#Gazaal by Azam Sawan Khan

ग़ज़ल

ऐ सनम मुखड़ा तुम्हारा चाँद है
आसमाँ को छोड़ आया चाँद है

क्या बताऊँ मैं जमीं पे हूँ ब हूँ
यार हमने आज देखा चाँद है

मैं नहाऊं चाँदनी में कैसे अब
की उदासी में जो डूबा चाँद है

दिल उदासी से है भर जाता बहुत
जब भी पर्दा मुझसे करता चाँद है

दूर होते हैं अँधेरे ग़म के सब
जब फ़लक पे यार खिलता चाँद है

छाते हैं ग़म के अँधेरे हर तरफ
बादलों में जब भी छिपता चाँद है

कैसे “आज़म” दिल सँभाले अब कोई
लग रहा वो आज प्यारा चाँद है

आज़म सावन खान

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