#Pratiyogita Kavita by Anuj Tiwari

बरसात तपती धरती पर जब , बलखाकर होती बूँदा-बांदी ! घुँघरू बाँधे हुए पैर पर , जब चलती जोरों से आँधी !! सिहरन का संगीत बजाता , बारिश का पहला खत आया ! खत का मजमून पढे तब , झिलमिल कमसिन अहसास समाया !! सोंधी-सोंधी खुशबू का , अब उमड़ रहा सैलाब ! धरती का आसमां से मिलन के , पूरे हो रहे ख्वाब !! हरियाली हर्षित हो कर , हाथ फैला के बोल रही…

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#Pratiyogita Kavita by Arvind Anshuman

सावन में। उमड़ घुमड़ कर बरस रही है कारी बदरिया सावन में । भीग रही है धरती की यह हरित चुनरिया सावन में । ताल तलैया भर गया पानी, नदियों पर भी चढ़ी जवानी, बल खाती इठलाती चलती जैसे सांवरिया सावन में । बूंदों से जब पायल बाजे , हर्षित मोर पापिहनाचे , चंचल चितवन निरख रही नयन बिजुरिया सावन में । परदेशी की याद सताये , कोई कजरी कोई झूमर गाये, सखियों संग पनघट…

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#Pratiyogita Kavita by Unman

सावन__ कोयल की कूक पपीहे की हूक कृषक की भूख सुन, सावन आता है सागर की कोख से निकल अंबर के आँगन में श्याम मेघ दौड़ लगाता है जब सावन आता है श्रमिक मेघ थकता है जब स्वेद खूब बहाता है देख विरह की आग को अश्रु बन मिट जाता है बचपन भीगता सावन में कागज की कश्ती बनाता है बहा उन्हें वर्षा जल में निश्छल मौज उड़ाता है प्रियतमा की खनकती हरी चूड़ियाँ प्रियतम…

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#Pratiyoagita Kavita BNy Ashok Singh Satyaveer

♤सुधि आये मनभावन की♤ सुधि आये मनभावन की।।१।। पावस का मौसम मन भाये? हिय में चैन नहीं टुक आये। नभ में काले बादल छाये, झड़ी लगी है सावन की। सुधि आये मनभावन की।।२।। आतीं शीतल-मंद फुहारें, रोमांचित होते अंग सारे। गरजें नभ में घन मतवारे, गरज लगे समझावन की। सुधि आये मनभावन की।।३।। झूले पड़े बाग में सखि री! कजरी की धुन इत-उत बिखरी। अजब खुमारी मन में उतरी, सुन लूँ पिय गोहरावन की। सुधि…

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#Pratiyogita Kavita by shiv prabhakar Ojha

सावन (वर्षा ऋतु ) “सावन की रिमझिम रिमझिम, बरसात सुहानी लगती है। आसमान से झरती बूंदें, कुछ रूहानी लगती हैं। घिरी घटायें मन्द पवन, आनन्दित कर देती तन मन, लहराती हरियाली भी, देखो दीवानी लगती है।।1।। ताल-तलैया भरे-भरे, मेंढक टर्राते रागों में। खेतों में किसान खुश हैं, पशु-पक्षी खुश हैं बागों में। रह-रहके चमके बिजली, करती मनमानी लगती है। आसमान में इन्द्रधनुष की, छटा सुहानी लगती है।।2।। आम की डाली पर झूला, सावन में झूल…

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"#Pratiyogita Kavita by shiv prabhakar Ojha"

#Pratiyogita Kavita by Dr. Mukesh Kumar

:गीत- “जब चाँद भीगता था छत पर” बहका सावन-महकी रुत थी, ये हवा भी मीठी चलती थी. जब चाँद भीगता था छत पर, तब बारिश अच्छी लगती थी. वो बाल खुले बिखरे-बिखरे, होठों पे’ कभी आ रुकते थे. तेरे गालों से होकर के, बूंदों के मोती गिरते थे. आकर मेरी खिड़की पर तब, चिड़िया बनके तुम उड़ती थी. जब चाँद भीगता था छत पर, तब बारिश अच्छी लगती थी. कमरे की तन्हाई मेरे, इक पल…

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Pratiyogita Kavita by Ashish Tiwari

सावन में शुन्दरता बिखरे , कोयल कूक पवन में बिचरे ,, फैल गयी चहु ओर हरियाली , फूल खिल गए डाली डाली ,, प्यास बुझाए नदियां नाले , वरखा रानी इनको पाले ,, खेतो में लहराती फसले , देख गजोधर खैनी मसले ,, पंछी चहक रहे दूर गगन में , जुगनू चमक रहे आगन में ,, पवन बह रही ठंडी ठंडी , खीरा ककड़ी सब्जी मंडी ,, दौड़ उठी कागज़ की कस्ती , तालाबों में…

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Pratiyogita Kavita by Anita Mishra ‘ shidhi ‘

