#Pratiyogita Kavita by Nawal Jopshi

सुंदर गीत सावनी रच कर कैसे मन स्पंदित हो जब अपनी धरती बारिश की बौछारों से वंचित हो हे श्रीमान पुरंदर कुछ तो हमरी भी अरदास सुनो मरु धरती के लिये मेघपति क्यों कर हुए विलंबित हो सूखे इसी आस में आंसू शायद सावन हरषा दे आँखों से हरियाली देखे हलधर उर आनंदित हो और जगह जलधार भयंकर इधर एक भी बूँद नहीं क्या सरकारी तुष्टिकरण से इंद्रदेव अनुबंधित हो सबको अपने हक़ का पहुँचे…

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"#Pratiyogita Kavita by Nawal Jopshi"

#Pratiyogita Kavita by Poetess Kumar Smriti

सावन..कविता सब ढूंढते हैं, सावन को साधन में, पायल में, बिछिया में, चूड़ी में, कंगना में, हाथों की मेंहदी में, मैं, ढूंढती हूँ सावन को आँगन में। उस आँगन में जहाँ इक इक बून्द को तरसती है धरती पैरों की बिबाइयों सी लिए दरारें। मैं ढूंढती हूँ, सावन को खेतों में, बालू की रेतों में रिमझिम जहाँ फुहारें पौधों को हरियाली दें। मैं ढूंढती हूँ, सावन को,उन चौराहों पर जहाँ सरेआम नग्न की जाती है…

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"#Pratiyogita Kavita by Poetess Kumar Smriti"

#Pratiyogita Kavita by Kavita Saxena

सावन की फुहार मन में लेकर आयी बहार मोर लगे नाचने पक्षी लगे मुस्कारने तपिश ने किया बेहाल गर्मी में कोई न पूछे किसी का हाल आकाश से बारिश की बूंद जब पृथ्वी पर आयी धरती भी थोड़ा इठलाई बोली बहुत सही तपिश अब न चार महीने सहूंगी बारिश के साथ अब अठखेलियाँ करुँगी पेड़ पौधों में भी उमंग आई हर तरह ख़ुशी ही ख़ुशी छाई किसान करते हैं तेरा इन्तजार क्यों उनका जुड़ा हैं…

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"#Pratiyogita Kavita by Kavita Saxena"

#Pratiyogita Kavita by Alok Shrivas

जलते सावन के टुकड़ों में, दर्द  भीग  जब  जाती  है । बून्द- बून्द करके आँखों से, बन के घटा  गिर जाती है ।। दिल की तड़प पपीहे सी , जब पीहू- पीहू चिल्लाती है। चित्कार मिलन की उनसे , घन – गर्जन में दब जाती है।। सूरत भी अब बनेगी कैसे, मेघों  के  परिवर्तन  से । दिख जाती है कभी – कभी, तड़ितों के करुणा-क्रंदन से।। स्पर्श फुहारों का चेहरे पर , उनका  एहसास कराती…

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"#Pratiyogita Kavita by Alok Shrivas"

Pratiyogita Kavita By Akash Khangar

सावन(वर्षा ऋतु) बूंदे महज़ पानी नही ये प्रेम की कहानी है बेजुबान धरा पर गरजता आकाश तूफानी है बूंदे महज़…. यू अहसास होता है अम्बर फूट-फूट रोता है शायद इंतज़ार का सबब अमावस सा होता है प्रकृति के भी अनूठे रूप है प्यास बुझती नही धरती की और चातक 8माह सपने संजोता है फिर भी सबके लिए सुबह सुहानी है बूंदे महज़…. लिवाज ओढ़े मिट्टी हरा भरा मुस्काये पर्वत, झरने और घटा तरह तरह के…

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"Pratiyogita Kavita By Akash Khangar"

Pratiyogita Kavita by Abhishekh Bharti ‘ chandan ‘

सावन मुझको भी कुछ अब कहने दो। ये जो सावन है इसे रहने दो। बरखा सा मैं भी तो बरसा था। उनके भी सितम अब सहने दो। सावन ने ये कैसी कहर ढाई। संग अपने वो पूर्वा ले आई। आती वो अकेले तो ठीक मगर। उनकी यादें संग ले आई। बिन सावन बरसात पुरानी हुई। कातिल अब उनकी जवानी हुई। बैठ झूलो पर इजहार किया। प्यार उनका सावन की निशानी हुई। पल याद पुराना आता…

