#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

हर शख्स निगाहों में प्यार लिए रहता है! हर वक्त जेहन में खुमार लिए रहता है! जब कभी रुक जाती है राह मंजिलों की, दर्द का जिगर में बाजार लिए रहता है!

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"#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev"

#Muktak by Mithilesh Rai ‘ Mahadev ‘

जब भी यादों की तस्वीर नजर आती है! तेरे ख्यालों की जागीर नजर आती है! मैं जब भी ढूँढता हूँ जिन्दगी की राहें, तेरी बाँहों में तकदीर नजर आती है!

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#Muktak by Annang Pal Singh

अवसर वा तैय्यारियों का जो मेल मिलाप. ! किस्मत बनकर उभरता इसको समझो आप !! इसको समझो आप, करो भरसक तैय्यारी ! अवसर जब भी आये , बन जाये हितकारी !! कह ंअनंग ंकरजोरि,सतत उपयोगी श्रमकर ! देंगें लाभ. तुम्हें , आयेंगे जो भी अवसर. !! अनंग पाल सिंह भदौरिया ग्वालियर

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"#Muktak by Annang Pal Singh"

#Muktak by Annang Pal Singh Bhadoriya ‘ Annang’

कर्मशीलता, उदासी , का ना कोई योग. ! वह उदास रहते नहीं , कर्मशील जोलोग !! कर्मशील जो लोग, सदा उत्साह सँजोते ! लोग आलसी और पृमादी रहते रोते !! कह ंअनंग ंकरजोरि,उचित ना दीन हीनता ! साथ साथ ना रहे, उदासी, कर्मशीलता !! अनंग पाल सिंह भदौरिया ग्वालियर

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#Muktak by Amit kaithwar mitauli

शरीर बेजान है फिर भी चलने का हुनर जानता है. खुद गुमशुदा है फिर भी हर एक शहर जानता है. आज हम लोग पैसों की कदर नहीं करते लेकिन . हर घर में एक बूढा है जो पैसों की कदर जानता है. – अमित कैथवार मितौली – – 9161642312 –

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#Muktak by Dr. Sulaxna Ahlawat

बिना मोहब्बत किये यहाँ किस्सा ऐ मोहब्बत कौन लिखता, चोट ना लगती दिल पर तो शब्दों में वो दर्द कहाँ दिखता। लाख मना करे कोई बिना मोहब्बत किये लिखता हूँ मैं, पर ईमान तो उसका भी जानता है सच कब तक है छिपता।  –   डॉ सुलक्षणा अहलावत  

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#Muktak by Dr. Krishan Kumar Tiwari Neerav

हाथ में सत्ता है किसके साथ में किसके जमाना, तब तलक ही है ये दुनिया जब तलक है आबदाना, कौन तीरंदाज कितना इस जहां में जानता हूं– बोलता है वह शिकारी लक्ष्य पर जिसका निशाना ** सूरज निकल रहा है कैमरे की नजर में, दीपक भी जल रहा है कैमरे की नजर में, हैरत है मुझे फिर भी चोरी नहीं रुकती— हर काम हो रहा है कैमरे की नजर में ! ** उठाने को तो…

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Haiku by Ishq Sharma

हाइकु ऐ इश्क़ ** लहलहाती। हरी भरी धरती।। खिलखिलाती।।।1   मुस्काती कली। गुड़िया खिली खिली।। खेलेने चली।।।2   वन जंगल। बिटिया है चिड़िया।। चहके जग।।।3   दूषित वायु। घर घर वाहन।। कष्ट में पृथ्वी।।4   मिट्टी का तन। भंवरा मेरा मन।। तुम सुमन।।।5   पिंजरा बंद। रो रही चुनमुन।। कोई “चूँ” सुने।।।6   घड़ी की सुई। चुभता पल पल।। रोक दे कोई।।।7   कोई क्यू सुने? सारे काने बहरे।। कहे हमे क्या.???8   सुख त्याग…

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#Muktak by Annang Pal Singh Bhadoriya ‘ Annang’

इच्छायें या इरादे , दें भविष्य. में ठेल ! वर्तमान आनंद को ,अंदर भरो धकेल. !! अंदर भरो धकेल , जियो गरिमामय जीवन ! इच्छायें आनंदहीन. कर देती है मन. !! कह ंअनंग ंकरजोरि,कामनायें तड़पायें ! इसीलिये बाहर कर दो, निकाल इच्छायें !!

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Muktak by Annang pal Singh

क्त इकाई से बनी , है जीवन की डोर ! व्यर्थ. नष्ट मत कीजिये, देखो इसकी ओर !! देखो इसकी ओर , व्यर्थ मत इसे गँवाओ ! श्रेष्ठ मनुज तन मिला,इसे सदराह चलाओ !! कह ंअनंग ंकरजोरि,बड़ी इसकी पृभु ताई ! श्रेष्ठ कार्य हित करो नियोजित वक्त इकाई !! अनंग पाल सिंह भदौरिया ग्वालियर म. पृ.⁠⁠⁠⁠

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"Muktak by Annang pal Singh"

#Muktak by Mithilesh Rai ‘ Mahadev ‘

तेरे लिए मैं तन्हा होता जा रहा हूँ! तेरे लिए मैं खुद को खोता जा रहा हूँ! अश्कों में मिल गयी हैं यादों की लहरें, तेरे लिए मैं तन्हा रोता जा रहा हूँ!

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#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

कभी कभी मैं खुद से पराया हो जाता हूँ! दर्द की दीवार का एक साया हो जाता हूँ! जब बेखुदी के दौर से घिर जाता हूँ कभी, नाकाम हसरतों का हमसाया हो जाता हूँ!

