#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

तेरे बगैर मैं तो तन्हा जिया करता हूँ! शामों-सहर मैं तुमको याद किया करता हूँ! जिन्द़गी थक जाती है करवटों से लेकिन, नींद में भी तेरा मैं नाम लिया करता हूँ!

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#Muktak by Manish soni

इस रंग बदलती दुनिया के, इंसान भी बड़े निराले हैं, बाहर बाहर से उजले हैं ये, पर अंदर से काले हैं, सच्चा व्यक्ति कोई न दिखता, किस पर आज यकीन करें??? सच का कोई निशां नहीं, बस भरे झूठ के प्याले हैं!!!

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#Muktak by Saurabh Dubey Sahil

चाँद बादलों में छुपे छुपे चकोर हो गया , बात मुँह में रखी फिर भी शोर हो गया , कुछ देर हम उनके ख्यालों में खो क्या गये, हमें पता ही नहीं चला कि कब भोर हो गया । ~ सौरभ दुबे ” साहिल”

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#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

मुझको तेरी याद कहाँ फिर से ले आई है? हरतरफ ख्यालों में फैली हुई तन्हाई है! भटके हुए हैं लम्हें गम के अफसानों में, साँसों में चुभती हुई तेरी बेवफाई है!

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#Gazal by Aditya Mourya

जिसे मैने अपना खुदा माना था आज वो ही मुझे भुला के बैठी है..। ज़िंदा हूं आज भी उसकी हसीन यादों मे… किसी और को वो अपना बना के बैठी है। कर के मेरे इस  दिल के टुकड़े टुकड़े वो अपना दिल किसी और से लगा बैठी है…। कल तक जो चलती थी हाथों में हाथ लेकर आज वो ही अपना हाथ किसी और को थमा बैठी है। कवि आदित्य मौर्या कंटालिया

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#Muktak by Manish Soni

फकत इक बार की मेहनत, से जो तुम हार जाओगे, नई राहों, में चलने से, अगर तुम जी चुराओगे, ये उम्मीदों, की किरणें हैं, इन्हें पहचानना सीखो, पड़ेगी जब ये किस्मत पर, जहाँ में जगमगाओगे || #मनीष

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#Muktak by Lovelesh Dutt

शब्दों के अलंकरण से कविता नहीं बनती। बड़े कवि के अनुकरण से कविता नहीं बनती।। “शीश उतारे भुईं धरे” का भाव यदि नहीं है, केवल कोरे व्याकरण से कविता नहीं बनती। ………………….डॉ० लवलेश दत्त(बरेली)

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#Muktak by Chandrakanta Siwal

मुक्तक माणिक ******* ऊँची- ऊँची कुर्सी की फैली बड़ी बिमारी है। गधे सियारों संग में वाचालों की अय्यारी है।। इसका झूठ उसका सच एक ख्याल सबका, मन्त्र मुग्ध सब आपस में ये कैसी लाचारी है। ************* मन से पढ़ती मन की बात हूक प्रेम की भाषा है।। आँख आँख में करती बात मूक प्रेम की भाषा है। प्रेम ही केवल एक विकल्प हर मर्ज़ की दवा दिल पे घाव लगे जब फूक प्रेम की भाषा…

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#Muktak by Saurabh Dubey Sahil

मुक्तक खट्टी मीठी यादों का सिलसिला अच्छा रहा , उम्र से बडा होता गया पर  दिल से बच्चा रहा , तेरे नाम से दुनिया में जो मिला वही झूठा , एक तू और तेरा नाम ही हरदम सच्चा रहा।

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#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

आज भी मैं तेरी राहों को देखता हूँ! बेकरार वक्त की बाँहों को देखता हूँ! जुल्मों सितम की दास्ताँ है मेरी जिन्दगी, आरजू की दिल में आहों को देखता हूँ!

