muktak by mragendr kushwah ‘ aman ‘

४. सियासी लाभ की खातिर जो जीभर लड़ाते हैं उन्हीं के गाल पे चलिये दो थप्पड़ लगाते हैं । बरसें खुदा की नेमतें मिले आशीष राम का   चलो इंसानियत का कोई ऐसा घर बसाते हैं ।

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muktak by kavi anil uphar

वेदना की गोद में जब काव्य सरिता चल पड़ी ।   गीत निर्झर से बहे छंदों की थी पायल बड़ी ।   उल्फत का दुशाला ओढ़कर गजल यूँ कहने लगी   वक़्त से कहदो ठहर जाये ज़रा सा दो घडी ।  

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#muktak by Mahesha Nand Gaur *chandra*

सच्ची- साँसों में, जलती- चिता की- राख रख माथे, किसी- टूटी- हुई  कब्र पर झुक- जलता चिराग लेके ऐ दोस्त न देख जिन्दगी को इन उथले किनारों से तू इतना डूब तूफां में, कि हर नजर, बस तुझे- देखे ||

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"#muktak by Mahesha Nand Gaur *chandra*"

#muktak by saurabh dubey ‘ sahil ‘

卐   आइना   卐 हम को खुद हमीं से जोड़ता हैं आइना , हर रंग रूप यौवन को निखारता हैं आइना , हर चेहरे के हाव भाव तोलता हैं आइना , रहता खामोश सा पर सब कुछ बोलता हैं आइना  ।

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#muktak by Abhishek Kumar Amber

तिरछी नजरिया तेरी क्या कमाल कर गयी। मजनूं बना गयी ये बुरा हाल कर गयी। तेरे ही साथ ने मुझे रंगों से भर दिया। केसरिया कर गयी मुझे गुलाल कर गयी।

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"#muktak by Abhishek Kumar Amber"

#muktak by kunwar bharti

सही गलत की क्या पहचान, क्या है इनकी परिभाषा, होते विद्वतजन के मत भिन्न, उनकी अपनी है आशा; आहत करे नहीं किसी को, अहित किसी का न होये, ह्रदय किसी का दुखे कभी न, होती सही वही भाषा ।

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"#muktak by kunwar bharti"

# muktak by mragendr kushwah ‘ aman ‘

उलझी ज़ुल्फें  नशीली आंखें  न लबो रुखसार की बातें करो   अब शृंगार की बातें छोड़कर अंगार की बातें करो । बज़्म और महबूब की बातें बहुत हो चुकी हैं   अब टूट रहे अपने-अपने परिवार की बातें करो ।

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"# muktak by mragendr kushwah ‘ aman ‘"

# muktak by kavi anil uphar

जगत के है झमेले सब न तुम विचलित कभी होना ।   सताएगी हवा तुमको कभी आपा नही खोना ।   बदलते रंग दुनियां के कभी तुम मत बदल जाना ।   मिले रुसवाईयां जब भी भरोसा तुम नही खोना ।

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"# muktak by kavi anil uphar"

# muktak by bhushan lamba bhushan

दिल की किश्ती ग़मों से, डूब रही है लेकिन उनकी न रोनेकी कसम हमें रोने नहीं देतीं। सब भुला कहीं खो जाने को दिल चाहता है ये यादें उनकीं है जो ऐसा भी होने नहीं देतीं। खुदा उनकी याद मिटा दो या उनसे मिला दे अब ये जिन्दगी उनके बिना जीने नहीं देतीं। फरिश्तों हमको यादों से, महरूम ही रखना पुरानी यादों की लडियाँ हमें सोने नहीं देतीं।

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"# muktak by bhushan lamba bhushan"

muktak by mragendr kushwah aman

लोग कहते हैं कोई गज़ल मैं नवाबी लिखूँ    भुखमरी के दौर में कैसे होंठ गुलाबी लिखूँ । नानीमाँ की आंखों में मुकम्मल सदी की प्यास है   मुमकिन नहीं कि दिलरुबा की आंखे शराबी लिखूँ ।

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muktak by kunwqar bharti

जीवन मंच इक नाटक का, भिन्न भिन्न हैं कार्य हमारे, निज दायित्व ह्रदय में धारें, करें निर्वहन तन मन हारे; लिप्त न हों जन धन से किंचित, साथ नहीं ये हैं जाने, स्नेह सत्य सरल सहजता, सबको सहयोग हमें उबारे ।

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"muktak by kunwqar bharti"

muktak by kavi anil uphar

क्या गजब वो रात थी जब चाह आँखों ने पढ़ी ।   फिर मिलन की महक सारी सुर्ख अधरों पर चढ़ी ।   रूह का फिर देह से होता रहा मधुरिम विलय   वक़्त से कहदो ठहर जाये ज़रा सा दो घडी ।

