#dohe (Muktak ) by Mukesh Marwari

कुछ राजस्थानी दोहे:-

 

गणगौर्यां चली सासर,  ईसर जी को साथ |

दोन्युँ नाचण लागर्या, पकड़-पकड़ कर हाथ ||

 

 

रजपुतानों आज बस्यो, कई बरसां पेली |

मरगा राणा मोकळा, कई मरगा माली ||

 

 

बिनणी देखी सोवणी, और हाथों कि चुड़ी |

साहब फूँकी काया नं, पी कर दारु बीड़ी  ||

 

 

प्रेम प्रतीक मीरा ही, और ढ़ोलामारू |

प्रित मं मरगा तब ढोला,और अब पिगा दारु |

 

✍कवि मुकेश मारवाडी़

नवलपुरी

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