सावन आया बादल छाये , मेरा जीया घबराये , धरा ने औढी धानी चुनर , बुन्दो की पायल छनकाये !! तुझ बिन साजन सावन मेरा सूना , कैसे हम मन को समझाये !! कंगन-पायल बिन्दिया रुठे ,नैनो से काजल भी छूटे घाव जिया का किसे दिखाये!! जब से गये प्रदेश पिया ,गये मुझे तुम भूल याद करे जब प्यार तुम्हारा दिल मे चुभता शूल!! बिजुरी चमके डर लागे मुझे ,रात बैरन बन काटे मुझे कोई…

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Pratiyogita Kavita by Kirti Vidhya Sinha

सावन (वर्षा ऋतु) सावन आया सावन आया देखो-देखो सावनआया हल्की हल्की बौछारें संग मैं लेके सावन आया मैं भी भीगूं तू भी भीगे हम सब भीगें सावन में डल गये वो नीम पर झूले सज गये वो चौकोर चपेटे झूला झूलें संगी साथी एक दूजे के आंगन में रिमझिम-रिमझिम बूंदे बरसे पी की याद दिलाये मेंहदी जब हाथ पर आये लालमय हो जाये कुन्तल पर जब गजरा बांधें अधरों पर सुर सज आये दरिया संग…

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"Pratiyogita Kavita by Kirti Vidhya Sinha"

#Pratiyogita Kavita by Anand Bihari

उम्मीदों का पानी इस सावन में बरस गया, उम्मीदों का पानी देख। देखो गर वैसाख-जेठ तो धरती की जली जवानी देख।। पौधे थे सूखे; ठूंठ हो गए धरती की पेशानी देख। रोज़ कमाने-खाने वालों के आँखों में पानी देख।। रिमझिम-सी फुहार में भीगी अल्हड़ राधा रानी देख। किशन कन्हैया ता-ता-थैया गोपियों की मनमानी देख।। हरियाली चहु-ओर दिखे अब, नदी-नालों की रवानी देख। धरती का कण-कण गिला, भींगी-सोंधी जवानी देख।। धन-धान्य घर-घर में होगी, जन ने…

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"#Pratiyogita Kavita by Anand Bihari"

#Pratiyogita Kavita by Manoj Charan

मनभावण सावण आय गयो दोहा सावण री झड़ लग रही, घटा चढ़ी घणघोर। भांग धतूरा घुट रिया, चिलमां चढ़गी जोर।१। सावण मनभावण हुयो, खूब सजै दरबार। शिवजी रो महिनो बड़ो, हो री जै जै कार।२। छंद रोमकंद (सवैया) जय हो शिव शंकर नाथ प्रभो, मन भावण सावण आय गयो। जय हो तुमरी नटराज घणी, मन भांग धतूर चढ़ाय रयो। निमळी जळधार बहै नित री, शिव सावण धूम मचाय रयो। कर जोङ करै अरदास सदा, गुण…

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"#Pratiyogita Kavita by Manoj Charan"

#Pratiyogita Kavita by Abhishek Pratap Singh

सावन की प्रीत ( विधाता छंद ) हुआ सावन है मनभावन अधर की प्रीत प्यासी है। ख़ुशी चाहे हो जितनी भी तुम्हारे बिन उदासी है। तेरी चाहत में ही अंकित समर्पण की ऋचाएँ है। न ठुकराओ इन्हें ऐसे हमारी भावनाएँ है। हुआ है सुरमयी आलम ज़रा जुल्फों को लहरा दो। हटा दो रुख से घूंघट और लबों से जाम छलका दो। दिले दिलदार के दीदार में पलकें बिछाएँ है। तेरे स्वागत की ख़ातिर हमने कुछ…

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"#Pratiyogita Kavita by Abhishek Pratap Singh"

# Pratiyogita Kavita by vishwambhar vyagra

आये दिन अच्छे…(कविता) ****************** बरखा की बूँदें क्या आई मानो आये दिन अच्छे लगे प्रकृति निखरी-निखरी मानो आये दिन अच्छे मन करता चँढ़ जाऊँ छत पर, या दगड़े में मौज करूँ फिर से मैं बच्चा बन जाऊँ मानो आये दिन अच्छे मना करे माता जाने को, पहली बारिश में नहाने को आँख चुरा निकलना चाहूँ मानो आये दिन अच्छे उमड़-घुमड़ कर बदरा आये मेंढ़क पल पल में टर्राये झींगर अपनी राग सुनाये मानो आये दिन…

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"# Pratiyogita Kavita by vishwambhar vyagra"

Pratiyogita Kavita by Anupama Srivastava ‘ Anushri ‘

‘बारिश’ पत्तों पर ठहरी,कभी फिसलती हुई बूँदें, बड़ी सुहानी सी हैं, इस खुशनुमा मौसम में दिल में ठहरी, कोई कहानी सी है। शीशे के बाहर के तूफ़ान से, भीतर के तूफ़ान की कुछ रवानी सी है, बूंदों की रून-झुन के साथ, धडकनों की धुन, कुछ जानी- पहचानी सी है। बारिश के साथ गुम हो जाना, अपनी आदत पुरानी सी है, एक लम्हे में कई लम्हात जी लेना  ,मौसम की मेहरबानी सी है। पिघलती बारिशों में…