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Pratiyogita Kavita by Shabnam Sharma

वर्षा ऋतु छिप गया सूरज, बदरी छाई, टप-टप पानी, मन हरशाई, जंगल में था मयूर वो नाचा, कूक-कूक कर कोयल गाई, सूखे बीज थे खेत से झाँके, वर्षा ने थी प्यास बुझाई, रामू काका गुड़कें हुक्का, छबिया से थी पकौड़ी बनवाई, दूर शहर से, लाबो रानी, समेट रही थी अपना छप्पर, ढूंढ-ढांढ कर उसने थी, आज छत पर पन्नी फैलाई वर्षा आई, ठंडक लाई, कई जगह थी बाढ़ वो लाई। मिली खबर थी पूर्ण देश…

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"Pratiyogita Kavita by Shabnam Sharma"

Pratiyogita Kavita by Manglesh Jaiswal

फूलों की डोर पर सजनी बैठी इठलायें, मंद-मंद बयार से तन सिंहर सिंहर जायें । मन बेकाबू लगी पिया से मिलन की आस, कोयल की कूक से वेदना बढ़ती ही जायें। मनभावन सावन बैरी हुआ री सखी आज, ललाट से बूंद पानी की नितर नितर जायें । हिया में भ्रमर सिहरन सी पैदा करे आज, मन हिचकोले लेकर बिखर बिखर जायें । चुनरी उडी़ उडी़ जाय सावन की बयार में, अंग अंग “मंगलेश” चित चितर…

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"Pratiyogita Kavita by Manglesh Jaiswal"

#Pratiyogita Kavita by Sudhanshu Upadhyay

कितने ख़्वाबों का बोझ लिए ,हर साल ये सावन आता है, टूटे तारे ,कसमों ,वादों से , शायद इसका भी नाता है। कुछ फसलों ने सोचा है ,उनके मालिक की किस्मत बहुरेंगी, चाहे कितना तूफ़ां आये,वो धरती से न उखड़ेंगी, मूल ब्याज सब चुकता होगा ,हर बेटी की शादी होगी, कोई बच्चा भूखा  न सोयेगा ,हर चूल्हे पर रोटी होगी, गर कम बारिश हो तो ये सारा अरमान धरा रह जाता है, कितने ख़्वाबों का…

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"#Pratiyogita Kavita by Sudhanshu Upadhyay"

#Pratiyogita Kavita by Ishq Sharma Pyar se

विरही  मेघ तड़प ज़मी की, प्यास ज़मी की। आस ज़मी की, कौन बुझाये। चीर-चीर के बादलों को। घिर घिर के बादलों संग। “विरही मेघ” तू जल्द आजाये। “विरही मेघ” तू जल्द आजाये। ■ बदली बनकर बादल सारे। आते रहते, जाते रहते। रफ़्तार इनकी घोड़ो सी। बचपन से घुड़पुछ कहलाते। कभी ना थकते, चलते ख़ूब। दिनवा-रतिया, साँझ-सकारे। ■ कहाँ रुकी तू, कहाँ हैं ठहरी। क्यूँ बन बैठी मेरी बैरी। बरस जा उमड़-घुमड़ के तू। कान खोल…

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"#Pratiyogita Kavita by Ishq Sharma Pyar se"

#Pratiyogita kavita by Meenakshi kaith mottan

ए सावन अभी तेरा कोई काम नहीं है जिसमें मैं समा जायुं अभी वो जाम नहीं है। अब के छोड़ दे प्यासा तू इस धरती को, क्यों, तू बरसे जब मोहब्बत पास नहीं है। कर इतनी सी मेहर हम पे, हमारे आँगन से जरा हटके बरस। याद आती है उनकी जब तू आये, क्या तुझे ओर कोई काम नहीं है। इक-इक बूँद लगती है अंगारों सी, तेरी बूंदों में अभी वो आराम नहीं है। ले…

