#Gazal by Aasee Yusufpuri

मुझको मालूम है इक रोज़ ज़ुबां खोलेगी

ज़िन्दगी मांग ले मुझसे तू अभी जो लेगी

 

कौन देता है यहां जान किसी की ख़ातिर

ये जो दुनिया है बहुत होगा ज़रा रो लेगी

 

मैंने रग-रग का लहू देके संवारा है इसे

मैं अगर चुप भी रहूँगा तो ग़ज़ल बोलेगी

 

तेरे हमराह तो दुनिया भी है आसी भी है

हमसफ़र अब ये बता दिलरुबा किसको लेगी

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