#Muktak by Vijay Narayan Agrwal

–:दोहा मुक्तक:–1 देश काल की लब्धता,ध्रुपद मुकुल सन्ताप, ऐसे में सौभाग्य से,जनक विमोहित जाप, चले खुशी का हल लिये,”भ्रमर”विभव के

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Muktak by Kavi D M Gupta

-एक मुक्तक——–   हे वीणावादिनी  माँ मुझको  ज्ञान  बुद्धि  से  भर  देना। नित गाऊं  भारत  का  गौरव  ऐसा  मुझको  स्वर 

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#Muktak by Vijay Narayan Agrwal

–:मुक्तक:– 1 उत्कंठा अभिलाषा बिषयी,नही बुलाती राम को, रटती है बेकार की बातें,और गंवाती चाम को, जगा “भ्रमर” मृगतृष्णा,उर मेंग

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