#Dr Madan Gopal

‘रानी झांसी के बलिदान दिवस पर मेरी श्रद्धा मयी काव्यात्मक श्रद्धांजलि ’’– —————————————————————

‘’ कोई नही जहाँ मे सारे मनु का सानी है !
मेरी छबीली रानी -झांसी का जो पानी है !!
बिंदिया व कंगना, चूडिया करती पसंद थी !
संग रण के लिये बांधती वो बाजू -बंद थी !!
कामुकता – कामिनी ने काम वासना छांटी !
माथे तिलक सजाती थी झांसी की वो माटी !! ’’
001
“सर्वस्व अपना क्रांती-मयी उद्येश के लिये !
संचय नही किया थाखर्च देश के लिये !!
तन,मन, व धन न्योछावर कर् देश पे दिया !
परिवार से बडा है राष्ट्र सिध्द ये किया !!”
‘’ सुख ,भोग – मयी दासता का ना वरण किया !
आजादी की थी जंग मे खुद का मरण किया !!
स्वाधीनता – संग्राम वेग रुकने ना दिया !
खुद काट लिया शीश उसने झुकने ना दिया !! ‘
002
“ कई -सदियो मे एक होती है ऐसी कहाँनियॉ !
निस्वार्थ होम करदे जो अपनी जवानियॉ !!
सिद्धांत अपने गढ लिये और आगे बड गई !
रणचण्डी बनके गोरो की छाती पे चढ गई !!
साहस के आगे रानी के साहस सुबक गया !!

गोरो का हर सिपाही दुम-दबा दुबक गया !!

दबा !! सिर धड से अलग कर दिये जो सामने अडे !
घोडे की टाप नीचे गोरो के थे शव पडे !!
कोहराम मचा देती थी बैरी के वो दल मे !
आंधी वो तूफान उस संग्रामे – अटल मे !!”
003
“ मा भारती की रोकने बर्बादी के लिये !
अवतार बनके आयी थी आजादी के लिये !!
नहि आम थी रानी मनु महारानी खास थी !
जिसके भवानी हिय मे करती निवास थी !!
क्या फौलादी इरादो से देह मनु की थी बनी !
कितनी महान भावनओ की थी वो बनी !!
बन स्वाभिमानी तान सीना तर्क कर सके !
वे काम कर दिखाये जो ना मर्द कर सके !! ”
004 ————————————————————————————–
राष्ट्र-कवि- डा. मदन गोपाल बिरथरे ”मार्तण्ड” नई दिल्ली -सूत्र—7905906204 – -7905907122

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