#Muktak by ramesh raj

|| मुक्तक ||—-33. ———————————– सुमति सँवारि सोचि सोधि  सुसंकेत कूँ खाबै खल खलिहान खान खेत-खेत कूँ, अन्तहीन अंधकार अमरीकी ओज

Read more

#Muktak by ramesh raj

|| मुक्तक ||—-32. ———————————– काटेगी कुटिल क्रूर कंठ क्रान्तिबोध का कायर कमीनी कौम ये करेगी क्रोध का, गांधी-गौतमों के गीत

Read more

#Muktak by ramesh raj

|| मुक्तक ||—-31. ———————————– गमगीन गाँव-गाँव गुम गान-गीत हैं पस्त-पस्त पेड़-पेड़, पात-पात पीत है, हँसना हुआ हत्, हार-हार हाहाकार भारत

Read more

#Muktak by ramesh raj

|| मुक्तक ||—-30. ———————————– झाँकन के झंझावात, झरना न झील है काया कुम्हलायी कहीं कंठ-कंल कील है। नदी-नदी नीर न,

Read more

#Muktak by ramesh raj

|| मुक्तक ||—-28. ———————————– दुसह दरद दाह देतु दुखियारी कूँ कालिमा कपट कोटि कंचनकुमारी कूँ। पीर को प्रसारे पल-पल पै

Read more

#Muktak by ramesh raj

|| मुक्तक ||—-27. ———————————– सुगति सुमति संग, सौम्यता सुवंत से साध से सुकवि-सार, सोहे साँच सन्त से, सुमन सुगन्ध साथ

Read more

#Muktak by lramesh raj

|| मुक्तक ||—-26. ———————————– जूही-चम्पा-चाँदनी-चमेलियों की वन्दना प्यार में शुमार अठखेलियों की वन्दना, गोरी तो है भोरी छोरी समझै न

Read more

#Muktak by ramesh raj

|| मुक्तक ||—-24. ———————————– सूखी-सूखी तुलसी की डालियों की वन्दना कामकाजी बासी घरवालियों की वन्दना, सैंयाजी की ज़िन्दगी में आज

Read more