#Muktak by Annang Pal Singh

  सदगुण हों यदि शुरू से , लें अपनापन खींच ! आत्मीयता , धैर्य को , पैदा करते सींच. !! पैदा करते सींच , न आती मन अधीरता ! सफल पारिवारिक जीवन की खिले वीरता !! कह ंअनंग ंकरजोरि,निकालो सारे दुर्गुण. ! शनैः शनैःभर लेउ खींचकर अन्दर सदगुण. !! ** स्थाई सुख ले उठे , ज्यों जल माहिं सरोज ! सावधान होकर करो , घर में सुख की खोज !! घर में सुख की खोज,करो…

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"#Muktak by Annang Pal Singh"

#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

दर्द के दामन में चाहत के कमल खिलते हैं! अश्क की लकीर पर यादों के कदम चलते हैं! रेंगते ख्यालों में नजर आती हैं मंजिलें, जब भी निगाहों में ख्वाबों के दिये जलते हैं!

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"#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev"

#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

तेरी याद से खुद को आजाद करूँ कैसे? तेरी चाहत में खुद को बरबाद करूँ कैसे? लब्ज भी खामोश हैं बेबसी की राहों में, तेरी मैं तकदीर से फरियाद करूँ कैसे?

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#Muktak by Lal Bihari Lal (Lal Kala Manch)

पर्यावऱण ** आबादी के दंश से पर्यावरण खराब । आबादी को रोक के, धरा करेंगे साफ।1। पेड़ों में ब्रम्हा ,विष्णु ,पेड़ो में श्रीराम। वन बचाने खातिर अब,लाल करो कुछ काम।2। जीव रहे तब तक जिंदा,जब तक इनमें जान। लाल खातिर है पादप,जस मानों भगवान।3। वन धरा से मत काटें ,इसे लगाना सीख । वरना सेहत ना रहे ,मांगे मिले न भीख।4। नेता भाषण रोज दे, पार्क में सरेआम।। उसके जाते हो गया ,सारा काम तमाम।5।…

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"#Muktak by Lal Bihari Lal (Lal Kala Manch)"

#Muktak by Annang pal Singh

खुशियाँ हृदय विचारिये , खुशियाँ आतीं दौड़ ! दुख का किया विचार तो,दुख का बनता जोड़ !! दुख का बनता जोड़, सोच की ताकत. भारी ! सकारात्मक सोच हेतु , करिये तैय्यारी !! कह ंअनंग ंकरजोरि,सोच पथ चलती दुनियाँ ! दुख सोचो दुख मिले , खुशी से मिलतीं खुशियाँ !!   : आत्मीयता , समझ वा गहन प्रेम की राह ! इससे अंतर्जगत में पैदा होती चाह. !! पैदा होती चाह , स्वभाव न बने अचानक…

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"#Muktak by Annang pal Singh"

#Muktak by Sandeep Saras

बेबाक   अनचाहे   अनुबन्ध  मुझे  स्वीकार  नहीं।   प्रियता पर प्रतिबन्ध  मुझे स्वीकार नहीं।।   जो     अपना    लगता   है   अपना लेता  हूँ,   शर्तों  पर  सम्बन्ध  मुझे  स्वीकार  नहीं।।   संदीप सरस,बिसवां 9450382515

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"#Muktak by Sandeep Saras"

#Muktak by Annang Pal Singh

जिम्मेदारी स्वयं की ले लो अपने हाथ ! फिर तुम खुद चल पड़ोगे निज सपनों के साथ !! निज सपनों के साथ,जगेगी उन्नत चाहत ! विकसित होगी प्रवल कामना जो दे राहत !! कह ंअनंग ंकरजोरि,शक्ति है अंदर भारी ! ले लो अपने हाथ स्वयं की जिम्मेदारी !! अनंग पाल सिंह भदौरिया ग्वालियर   जन्मा हूँ जिस देश में , उसकी शान महान. ! हिमगिरि सा पुण्यात्मा , सुरसरि सा वरदान !! सुरसरि सा वरदान…

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"#Muktak by Annang Pal Singh"

#Muktak by Mithilesh Rai ‘ Mahadev ‘

तुम मेरी यादों में आते किसलिए हो? तुम मेरे दर्द को बुलाते किसलिए हो? वक्त की दीवारों में दफ्न हूँ कबसे, तुम मेरी रूह को रुलाते किसलिए हो?