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#Muktak by Jasveer Singh Haldhar

–जिंदगी ——————- जन्म मृत्यु का सिलसिला अनवरत चलता रहेगा ।। सुबह दिनकर निकलकर शाम को ढलता रहेगा ।। ना बच पाया है कोई माया के जंजाल से । जिंदगी से जिंदगी का दीप ये जलता रहेगा ।। हलधर -9412050969

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#Muktak by Devendra Kumar Dubey

माँ भारती के मान का,अभिमान हैं ये बेटियाँ, इस धरा के गान का,स्वाभिमान हैं ये बेटियाँ, दो कुलो में साथ रह,दीपक जलाती प्यार का माता-पिता के प्यार का, सम्मान हैं ये बेटियाँ, #_____देवेन्द्र

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#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

साथ नहीं हो लेकिन क्यों हमसे रूठ गये हो? राह-ए-जिन्द़गी में तुम हमसे छूट गये हो! बढ़ती ही जा रही हैं अपनी दूरियाँ दिल की, हाथ की लकीरों में क्यों हमसे टूट गये हो?

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#Muktak by Mukesh Marwari Navalpuri

इन्सानियत से बड़ी मजहब कि बिमारी हो गयी | पुरुषों के व्यक्तित्व पर नारी भारी हो गयी | हमने बैठा दिये है चुन-चुन कर नेता एेसे | अब लगता है घोड़ों कि जीर्ण पर गधों कि सवारी हो गयी | ✍  कवि मुकेश मारवाडी़

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#Muktak by Rudra pratap Tejas

इस जमाने में मैने एक बात देखी है । हर सख्श ने ही अपनी रोटिया सेकी है । कल जिसके घर में सोया था शहजादा , कुछ उदास उस घर में आज बेटी है । ——रूद्र प्रताप “तेजस”

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#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

मेरे नसीब क्यों मुझको रुलाते रहते हो? हरवक्त जिन्दगी को तुम सताते रहते हो! नाकाम हो गया हूँ मैं हालात से लेकिन, बेरहम सा बनकर क्यों तड़पाते रहते हो?

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#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

मेरे नसीब क्यों मुझको रुलाते रहते हो? हरवक्त जिन्दगी को तुम सताते रहते हो! नाकाम हो गया हूँ मैं हालात से लेकिन, बेरहम सा बनकर क्यों तड़पाते रहते हो?

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#Muktak by Tej vir Singh Tej

माला की तारीफ़ करें सब,फूलों का दुःख ना देखा। जिसे सजाने को फूलों की नष्ट-भ्रष्ट जीवन-रेखा। ख़ुशी जीत की ‘हार’ बिना लगती है यहाँ अधूरी-सी। पर हारे का दुःख सागर-सा जीते को हंसता देखा। तेजवीर सिंह “तेज”✍ 🌻 ब्रज वन्दन 🌻 बृषभानु लली बरसाने में,नन्द नन्दन जू नन्दगाम विराजै। कोटिक काम निसार देओ,एक लाल की ठोड़ी पै हीरा साजै। मनमोहन नै मन मोह लियौ,मति मन्द भई मनवा मग भाजै। मनमोहक मुरली मनहर की,मदमस्त करै जब…

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"#Muktak by Tej vir Singh Tej"

#Muktak By Mithilesh Rai Mahadev

रात जाती है फिर से क्यों रात आ जाती है? धीरे—धीरे दर्द की बारात आ जाती है! भूला हुआ सा रहता हूँ चाहतों को लेकिन, करवटों में यादों की हर बात आ जाती है!

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"#Muktak By Mithilesh Rai Mahadev"

#Muktak By Alok Trivedi

हास्य कुंडली महँगाई ने किया बुरा, पहलवान का हाल , चूहे घर से भाग गए , मिला न आटा दाल , मिला न आटा दाल , कि बीबी चिल्लाती है . पहलवान को छोड़ , मायके भग जाती है , कहत कवि आलोक , मूँछ में लगा उमेठा, मजबूरी में पहलवान अब कवि बन बैठा

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"#Muktak By Alok Trivedi"

#Muktak By Mithilesh Rai Mahadev

दर्द तन्हा रातों की कहानी होते हैं! गुजरे हुए हालात की रवानी होते हैं! होते नहीं हैं रुखसत यादों के सिलसिले, दौरे-आजमाइश की निशानी होते हैं!

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"#Muktak By Mithilesh Rai Mahadev"