Dr. Sarla Singh

आईना
आईना कभी किसी सूरत मेंं,
झूठ कभी नही बोला करता ।
बोलता है बस वो वही उतना,
वही जो देखता है हकीकत वो।
लाख लगा कर तरह तरह से ,
रंग -रोगन की परत को तुम ।
छिपा लो दुनिया से कितना ,
अपने चेहरे की हकीकत को ।
जिंदगी के सफर में भी साथी,
ये वक्त एक आईना ही तो है ।
कर देता है ये भी ज्यों का त्यों,
हकीकत का बयां है जीवन में।
लाख बनावट करले कोई भी ,
कैसा भी दिखावट करले कोई ।
सूरते हकीकत तो हरहालत में,
आज या कल बयां होजाती है।
आईना झूठ नहीं बोला करता ,
बोलता है वही जो देखता है वो।
वक्त भी झूठ नहीं बोला करता ,
करदेता है हकीकतेबयां वो भी।
हाँ वक्त लग सकता है इतना सा,
वो बयां हो आज या हो वो कल ।।
डॉ.सरला सिंह
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