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#Pratiyogita Kavita by Alpana Harsh

सोते सोते जाग जाती हूँ कभी कभी इन आभाओं की चमक से भी आत्मा तक कांप जाती हूँ बेतहाशा तन्हाईयों के गिरेबां से निकलने की कोशिश में अपनी रूह को इन बारिशों में गीला पाती हूँ कभी मिले थे तुम मुझे इन बारिशों मे अपने गालों की लालिमा को अपने पल्लू से ढांप जाती हूँ उफ ये सावन की घटायें जगाती है फिर नयी आस कोई पर फिर अनहोनी की आशंका से आत्मा की गहराईयों…

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"#Pratiyogita Kavita by Alpana Harsh"

#Pratiyogita Kavita by Uma Mehata Trivedi

“सावन की सजनी” सखि रें चली तु कौन सी डगर.. जिससे तु हें अनजानी मगर, फिर क्यों लहराती बेखबर… बरखा तुझ पर रखे नजर.. ।। रिमझिम-रिमझिम बरसे सावन.. तरसे मिलन तुम संग बिन, जैसे चाँद चकोर तुम बिन.. बरखा गाये गीत हर दिन.. ।। पुलकित रोम-रोम मेरा सवरे.. माथे पर बिन्दियां जो दमके, हाथों में चुड़ियां वो खनके.. पाॅयल यूँ पैरों की छनके.. ।। बूँद बरखा मूख पर भायी.. आज भिगोदे तन-मन साथी, सज आई…

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"#Pratiyogita Kavita by Uma Mehata Trivedi"

Pratiyogita Kavita by Kapil Jain

–बारिश की एक शाम— याद है तुम्हें बारिश की वो शाम हाथ में तेरे थी मेरी भी हथेली काँधे पे टिका वो मासूम चेहरा भीगा हुआ तिल था मैं भी भीगा-भीगा-सा ओर भीगी भीगी तुम मन भी पनियारा ख़ामोश तुम बारिश की बूँदों को सुनती हुई जैसे पाजेब कोई तेरी हँसी-सी छनकती हो कहीं मैं भी ख़ामोश सुमधुर संगीत सुनता रहा सतरंगी कंगन तेरे हाथ में जिसे लिया था तूने ज़िद करके सावन के मेले…

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"Pratiyogita Kavita by Kapil Jain"

#Pratiyogita Kavita by Gyanendra Mohan ‘ Gyan ‘

सावन था या प्यार तुम्हारा आज शाम जब बरसा सावन भीगा अपना तन-मन सारा। भ्रान्ति लिए बैठा हूँ अब तक सावन था या प्यार तुम्हारा। कान्हा ने राधा से पूछा तुम मुझको सच-सच बतलाना। भली लगी कब तुम्हें बांसुरी और अधर तक उसका आना। भीगे हम भी भीगे तुम भी शायद था सौभाग्य हमारा। भ्रान्ति लिए बैठा हूँ अब तक सावन था या प्यार तुम्हारा। कह देने से कम हो जाता दुविधा में क्यों जीते-मरते।…

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"#Pratiyogita Kavita by Gyanendra Mohan ‘ Gyan ‘"

Pratiyogita Kavita by Anju Motwani

“सावन (वर्षा ऋतु ) ” बरसी सावन की बदली बरसे नैना झम झम तेरे मेरे मन की दूरी होगी कैसे कम खोये खोये नैन मेरे और खोया दिल का चैन काटे से भी कटे न दिन ,मैं जागूँ सारी रैन भीगा भीगा मेरा मन और भीगा यह  मौसम बरसी सावन की बदली बरसे नैना झम झम तुम बिन सूना सूना है मेरा आँगन ,घर द्वार भाये न  मुझे तो अब सावन के भी त्योहार याद…

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pratiyogita kavita by Manish Singh ‘ Vandan ‘

*# बारिश का महीना #* ———————- बारिश का भीगा महीना झमाझम बूँदें करती चोट ऐसे मदमस्त फ़िजा मे नीयत मे आ जाती खोट बादलों का कर्कश शोर दामिनी का करतल जोर मन बावला हुआ जाता है देखता हूँ जब नाचता मोर कोयल-पपीहे की कूक दिल मे जगाती है हूक वर्षा-मेघ सा हो आलिंगन जहाँ की आँखों मे धूल फूँक हरियाली चक्षु को भाती है प्रेमी चित्त को लरजाती है शुष्क बदन मे अनायास काम की…

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Pratiyogita Kavita by Dev Kumar

जब-जब ये सावन आता है। काली-काली इन घटाओं में, मौसम की दीवानी इन आदाओं में, खुशबू सी उड़ती इन हवाओं में, मिट्टी की महक जब फैले फ़िज़ाओं में, कोई छूटा दामन याद आता है। जब-जब ये सावन आता है। महके-महके फूलों में, हिलोरे लेते झूलों में, शबनम सी बिछी फूलों पे, इक तस्वीर नज़र आती है पानी के बबुलों में। कोई भूला साथी याद आता है। जब-जब ये सावन आता है। होंठो पे सजते गीतों…

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"Pratiyogita Kavita by Dev Kumar"