#Gazal by Aasee Yusufpuri

जमाले हुस्न   अयां हो   तो नूर    जल जाये

नाक़ाबे रूख़   वो हटा दें तो   तूर जल जाये

 

ब शौक़े  सोज़े   दरुं   मुन्तज़िर हैं     परवाने

जो हुक्म हो तो  ये  शम्आ हुज़ूर जल जाये

 

संभल के छूना कि शोला सिफ़त शराब है ये

इसे   जो   छूले कोई    बे  शऊर   जल जाये

 

चमन में   आग लगाई है    इस लिए    उसने

चमन के साथ    गुलों का    ग़रूर जल जाये

 

अजब नही कि    सरे दस्त    इस गुलिस्तां में

गुलों की   आग से    शाखे तय्यूर  जल जाये

 

मलाल कैसा जब अपना ही आशियाँ  न रहा

शजर जले या   शजर का ज़हूर    जल जाये

 

चराग़   जलने से बेहतर है   गुल रहे “आसी”

वो जिसकी लौ से   कोई बेक़सूर   जल जाये

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