#Lekh by Dr. Arvind Jain"

#Lekh by Dr. Arvind Jain

नीतिवाक्यामृत का वर्तमान में उपादेयता हमारे देश और संस्कृति में सब प्रकार के ज्ञान और उसके फलभूत विवेक को विशेष महत्व दिया हैं ज्ञान और विवेक की दो कोटियां विविक्त की जा सकती हैं ,आध्यात्मिक और व्यवाहरिक .हमारे  यहाँ आध्यात्मिक ज्ञान प्रायः दर्शन का रूप लेता रहा ;यह ज्ञान मुक्ति की ओर ले जाने वाला है ,ऐसा माना गया हैं यह भी कहा गया है कि बिना ज्ञान के मुक्ति संभव नहीं हैं .दूसरी कोटि…

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"#Lekh by Dr. Arvind Jain"

#Lekh By Pankaj Prakhar

वाणी की देवी वीणापाणी और उनके श्री विगृह का मूक सन्देश वसंत को ऋतुराज राज कहा जाता है पश्चिन का भूगोल हमारे देश में तीन ऋतुएं बताता है जबकि भारत के प्राचीन ग्रंथों में छ: ऋतुओं का वर्णन मिलता है उन सभी ऋतुओं में वसंत को ऋतुराज कहा जाता है भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है की प्रथ्वी  पर जो भी दृव्य पदार्थ पाए जाते है उन में मै जल, हूँ ,वृक्षों में…

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"#Lekh By Pankaj Prakhar"

#Lekh by Dr. Arvind Jain

सम्मान ,पुरस्कार के नीचे दबा साहित्य क्या करेगा विषय शुरू करने के साथ यहाँ यह कहना बहुत लाज़िमी हैं कि यह समस्या प्राम्भ से हैं .इसका इतिहास साक्षी हैं .पर राजाओं के यहाँ कद्रदानों कि क़द्र होती थी. इसके लिए विद्वानों को राजा ,महाराजों के समक्ष खुशामद नहीं करना पड़ती थी,बल्कि उनकी काबिलियत, उनके काम ,गुण से ,ख्याति के कारण उनको सम्मान मिलता था जिसके   वे हक़दार होते थे. उनकी ख्याति,उनकी कीर्ति ,लोकप्रियता आज भी…

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#Lekh by Dr. Arvind Jain

स्त्री जाति की विशेषताएं एक पटल पर स्त्री के ऊपर बहुत चर्चा हो रही हैं ,मैं उसमे भाग लेना चाहता हूँ .इसीलिए मेने आचार्य विद्यासागर जी के ग्रन्थ मूकमाटी से सन्दर्भ लेकर अपनी बात विशिष्ठ कवियों के समक्ष रख रहा हूँ .इसमें मेरा कोई सहभागिता नहीं पर उनकी भावना को मैं अपने माध्यम से आप तक पहुंच रहा हूँ.कृपया क्षमा चाहूंगा पर बात बहुत अद्भुत और नए परिपेक्ष्य  मेँ हैं– स्त्री जाति  की कई विशेषताएं…

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#Lekh by Amit Ambashtha

अदभुत है स्मार्ट सिटी की सोच मगर मुश्किल है डगर ……………………………………………………………….. गत दिनों  स्मार्ट सिटी अभियान के तीसरे चरण में देश के 27 शहरों का चयन किया गया जिसमें कुछ बड़े शहरों के साथ आगरा , कानपुर और वाराणसी यानि जो खुद प्रधानमंत्री का चुनाव क्षेत्र है , उसे भी शामिल किया गया  ,हर बार की तरह इस बार भी विवादों का बाजार गर्म है कि उत्तर प्रदेश के चुनाव को देखते हुए यह लिया…

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"#Lekh by Amit Ambashtha"