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"#Pratiyogita kavita by Meenakshi kaith mottan"

#Pratiyogita Kavita by pankaj sharma, Jhalawar

ये बारिश बहुत काम आती थी… दोस्तों को आजमाने मे… और बिना छाता लिये घर से निकल जाते थे हम..सोचते थे कोई तो होगा जो हम पर आसमान के नीचे आसमां रख देगा… सचमुच सच्चे दोस्त होते थे… ये बारिश बहुत काम आती थी..जब खुद के लिये नहीं.. किसी और के लिए छाता ले जाते थे… सोचते थे..सच्चे साथी युँ ही नहीं मिलते… और..आज भी ये बारिश बहुत काम आती है… भीगी पलकों को साथ…

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"#Pratiyogita Kavita by pankaj sharma, Jhalawar"

#Pratiyogita Kavita by Rashmi Abhya

आँसू का सैलाब गम की घाटियों में अनवरत बहता रहा…. अतीत की बिखरी यादें, पीर बन सिसकती रही सीने में…. झुलसा डाला मन तरु को कुछ इस तरह पतझड़ ने…. फिर न निकल पाई हरी कोपलें सावन के महीने में…!! ‘रश्मि अभय’ पत्रकार पटना (बिहार)

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Pratiyogita Kavita by Anand Singhanpuri

‘’ सावन’’(वर्षाऋतू ) दमक-दमक के मेघा बरसे ,, सावन बदली रिमझिम बरसे || देख मन क्यों अत्यंत हरसे ,, प्यासा पपिहा क्यों तरसे || आगन्तुक सावन की बरखा, देख  प्रफुल्लित होता मन || मानों बरसों की अभिलाषा , हुआ पूरी तरह से सम्पन्न || दादुर भी स्वागत करे टर-टरसे || सावन बदली रिमझिम बरसे ||0|| घनी सांवली सी सुंदर काया, रुपहले लटो सी बिखरी साया || ले पुरवाई भरी मतवाली चाल, हल्की- फुल्की दबी सी…

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"Pratiyogita Kavita by Anand Singhanpuri"

#Pratiyogita Kavita by Rashmi Badwar Namdev

सावन है प्रिय बादल छाये लेकिन अब तक तुम न आये। झूले में जब सखियां झूली प्रियतम मैं तो तुममें भूली। घनघोर घटा यादों की छायी मेरे मन को ये तड़पायी, प्रेम स्मृति में ही खोयी मैं, तुमसे इस सावन ना मिल पायी सावन है प्रिय बादल छाये लेकिन अब तक तुम न आये बागों मे सुन्दर फूल लुभाते पंछी उड़ते भंवरे भी गाते। खेतों में हरीतिमा है  छाती पर इस तन को है झुलसाती।…

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"#Pratiyogita Kavita by Rashmi Badwar Namdev"

#Pratiyogita Kavita by Ram Chandar Azad

वर्षा ऋतु मेघ ढक्यो जब भानु को, धूप गई खिसियाय | लाख चाहकर  भी नहीं, जमीं पर पहुँची भाय | जमीं पर पहुँची भाय, नहीं  वह बहुत गुसाई | मेघ की उसने जमकर किन्ही ,बहुत  खिंचाई | कहता  है ‘आजाद’ धूप  की  बंध गई  घेंघ | चारिहु ओर से आ जब  उसको  ढक्यो  मेघ ||1||  बरसा  आवत  देखकर  दादुर करैं  पुकार | टर्र टर्र  की गूंज  को रही  बिखेर  बयार | रही बिखेर बयार …

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"#Pratiyogita Kavita by Ram Chandar Azad"

#Pratiyogita Kavita by Annang Pal Singh

बादलों की छुअन सा , अहसास साँसों में बसाये ! गगन में फिर वही चिर परिचित लुभावन जलद छाये !! आज खेतों का पुलक तन, बादलों की छाँव में है ! बादलों की साँवली छाया हमारे गाँव. में है !! अब हमारे मन अपावन में, नये स्वर निकल आये ! गगन में फिर……………………………………!! वक्छ स्थल बादलों का चीरकर बिजली पुकारे ! कौनसे आकाश चुम्बी शिखर को रह रह निहारे !! गरजते, मदमस्त से,किस ओर से…

