#Muktak by Saurabh Dubey Sahil

मुक्तक खट्टी मीठी यादों का सिलसिला अच्छा रहा , उम्र से बडा होता गया पर  दिल से बच्चा रहा , तेरे नाम से दुनिया में जो मिला वही झूठा , एक तू और तेरा नाम ही हरदम सच्चा रहा।

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#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

आज भी मैं तेरी राहों को देखता हूँ! बेकरार वक्त की बाँहों को देखता हूँ! जुल्मों सितम की दास्ताँ है मेरी जिन्दगी, आरजू की दिल में आहों को देखता हूँ!

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#Muktak by Jasveer Singh Haldhar

–जिंदगी ——————- जन्म मृत्यु का सिलसिला अनवरत चलता रहेगा ।। सुबह दिनकर निकलकर शाम को ढलता रहेगा ।। ना बच पाया है कोई माया के जंजाल से । जिंदगी से जिंदगी का दीप ये जलता रहेगा ।। हलधर -9412050969

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#Muktak by Devendra Kumar Dubey

माँ भारती के मान का,अभिमान हैं ये बेटियाँ, इस धरा के गान का,स्वाभिमान हैं ये बेटियाँ, दो कुलो में साथ रह,दीपक जलाती प्यार का माता-पिता के प्यार का, सम्मान हैं ये बेटियाँ, #_____देवेन्द्र

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#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

साथ नहीं हो लेकिन क्यों हमसे रूठ गये हो? राह-ए-जिन्द़गी में तुम हमसे छूट गये हो! बढ़ती ही जा रही हैं अपनी दूरियाँ दिल की, हाथ की लकीरों में क्यों हमसे टूट गये हो?

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#Muktak by Mukesh Marwari Navalpuri

इन्सानियत से बड़ी मजहब कि बिमारी हो गयी | पुरुषों के व्यक्तित्व पर नारी भारी हो गयी | हमने बैठा दिये है चुन-चुन कर नेता एेसे | अब लगता है घोड़ों कि जीर्ण पर गधों कि सवारी हो गयी | ✍  कवि मुकेश मारवाडी़

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#Muktak by Rudra pratap Tejas

इस जमाने में मैने एक बात देखी है । हर सख्श ने ही अपनी रोटिया सेकी है । कल जिसके घर में सोया था शहजादा , कुछ उदास उस घर में आज बेटी है । ——रूद्र प्रताप “तेजस”

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#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

मेरे नसीब क्यों मुझको रुलाते रहते हो? हरवक्त जिन्दगी को तुम सताते रहते हो! नाकाम हो गया हूँ मैं हालात से लेकिन, बेरहम सा बनकर क्यों तड़पाते रहते हो?

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#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

मेरे नसीब क्यों मुझको रुलाते रहते हो? हरवक्त जिन्दगी को तुम सताते रहते हो! नाकाम हो गया हूँ मैं हालात से लेकिन, बेरहम सा बनकर क्यों तड़पाते रहते हो?

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#Muktak by Tej vir Singh Tej

माला की तारीफ़ करें सब,फूलों का दुःख ना देखा। जिसे सजाने को फूलों की नष्ट-भ्रष्ट जीवन-रेखा। ख़ुशी जीत की ‘हार’ बिना लगती है यहाँ अधूरी-सी। पर हारे का दुःख सागर-सा जीते को हंसता देखा। तेजवीर सिंह “तेज”✍ 🌻 ब्रज वन्दन 🌻 बृषभानु लली बरसाने में,नन्द नन्दन जू नन्दगाम विराजै। कोटिक काम निसार देओ,एक लाल की ठोड़ी पै हीरा साजै। मनमोहन नै मन मोह लियौ,मति मन्द भई मनवा मग भाजै। मनमोहक मुरली मनहर की,मदमस्त करै जब…

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#Muktak By Mithilesh Rai Mahadev

रात जाती है फिर से क्यों रात आ जाती है? धीरे—धीरे दर्द की बारात आ जाती है! भूला हुआ सा रहता हूँ चाहतों को लेकिन, करवटों में यादों की हर बात आ जाती है!