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muktak by mragendr kushwah ‘ aman ‘

१. जब कोई सहमा डरा पहुँचे अगर चौपाल में    समझ जाइये कोई शिकार तगड़ा फंसा हो जाल में ।  तंग करके फिर ऐंठिये माल जितना हो सके    क्या पता ये मौका अब मिले कितने साल में ।

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muktak by kunwar bharati

प्रणय निवेदन करते करते, केश हो गए रुपहले, स्वप्नों की लम्बी श्रृंखला, ख्वाब सभी थे रंगीले; ज्यों ज्यों बाल श्वेत हुए, सपने भी हो गए साफ़, मन के भाव रहे मन में ही, सुदृढ़ इरादे पिघले ।

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muktak by kavi anil uphar

लिखी पाती ये असुवन से सजन तुम लौट आना फिर । तेरे  चरणों की हूँ दासी न इतना भूल जाना फिर । तेरे हर फ़र्ज़ को दिल से सलामी देती हूँ सुनले मेरे इस प्यार के आगे न अपने पग डिगाना फिर ।

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muktak by kunwar bharti

काम क्रोध मद मोह, लोभ मत्सर का प्रहार, उपजाता अविवेक, हावी होते ये षट्विकार; चिंतन मनन ध्यान से, होता है इनका संहार, परहित भाव रखें गर, विफल होते सारे वार ।

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"muktak by kunwar bharti"

muktak by anil uphar

तेरा अहसास अमानत है प्यार की सुनले । हरेक शब्द ढल गया है गीत में गुनले । विरासत प्रेम की आओ सहेजे हम ये श्रद्धा से सजाने थाल पूजा के चलो फूलों को अब चुनले ।

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muktak by Vinod Yadav

चुनावी माहौल है,मत दादरी की बात करो. नाज़ुक हालात है,मत बाबरी की बात करो. जलजले का अपना अस्तित्व और वज़ूद है, कटघरे में मत किसी गोदावरी की बात करो.

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"muktak by Vinod Yadav"

muktak by Piyush Sharma ‘ashiqe’

आज बहारों ने गुलशन में, अजब सी मस्ती घोली है । कृष्ण की पचकारी से भीगी, बालाओ की चोली हैं।। शुल सुमन बन गये सागर, अपनी मस्ती में झूम रहा । लगता हैं वह हमसे मन में, ढाई अक्षर बोली हैं।।

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muktak by kalpana ramani

दोहा मुक्तक मेला है नवरात्रि का, फैला परम प्रकाश। आलोकित जीवन हुआ, कटा तमस का पाश। माँ प्रतिमा सँग घट सजे, चला जागरण दौर देवी की जयकार से, गूँज उठा आकाश। आस्तिकता, विश्वास में, भारत देश कमाल। गरबा उत्सव की मची, चारों ओर धमाल। शक्तिमान, अपराजिता, माँ दुर्गा को पूज अर्पित कर भाव्यांजली, जन-जन हुआ निहाल। आता है जब क्वार का, शुक्ल पक्ष हर बार। दुर्गा मातु विराजतीं, घर-घर मय शृंगार। जुटते पूजा पाठ में,…

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"muktak by kalpana ramani"

muktak by kunwar bharti

अभिनंदन नवरात्रि महालय, माँ के श्रीचरणों का अनथक वंदन, नेह प्रेम सद्भाव हो विकरित, औ द्वेष क्लेश मद मोह का क्रन्दन; सुरभि से सुख की जीवन महकें, जन जन में आह्लाद का गुंजन, माँ की ममता दया अरु करुणा, का हर माथे पर लगा हो चन्दन ।

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"muktak by kunwar bharti"

muktak by kavi anil uphar

भुलाये से नही भूले वो किस्से हम जवानी में । वो पहली प्रीत का आलम वो पहरे फिर ज़माने के हज़ारों मोड़ आते है मुहोब्बत की कहानी में । अनिल उपहार —क्यों जिंदगी से मेरी वह दूर जा रहे हैं

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"muktak by kavi anil uphar"

muktak by vinod kumar yadav ‘ nirbhay ‘

वो कुछ भी हो भले लेकिन फ़रिश्ता हो नहीं सकता जो अपनें दिल के आँगन में मोहब्बत बो नहीं सकता कोई जब श्वार्थ की खातिर किसी का खूँ बहाता है, यकीं मानों वो बहशी है,ज़िहादी हो नहीं सकता

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"muktak by vinod kumar yadav ‘ nirbhay ‘"