#Muktak by Kundan kumar Mishra

आसमां के सितारों से मैं होकर के निकला हूँ, मोहब्बत के आगे उसे भी खो-कर के निकला हूँ ! मैं कैसे रहता हूं, ये तुमको क्या खबर होगी? बेवफाई के हर लम्हो पर मैं रो-कर के निकला हूँ !!

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#Muktak by Kavi Nadeem Khan

दिल पत्थर के हुए तो क्या एक दिन शीशे में बदल ही जाएंगे पत्थरदिल लोग एक दिन बर्फ की तरह पिघल ही जाएंगे मुझमे इतनी हिमाकत कहाँ “नदीम” बस यादें लिए फिरता हूँ ठोकरों की मार खा-खाकर हम भी एक दिन आगे निकल ही जाएंगे

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#Muktak by Dr. Krishan Kumar Tiwari

पानी भी नहीं पाते हैं काम करने वाले, अंगूर खा  रहे  हैं  आराम  करने वाले, कुर्सी पे बैठे -बैठे दिनभर हवा बनाते— मेहनतकशों को केवल बदनाम करने वाले।  डॉ. नीरव   काम बदलेगा दाम बदलेगा, मुल्क का इंतजाम बदलेगा, देख लेना तुम अपनी आंखों से राजा बदला गुलाम बदलेगा।  डॉ.नीरव

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"#Muktak by Dr. Krishan Kumar Tiwari"

#Muktak by Ram Shukla

लेकर इक चाह ह्रदय मे नई राह का गठन करें, तोड़ तिमिर भवबन्धन के इक नई राह का सृजन करें | खवाबों मे इतनी ताकत ला कि हर क्षण नूतन द्वार खुलें, परिवर्तन के द्योतक बन अब स्वयं मार्ग को प्रशस्त करें | भूख भय और जड़ता का अब किंचित भी न स्थान रहे, तुम गढ़ो नई राह ऐसी जो प्रगति का गुणगान करे मौलिक रचना – राम शुक्ला – जाफरगंज 9795198937

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"#Muktak by Ram Shukla"

#Muktak by Manish Soni

दरख्त के सूखे पत्ते ही झरे नहीं हैं अभी, जो भी मिले हमें वो खरे उतरे नहीं हैं अभी, ऐ जिंदगी !! प्लीज़, न देना अब कोई नया जख्म……. जो भी दिये हैं वो ही भरे नहीं हैं अभी !!!!  #__मनीषसोनी  

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"#Muktak by Manish Soni"

#Muktak by Manish Soni

पाकिस्तान की तरफ से फिर से सीज फायर के उल्लंघन पर——-   हो रहा है पुलकित खुद ही खुद में छुप कर हमला बोल रहा, भारत के वीर जवानों को जो हल्के में तू तोल रहा, ऐ पाक! बंद कर दे तू अब ये बचकानी हरकत करना, अभी मान जा नादां वरना काल तेरा मुँह खोल रहा !!!_मनीषसोनी

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"#Muktak by Manish Soni"

#Muktak by Mohit Jagetiya

तुम  दूर  भी जाओ  हम  तुम्हारे पास आएंगे । खुशियों  की झोली कभी तुम्हारे पास लाएंगे । जैसा भी  साथ मिला है आपका इस जिंदगी में , आपकी  ये दोस्ती हम कभी भूल नही पाएंगे । *** कभी गीत कभी गजल कभी छंद बनों । हल्की  हल्की  मुस्कान  से  मन्द  बनों । तुम जीवन ऐसा जिओ स्वाभिमान का, कल  के  तुम  स्वामी  विवेकानंद बनों। मोहित

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"#Muktak by Mohit Jagetiya"

#Muktak by Mahendra Mishra

सांझ की लालिमा से जब ये सारा जग सुशोभित है, उतारे आरती मंदिर में देवों की पुरोहित है, तेरी उड़ती हुई जुल्फों और मुस्कान पे प्यारी, तुम्हारे सामने गाता ये ‘मोहित’ तुमपे मोहित है। तुम्हारे साथ जुड़ करके तुम्हारा नाम बन जाऊँ, जो सुंदर स्वर्ग से भी हो वो पावन धाम बन जाऊँ, मेरे गीतों की वंशी में बनो प्रिय राधिका अब तुम, मैं तुममें इस कदर डूबूँ तुम्हारा श्याम बन जाऊँ। रचनाकार- महेंद्र मिश्र…

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"#Muktak by Mahendra Mishra"

Muktak by Gaurav Tripathi

बड़ी खामोश सी हो गई है जिन्दगी आकर बहला दो इसे, भ्रम टोड़कर सारी दुनिया का अब अपना लो इसे, जब से तुम गए हो छोड़कर मुझको इस दुनिया में, सजल हैं अश्रु से अब नयन आके दुआ दो इसे..!!   ***   याद मेरी भी उसको आती होगी, ख्यालों में मेरे वो डूब तो जाती होगी, फिर कंपकंपाते होंगे होठ उसके भी, और सारी रात यूं ही बीत जाती होगी.. #गौरव

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"Muktak by Gaurav Tripathi"

