#Gazal By Aasee Yusufpuri

ये लम्हा अगर जंग का टल जाये तो अच्छा
बातों से कोई राह निकल जाये तो अच्छा

हर सिम्त से उठते हैं अदावत के शरारे
तूफ़ाने वफ़ा इनको निगल जाये तो अच्छा

नाज़ुक है बदन प्यार का किरने न जला दें
सूरज ये अगर बुग़्ज़ का ढ़ल जाये तो अच्छा

सरहद पे नज़र आता है नफ़रत का अँधेरा
इक शम्मा अगर प्यार की जल जाये तो अच्छा

लाज़िम है कोई फूल खिले दश्त में आसी
माली का दिले संग पिघल जाये तो अच्छा

____
आसी यूसुफ़पुरी

Leave a Reply

Your email address will not be published.