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"#Muktak by Mithilesh Rai ‘ Mahadev ‘"

#Muktak by Sandeep Saras

तुम   परेशान   हो ,  हम   परेशान   हैं। तुम  भी  नादान  हो  हम भी नादान हैं।   जो भी आया  यहां  उसको जाना पड़ा, तुम भी मेहमान हो ,हम भी मेहमान हैं।।  – संदीप सरस~9450382515

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"#Muktak by Sandeep Saras"

#Muktak by Krishan Kumar Tiwari Neerav

स्वार्थ जब तक नहीं है नहीं पूँछता, कोई गम दूसरे का नहीं बूझता, इतने मतलब में है मस्त हर आदमी — मुझको लगता उसे कुछ नहीं सूझता ** गहरे भ्रम में छोड़ दिया है हमको जग निर्माता ने, सच से हमको दूर रखा है बिल्कुल जीवनदाता ने, सोते सपना, जगते सपना, सपना ही हम देख रहे ; सपनों में ही रखा है हमको पूरी तरह विधाता ने। **

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"#Muktak by Krishan Kumar Tiwari Neerav"

#Muktak by Annang Pal Singh

समय अवधि वा कार्यमें , व्यवहारिकता लाव ! वरना पैदा करेगी , यह मन माहिं तनाव. !! यह मन माहिं तनाव , देय अवसाद. घनेरा ! अतः समय के बंधन. पर मत खींचो घेरा !! कह ंअनंग ंकरजोरि,रिक्त कुछ करो वक्त तय ! फिर तनाव ना देगा तुमको, कभी ये समय. !!     पने को पहचानना अाध्यात्म आधार ! अपने में उस रूप को देखो भली प्रकार !! देखो भली प्रकार,साथ है वह नित…

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"#Muktak by Annang Pal Singh"

#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

दर्द तेरा कायम है याद भी आ जाती है! #शाम_ए_तन्हाई में बेइन्तहाँ सताती है! हंसने की जब भी तमन्ना होती है दिल में, ख्वाबों की चुभन से मेरी आँख भर आती है!

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"#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev"

#Muktak by Annang Pal Singh

प्रसन्नता की शत्रु हैं , इच्छायें अतिरिक्त. ! कम से कम यदि कामना,तो जन प्रेमासिक्त !! तो जन प्रेमासिक्त, कामनायें दुख देतीं ! चिन्ता, भय ,अवसाद, मुफ्त में जग से लेतीं !! कह ंअनंग ंकरजोरि,कामना और खिन्नता! दोनों एकइ रूप. हड़प करलें प्रसन्नता !! ** अभिमानी यदि देवता , तो वह दानव जान ! शिष्ट , नम्र, व्यवहारयुत, मानव देव समान. !! मानव देव समान , अहं जिसने ठुकराया ! देव ,दनुज बन जाय,अहं यदि…

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"#Muktak by Annang Pal Singh"

#Muktak by Mithilesh Rai ‘ Mahadev ‘

जब भी ख्यालों में यादों की लहर आती है! #दर्द की बेचैनी में रात गुजर जाती है! अश्कों में घुल जाता है ख्वाबों का आशियाँ, मेरी जिन्दगी को तन्हाई तड़पाती है!