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"#Pratiyogita Kavita by Annang Pal Singh"

#Pratiyogita Kavita By Pratik Palor

बरसात मुझ पर हुई झमाझम बारिश, हर बादल से भीगा हूँ..हर एक मौसम बून्दें सारी, अन्दर तक मैं भीगा हूँ.. मन कठोर था मेरा पहले, ऊसर बंजर बिन पानी..बड़े जोर की चली हवाएँ, मेघ श्याम दल मनमानी.. पहले की थोड़ी-सी रिमझिम, घटाटोप फिर हुई सघन..छुपने को ना ठौर मिली तो, भीगने में ही हुआ मगन.. साँवले थे कुछ साँवरे-से, कुछ थे बड़े भयानक भी..कुछ आँखों में पहले से थे, आए कुछ अचानक ही.. कुछ लाए…

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"#Pratiyogita Kavita By Pratik Palor"

#Pratiyogita Kavita by Kapil Kurbe

चमकती बिजली गरजते बादल टर्राते मेंढक टीप टीप करती वर्षा की बूंदे बहती पवन बहता पानी बहते बादल नव स्नान की हुई नव पुष्प पत्तियां रूके हुए पानी पर नव बूंदो के पड़ने पर नव भंवरों का बनना निरंतर… आसमान पर सतरंगी ईंद्रधनुष (जो अभी आधा ही बना है) आनंदित करता है उन्मादित करता है… पर… भीगा सा मौसम भीगी सी हवाएं भीगी सी मिट्टी भीगे भीगे पंछी भीगा सा आलम भीगी सी यादें (जो…

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"#Pratiyogita Kavita by Kapil Kurbe"

Pratiyogita Kavita by Dilip Singh Charan

सावण सावण आय सुहामणो , खामंद तू मत खीज  । सांध सुं लाडु सांतरा , मति भूले ना तीज ।। हिवड़ो ललचै हिण्डवा , मांडू खेजङ डाल । हिण्डा सागै हिण्डसां , रमसा सरवर पाल ।। हरिया भरिया खेत है  , पिउ पिउ बोले मोर । लहरे बाजरियां लरर , पाकै फसलां जोर ।। मूंग  टिंडसी मोठड़ी  , तोरू   ला सूं तोड़ । साग बणा सूं सांतरो , पिया परदेस  छोड़ ।। हरिया हरिया खेत…

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"Pratiyogita Kavita by Dilip Singh Charan"

Pratiyogita Kavita by Kapil Kurbe

बारिस चमकती बिजली गरजते बादल टर्राते मेंढक टीप टीप करती वर्षा की बूंदे बहती पवन बहता पानी बहते बादल नव स्नान की हुई नव पुष्प पत्तियां रूके हुए पानी पर नव बूंदो के पड़ने पर नव भंवरों का बनना निरंतर… आसमान पर सतरंगी ईंद्रधनुष (जो अभी आधा ही बना है) आनंदित करता है उन्मादित करता है… पर… भीगा सा मौसम भीगी सी हवाएं भीगी सी मिट्टी भीगे भीगे पंछी भीगा सा आलम भीगी सी यादें…

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"Pratiyogita Kavita by Kapil Kurbe"

#Pratiyogita Kavita By Dr. Sarla Singh

बादरिया बरसे बादरिया झूम-झूम , हरसे हियरा छाये उमंग । धरती गाये गीत पवन संग, चहकें चिड़िया अति प्रसन्न। सब ओर मुदित जीवन अपार, सब खेत, बाग,वन नाच.रहे । हर्षोल्लास की वेला आई , नदिया ,तालाब सब नाच रहे । मनमयूर हर्षित अपार, बादरिया संग नाच रहा । अम्बर की खुशी है छलक पड़ी, वसुधा मन ही मन मुस्काय रही । हरित चुनरिया रही सम्भाल , बरसे  बादरिया   झूम-झूम  । मन नाच रहा हो मुदित…

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"#Pratiyogita Kavita By Dr. Sarla Singh"