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"#Muktak By Mithilesh Rai Mahadev"

#Muktak By Alok Trivedi

हास्य कुंडली महँगाई ने किया बुरा, पहलवान का हाल , चूहे घर से भाग गए , मिला न आटा दाल , मिला न आटा दाल , कि बीबी चिल्लाती है . पहलवान को छोड़ , मायके भग जाती है , कहत कवि आलोक , मूँछ में लगा उमेठा, मजबूरी में पहलवान अब कवि बन बैठा

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"#Muktak By Alok Trivedi"

#Muktak By Mithilesh Rai Mahadev

दर्द तन्हा रातों की कहानी होते हैं! गुजरे हुए हालात की रवानी होते हैं! होते नहीं हैं रुखसत यादों के सिलसिले, दौरे-आजमाइश की निशानी होते हैं!

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# Muktak by Gayaprasad Mourya ‘rajat’

तुम्हारी याद में हम कुछ ,इस तरह खोये . दर्द को इस तरह रोका ,कि खुलकर न रोये . करवटें इस तरह बदली कि बिस्तर पूंछता यों , रात क्या बात थी कि ,तुम बिलकुल नहीं सोये . रजत गयाप्रसाद मौर्य ‘रजत’ आगरा

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#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

तेरी याद कभी कभी मुस्कान देती है! चाहत की निगाहों में तूफान देती है! टूटे हुए इरादे भी जुड़ जाते हैं सभी, जिन्द़गी को ख्वाबों का जहाँन देती है!

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#Muktak by dileep m gupta

।। मुक्तक।। देखा तुझे तो तुझसे मुझे प्यार हो गया। तीर ए नजर ये दिल के आर पार हो गया। आँखों में तेरी डूब के मर जाऊं मै लेकिन बाहों में तेरे रहने का करार हो गया ।। 2) सावन में घटा होगी तो बरसात भी होगी। गर जिन्दगी रही तो मुलाक़ात भी होगी। मिलने को तुझसे दिल मेरा करता है बार बार जब भी मिलोगी तब तो तुमसे बात भी होगी। 3) रहता हूँ…

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#Muktak by Neelmani Jha

क्षितिज को ढूँढता पागल मैं कोई परिंदा हुँ , खुद की इस उड़ान पे अब खुद से ही शर्मिंदा हुँ , तुम्हें इस बात का कोई इल्म है या भी नहीं ,शायद तुम्हारे नाम पे मरता , तेरे ही नाम से जिन्दा हुँ । #नीलमणि_झा-8544042816

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#Muktak by vishal shukla

जीवन आपका सफल हो, मंगल हो प्रारम्भ से अन्त यही कामना है मेरी, शुभदायी हो आपका हर बसन्त आये दुखों के पतझड़, और खिले सुख के टेसु अनंत कोयल गीत गाये ख़ुशी के, ऐसा मधुरमास हो बसन्त विशाल शुक्ल कवि

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"#Muktak by vishal shukla"

#Muktak by Mithilesh rai Mahadev

तेरी सूरत के अभी दिवाने बहुत से हैं! तेरी अदा के अभी अफसाने बहुत से हैं! तस्वीरे-अंजाम को मिटाऊँ किसतरह? जख्मों के निशान अभी पुराने बहुत से हैं!

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"#Muktak by Mithilesh rai Mahadev"

#Muktak by Jasveer Singh Haldhar

मुक्तक– पतन —————– इस फिज़ा में हवा मुझको कुछ जंगली सी लग रही है । जाने क्यों मंचो की हालत दोगली सी लग रही है ।। गौर से फ़िल्में भी देखीं और पढ़ा इतिहास”हलधर “। साहित्य में अब सभ्यता कुछ जली-जली सी लग रही है ।। हलधर -9412050969

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# Muktak by Ajeet Singh Avdan

आवेश ~~ ठेस लगे आवेश बढ़ा तो, क्या होता है सोचो ये । कुण्ठित मति की बाधित क्षमता, हो जाए तो सोचो ये । निकल गए पल लक्ष्य दिखाते साथ रहा क्या सोचो ये । रोष कहीं अवदान स्वयं में दोष कहाँ था सोचो ये ।। …अवदान शिवगढ़ी

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"# Muktak by Ajeet Singh Avdan"

#Muktak By Mithilesh Rai Mahadev

तेरे बगैर मेरी तन्हा रात हुआ करती है! दर्द और तन्हाई से बात हुआ करती है! बेचैनी तड़पाती है चाहत की महादेव, आँखों से अश्कों की बरसात हुआ करती है!

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"#Muktak By Mithilesh Rai Mahadev"