#dohe (Muktak ) by Mukesh Marwari

कुछ राजस्थानी दोहे:-   गणगौर्यां चली सासर,  ईसर जी को साथ | दोन्युँ नाचण लागर्या, पकड़-पकड़ कर हाथ ||     रजपुतानों आज बस्यो, कई बरसां पेली | मरगा राणा मोकळा, कई मरगा माली ||     बिनणी देखी सोवणी, और हाथों कि चुड़ी | साहब फूँकी काया नं, पी कर दारु बीड़ी  ||     प्रेम प्रतीक मीरा ही, और ढ़ोलामारू | प्रित मं मरगा तब ढोला,और अब पिगा दारु |   ✍कवि मुकेश…

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"#dohe (Muktak ) by Mukesh Marwari"

#Muktak by Mahendra Mishra

भले दो लाख आँसू तुम सदा हंस के पियूँगा मैं, करोगी बेवफाई तुम प्यार फिर भी करूँगा मैं, सदा है जो कहा तुमसे वही फिर आज कहता हूँ, तुम्हारा था, तुम्हारा हूँ, तुम्हारा ही रहूँगा मैं। मिले जो घाव ठोकर पे वो सीना चाहता हूँ मैं, तेरे नयनों के हर आँसू को पीना चाहता हूँ मैं, तुम्हारे दिल की नगरी पे प्रिये अधिकार करके अब, तुम्हारा रहनुमा होकर के जीना चाहता हूँ मैं।

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"#Muktak by Mahendra Mishra"

#Muktak by Gayaprasad Mourya Rajat

  चलो सच कह ही देता हूँ . ================= आसमान के सूरज को धरती का दीप दिखाना चाहता हूँ , टुकड़े -टुकड़े बटी हुई है   जग में  प्रीति जगाना चाहता हूँ . मेरे दोषों को मत देखो    मैं तो एक बुलबुला पानी का हूँ , मैं दम्भी सागर को एक  बूँद का मान बताना चाहता हूँ . रजत – आगरा

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"#Muktak by Gayaprasad Mourya Rajat"

#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

तेरे बगैर मैं तो तन्हा जिया करता हूँ! शामों-सहर मैं तुमको याद किया करता हूँ! जिन्द़गी थक जाती है करवटों से लेकिन, नींद में भी तेरा मैं नाम लिया करता हूँ!

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"#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev"

#Muktak by Manish soni

इस रंग बदलती दुनिया के, इंसान भी बड़े निराले हैं, बाहर बाहर से उजले हैं ये, पर अंदर से काले हैं, सच्चा व्यक्ति कोई न दिखता, किस पर आज यकीन करें??? सच का कोई निशां नहीं, बस भरे झूठ के प्याले हैं!!!

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"#Muktak by Manish soni"

#Muktak by Saurabh Dubey Sahil

चाँद बादलों में छुपे छुपे चकोर हो गया , बात मुँह में रखी फिर भी शोर हो गया , कुछ देर हम उनके ख्यालों में खो क्या गये, हमें पता ही नहीं चला कि कब भोर हो गया । ~ सौरभ दुबे ” साहिल”

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#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

मुझको तेरी याद कहाँ फिर से ले आई है? हरतरफ ख्यालों में फैली हुई तन्हाई है! भटके हुए हैं लम्हें गम के अफसानों में, साँसों में चुभती हुई तेरी बेवफाई है!

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#Gazal by Aditya Mourya

जिसे मैने अपना खुदा माना था आज वो ही मुझे भुला के बैठी है..। ज़िंदा हूं आज भी उसकी हसीन यादों मे… किसी और को वो अपना बना के बैठी है। कर के मेरे इस  दिल के टुकड़े टुकड़े वो अपना दिल किसी और से लगा बैठी है…। कल तक जो चलती थी हाथों में हाथ लेकर आज वो ही अपना हाथ किसी और को थमा बैठी है। कवि आदित्य मौर्या कंटालिया

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"#Gazal by Aditya Mourya"

#Muktak by Manish Soni

फकत इक बार की मेहनत, से जो तुम हार जाओगे, नई राहों, में चलने से, अगर तुम जी चुराओगे, ये उम्मीदों, की किरणें हैं, इन्हें पहचानना सीखो, पड़ेगी जब ये किस्मत पर, जहाँ में जगमगाओगे || #मनीष

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"#Muktak by Manish Soni"

#Muktak by Lovelesh Dutt

शब्दों के अलंकरण से कविता नहीं बनती। बड़े कवि के अनुकरण से कविता नहीं बनती।। “शीश उतारे भुईं धरे” का भाव यदि नहीं है, केवल कोरे व्याकरण से कविता नहीं बनती। ………………….डॉ० लवलेश दत्त(बरेली)

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#Muktak by Chandrakanta Siwal

मुक्तक माणिक ******* ऊँची- ऊँची कुर्सी की फैली बड़ी बिमारी है। गधे सियारों संग में वाचालों की अय्यारी है।। इसका झूठ उसका सच एक ख्याल सबका, मन्त्र मुग्ध सब आपस में ये कैसी लाचारी है। ************* मन से पढ़ती मन की बात हूक प्रेम की भाषा है।। आँख आँख में करती बात मूक प्रेम की भाषा है। प्रेम ही केवल एक विकल्प हर मर्ज़ की दवा दिल पे घाव लगे जब फूक प्रेम की भाषा…

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"#Muktak by Chandrakanta Siwal"