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"#Muktak by Mithilesh Rai ‘ Mahadev ‘"

#Muktak by Dr. Krishan Kumar Tiwari Neerav

मुक्तक गिनतियां उल्टी गिनवा रही भुखमरी, दूध  बच्चों का छुड़वा रही  भुखमरी, कच्छियाँ तक भी जिनसे संभलती नहीं नौकरी उनसे  करवा  रही भुखमरी। ** सब रहें प्रेम से राग पैदा करो, पत्थरों में भी अनुराग पैदा करो, अपने तप से जला दो घृणा द्वेष को मंत्र से फूँककर आग पैदा करो! ** तुम जहां तक चलो मैं वहां तक चलूं, साथ हो आपका  मैं जहां तक  चलूं, शर्त  है  बींच में  साथ मत  छोड़ना —…

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"#Muktak by Dr. Krishan Kumar Tiwari Neerav"

#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

मेरा ख्याल तेरी यादों से डर जाता है! मेरे दर्द को दिल में गहरा कर जाता है! जब भी करीब आती हैं बारिशों की बूँदें, मौसम चाहतों का अश्कों से भर जाता है!

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#Muktak by Suresh Tiwari

**   एक मुक्तक  **   आगे है परसाद का वितरण, पीछे चलता चीर हरण….!!   सौम्य मुखौटों के भीतर में, अध सोये हैं कुंभकरण….!!   मानव मास का भोग लगाकर, जो हैं बिराजे गद्दी पर……!!   बुद्ध के उपदेशो का  देंगे, लम्बे चौड़े वो उद्धरण……!!   सुरेश सैनिक…….!! 9236717074    

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"#Muktak by Suresh Tiwari"

#Muktak by Kavi Nilesh

सारी कि सारी सभ्यता पानी में आ गई साड़ी से चली नारी अब जवानी में आ गई ये वक्त का प्रहर कैसा रुप ले लिया छुप के नहाने वाली अब सड़कों पे आ गई ** ये जवानी मैं तुमको,  उपहार दे दूं जिंदगी  है मेरी,  मैं तुमको सार दे दूं सफर हैं मेरे पर मैं थकती नहीं हूं । थककर भी  मैं, तुमको बहार दे दूं ये जवानी मैं तुमको,  उपहार दे दूं

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"#Muktak by Kavi Nilesh"

#Muktak by Mithilesh Rai ‘ Mahadev ‘

तुम मेरी चाहतों में हरवक्त बेशुमार हो! तुम मेरी धड़कनों में आ जाते हर बार हो! अब मुश्किल बहुत है रोकना तेरे सुरूर को, तुम मेरी निगाहों में ठहरा हुआ खुमार हो!

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"#Muktak by Mithilesh Rai ‘ Mahadev ‘"

#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

मेरी नजर के सामने साकी रहने दो! हाथों में अभी जाम को बाकी रहने दो! धधक रही हैं तस्वीरें यादों की दिल में, अश्कों में अभी दर्द की झांकी रहने दो!

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"#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev"

#Muktak by Annang Pal Singh Bhadouria

मानव को जीवित रखे , शक्ति श्रेष्ठ विश्वास ! अगर हिला विश्वास तो, छूटे जीवन आश. !! छूटे जीवन आश , अंत जीवन का मानो ! श्रेष्ठ शक्ति विश्वास सजाकर. रखो सुजानो !! कह ंअनंग ंकरजोरि,यही लोगों के अनुभव ! है विश्वास शक्ति ही जिससे जीवित. मानव. !! ** जो जो चीजें मिलाकर , विधि ने रचा मनुष्य ! उन्हें हटा दो अगर तो, वह मिट जाय अवश्य !! वह मिट जाय अवश्य , श्रेष्ठ…

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"#Muktak by Annang Pal Singh Bhadouria"

#Muktak by Dr. Krishan Kumar Tiwari Neerav

मुक्तक ( एक ) कुछ भी कहते हुए सोचना पड़ रहा, दर्द ही दर्द का सामना पड़ रहा, कितनी बिगड़ी व्यवस्था है जिस देश में भीख बच्चों को हो मांगना पड़ रहा! ( दो ) हमको  तकलीफ है और तुम सो रहे अपने खातिर जहर बीज क्यों बो रहे ठीक है फिर इलेक्शन में आओगे तुम तुमसे पूछूंगा उद्धिग्न क्यों हो रहे? (तीन) टूटकर गर्भ सारा बिखर जाएगा राजनीतिक नशा मित्र झर जाएगा यदि गरीबों…

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"#Muktak by Dr. Krishan Kumar Tiwari Neerav"