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#Gazal by Peeyush Gupta Gagan

तुझको  मुझमे खुदा दिखाई दे मेरी हर इक वफ़ा दिखाई दे   जो सभी के गमों पे हँसता हो अब वो रोता हुआ दिखाई दे   मुझको मेरा नहीं दिखे कोई हर कोई आपका दिखाई दे   मेरी अब एक ही तमन्ना है जग ये सुख से भरा दिखाई दे   खामियाँ सबकी ढूँढने वाले तुझको तेरी खता दिखाई दे   तेरे दिल तक मुझे पहुँचने का अब कोई रास्ता दिखाई दे   पीयूष गुप्ता

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#Muktak by Saurabh Dubey Sahil

~  हास्य व्यंग्य ~   जब चाहा अच्छा जब चाहा खराब कह दिया , हमने पानी भी पकड़ा तो आपने शराब कह दिया, क्या करें गलती हमसे ही हो गयी शादी के समय , जो जानबूझकर बन्द गोभी को गुलाब कह दिया ।   सौरभ दुबे  “साहिल” किशनी मैनपुरी यूपी

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#Muktak by Kavi Nilesh

राजनीति पर हल्की बूंदाबांदी ** तेरा आकाश मुझको तो खबर सारी ही देता है । हवा कि हल्कि ही झोखों में नाविक नावों को खेता है । बहुत उम्मीद थी तुमसे, बहुत ही रौब था तेरा , मगर पंगु हो तुम भी तो, शहर का चोर भी कहता है ।  –   कवि निलेश

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#Muktak by Mukesh Marwari

एक मुक्तक “सच्चाई”   जिन्हें इन्सान बनना था, वही हैवान बन बैठे | रक्षक थे कभी जो नर, वही भक्षक अब बन बैठे | रिश्तो कि हकिकत अब यहाँ पर खेल हो गयी | जिन्हें भगवान समझा था , वही शेैतान बन बैठे |   ✍ कवि मुकेश मारवाड़ी “नवलपुरी”

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#Muktak by Kavi D M Gupta

एक मुक्तक———–   आरजू जो तेरे दिल में थी, न जान सके हम। तेरी मन की हसरतों को न पहचान सके हम। भूल जाएगी हमे तू, हमे ये तो पता था, फिर भी नही इस दिल को तो संभाल सके हम।। कवि डी एम् गुप्ता “प्रीत”  – मोब नं. 9022580027

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#Muktak by Mithilesh Rai ‘ Mahadev ‘

कबतक जी सकूँगा नाकाम होते होते? कबतक जी सकूँगा गुमनाम होते होते? भटक रहा हूँ तन्हा मंजिल की तलाश में, कबतक जी सकूँगा बदनाम होते होते?

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#Muktak by Lal Bihari Lal

माँ पर कुछ दोहा माँ जीवन का सार है, माँ है तो संसार। माँ बिन जीवनलालका,समझो है बेकार।1। माँ की ममता धरा पर, सबसे है अनमोल। माँ जिसने भूला दिया,सब कुछ उसका गोल।2। माँ सम गुरू नहीं मिले, ढ़ूढ़े इस संसार। गुरु का जो मान रखा,नैया उसका पार।3। माँ के दूध का कर्जा, चुका न पाया कोय। जन जो कर्ज चुका दिया,जग बैरी ना होय।4। माँ पीपल की छांव है,माँ बगिया के मूल। माँ जीवन का सार है, हरे लाल…

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"#Muktak by Lal Bihari Lal"

#Muktak by Mithilesh Rai, Mahadev

मैं यादों का कभी कभी जमाना ढूँढता हूँ! मैं ख्वाबों का कभी कभी तराना ढूँढता हूँ! जब खींच लेती है मुझको राह तन्हाई की, मैं अश्कों का कभी कभी बहाना ढूँढता हूँ!

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"#Muktak by Mithilesh Rai, Mahadev"

#Muktak by Kavi Nilesh

अपने पर हास्य देख लो अब   कवियों कि मीटिंग कल ही हुई यहां थी सारी कि सारी बातें बताई गई थी कवियों ने कहा चलो पाकिस्तान घूमूंगा पागलों कि संख्या अब वहां  बढाउंगा   चाय सुबह-सुबह मिलती है गोरी आंखें खोल देती है । चौके-चौराहा गली-नुक्कड़ पर सांसें बोल देती है जितनी गरम उतनी इठलाती जिह्वा को स्वाद बताती है । सुंदर प्यालों में आकर तू अपनी कहानी सुनाती है कवि निलेश

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"#Muktak by Kavi Nilesh"

#Muktak by Annang Pal Singh

रहता है जन अकेला, अहंकार के संग ! जीवन भर चलता अलग लेकर फीके रंग !! लेकर फीके रंग , चले नित समानान्तर. ! अहंकार का बोझ उठाये फिरता बाहर. !! कह ंअनंग ंकरजोरि,जिन्दगी भर दुख सहता ! अहंकार को गला न पाता अकड़ा रहता !! अनंगपाल सिंह ंंअनंग ं ग्वालियर म. पृ.

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"#Muktak by Annang Pal Singh"

#Muktak by Piyush Sharma

मुझे ना भूख शौहरत की,ना मंच पाने की चाहत है। मुझे समरसता मिल जाए,मेरी कलम इबादत है। भले यहाँ हिंदू-मुसलमान चाहें कोई रहते हो, मेरी कलम की ताकत ही,मिलकर मेरा भारत है।   कवि पियूष शर्मा नगर उपाध्यश ,बारां शहर

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"#Muktak by Piyush Sharma"