#Lekh by Pankaj Prakhar

जैसा स्वभाव वैसी सृष्टि मानव ईश्वर का बनाया हुआ एक ऐसा अद्भुत प्राणी है जो समूची धरा को प्रभावित करता है| मानव जब जन्म लेता है तो उसमे किसी भी प्रकार की विकृति नही होती है वो एक कोरे कागज़ के समान होता है | इस जीवन रुपी कोरे कागज़ पर वो क्या लिखता है ये उस व्यक्ति के संस्कारों और संगत पर निर्भर करता है| अच्छी संगति मनुष्य में श्रेष्ठ गुणों का विकास कर…

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#Lekh by Ashok Jaiswal

अँग्रेजी भाषा में एक शब्द है PERSONALITY जिसका हिंदी में अर्थ “व्यक्तित्व” बताया जाता है….वास्तव में यह अर्थ सिरे से ही गलत है, हकीकतन व्यक्तित्व नामक नब्द को अभिव्यक्त करने के लिए अंग्रेजी में कोई सठीक अर्थ या व्याख्या है ही नहीं….!! प्राचीनकाल में “ग्रीस” के नाट्यघरों में कलाकार जिस भूमिका को निभाते थे उस पात्र को हूबहू अभिव्यक्त करता हो ऐसा एक मुखौटा अभिनय के वक्त ओढ़ लेते थे, वह मुखौटा PERSONA कहलाता था….इसी…

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"#Lekh by Ashok Jaiswal"

#Lekh by Dr. Arvind Jain

जल्लीकट्टू, बकर ईद आदि हिंसक त्यौहार नित्य मनाये हमारे लिए बहुत हर्ष का विषय हैं की केंद्र सरकार और तमिलनाडु सरकार, जो जनता द्वारा चुनी गयी सरकार को बधाई कम से कम आपके निरयण से हम अहिंसावादियों को बहुत प्रसन्नता हैं सरकार एक प्रकार से परिवार नियोजन पर नियंत्रण करने  में सफल हो गयी और हो जाएँगी हमारी मांग हैं की क्यों न इस प्रकार के त्यौहार रोज न मनाये जाये ?. लाखों देश वासी…

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#Lekh by Dr. Arvind Jain

परिवार के विखराव में क्या नारी दोषी नहीं हैं? ——————————————————————————————————————— प्रश्न बहुत रोचक ,संवेदनशील और चिंतनीय हैं . सबसे पहले परिवार पहले संयुक्त होते थे अब एकल हो गए .बिखराव का कारण नारी यानि सास,ननद,देवरानी,जिठानी,बुआ,मामी,चाची ,भतीजी आदि को माना जाता हैं .दोषी का अर्थ कारण . परिवार व्यक्ति (लड़का/लड़की) का वह स्थान होता हैं जहाँ से वह बड़ा होता हैं ,पढ़ लिखकर  योग्य होता हैं ,संस्कारित होता हैं और अपने पैरों पर खड़ा होकर अपना…

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#Lekh by Vikas Pal

दहेज : मैं उन्हें समझा रहा था, कि बेटे के विवाह में दहेज मत लो, हम समाजिक कुरीतियों को खत्म करने वाले क्रांतिकारियों में से हैं। पर वे कह रहे थे, कैसे न लें, बेटी की शादी में पाँच लाख दिए हैं और फिर हमारा लड़का तो आर्मी में है। मैं समझ नहीं पाया कि ये बेटे की शादी कर रहे हैं या बेटी की शादी में जो दिए हैं उसका तकाजा कर रहे हैं।…

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"#Lekh by Vikas Pal"

#Lekh by Pankaj Prakhar

गौरवशाली राष्ट्र का गौरवशाली गणतांत्रिक इतिहास गणतन्त्र दिवस यानी की पूर्ण स्वराज्य दिवस ये केवल एक दिन याद की जाने वाली देश भक्ति नही है बल्कि अपने देश के गौरव ,गरिमा की रक्षा के लिए मर मिटने की उद्दात भावना है | राष्ट्र हित में मर मिटने वाले देश भक्तों से भारत का इतिहास भरा पड़ा है अपने राष्ट्र से प्रेम होना सहज-स्वाभाविक है। देश का चाहे राजनेता हो योगी हो सन्यासी हो रंक से…

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