#Muktak by Mam Chand Agrwal Vasant

दोहे विषय-प्रेम -मामचंद अग्रवाल वसंत जमशेदपुर,09334805484 ढाई आखर प्रेम के,बतला गए कबीर। प्रेम भूल अब के युवा,चीर रहे चीर।। प्रेम

Read more

#Muktak by Sandeep Saras

एक मुक्तक अंतर के आंदोलित स्वर क्यों जीवन से सम्बद्ध हुए है। स्थितिप्रज्ञ हुआ हूँ सम्मुख आज खड़े प्रारब्ध हुए

Read more

#Muktak by Dinesh Pratap Singh Chauhan

“महाकवि नीरज को श्रद्धाँजलि” ””””””””””””””””””””””””””””””””””””” गीतों से,.उसने अदब की चादर को बुना था, शबाब घोल फूलों में,……. वो रिंद बना

Read more

#Muktak by Dinesh Pratap Singh Chauhan

“महाकवि नीरज को भावभीनी श्रद्धाँजलि” ”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””” भारत में, गीतों का,….. राजकुमार चला गया, ग़ज़लों की कोमलता का,.. सुकुमार, चला गया,

Read more